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विश्व पर्यावरण दिवस: पर्यावरण को लेकर कब गंभीर होगा समाज?

सार

दरअसल,पर्यावरण का संरक्षण हमारा नैतिक कर्तव्य है। आज सरकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है। लाखों रुपया खर्च किया जाता है। केवल मात्र खानापूर्ति करने से कुछ नहीं होगा। आज वायु प्रदूषण एक विकराल और लाइलाज समस्या बनती जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि वायु प्रदूषण के कारण दुनिया में प्रतिवर्ष 20 लाख लोग जान गंवाते हैं। पराली जलाई जा रही है। कपड़ा जलाया जा रहा है। प्लास्टिक जलाया जा रहा है। इन सब से वातावरण अशुद्ध होता जा रहा है।
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सेमिनार, कार्यक्रम और रैलियों से कितना बच जाएगा पर्यावरण - फोटो : iStock
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विस्तार
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पर्यावरण असंतुलन एक विश्वव्यापी गंभीर समस्या बनती जा रही है। कैसी विडंबना है कि आज पर्यावरण शुद्व है, मगर हर चेहरे पर मास्क लगा है। कोरोना महामारी में कोरोना कर्फ्यू और लाॅकडाउन लगने से पर्यावरण शुद्ध हो गया है। गंगा का पानी निर्मल हो गया है। हवा शुद्ध हो गई है। प्रकृति महक गई है। प्रकृति खुश है। पेड़-पौधे हरे भरे और साफ हो गए हैं। शुद्ध हवा की बयार है। 

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दो महिनों में काफी कुछ बदला है। सप्ताह के दो दिन भी ऐसा ही कर्फ्यू लगाया जाए, तो काफी प्रभाव पड़ेगा। पर्यावरण के लिए यह बहुत ही लाजिमी है। बेशक आज 5 जून 2021 को पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। विश्व में 5 जून 1974 को पहला पर्यावरण दिवस मनाया गया था। आज 47वां पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है, मगर ऐसे आयोजन केवल मात्र औपचारिकता भर रह गए हैं। 





एक दिन में नहीं बदलेगी तस्वीर 
केवल मात्र एक दिन पर्यावरण के संरक्षण के लिए संकल्प लिए जाते हैं। स्कूलों, कालेजों और स्वयंसेवी सस्थाओं द्वारा रैलियां निकाली जातीहैं। सेमिनार लगाए जाते हैं। सरकारी विभागों और सरकारी संस्थाओं में अधिकारीयों के साथ स्कूली बच्चों को शपथ दिलाई जाती है। फिर पर्यावरण को प्रदूषित करके धज्जियां उड़ाई जाती है।

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दरअसल,पर्यावरण का संरक्षण हमारा नैतिक कर्तव्य है। आज सरकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है। लाखों रुपया खर्च किया जाता है। केवल मात्र खानापूर्ति करने से कुछ नहीं होगा। आज वायु प्रदूषण एक विकराल और लाइलाज समस्या बनती जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि वायु प्रदूषण के कारण दुनिया में प्रतिवर्ष 20 लाख लोग जान गंवाते हैं। पराली जलाई जा रही है। कपड़ा जलाया जा रहा है। प्लास्टिक जलाया जा रहा है। इन सब से वातावरण अशुद्ध होता जा रहा है।

जहरीले धुएं के कारण लोग सांस की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। - फोटो : iStock
जानलेवा हो चुका है प्रदूषण
आज पूरे विश्व में वायु प्रदूषण जानलेवा साबित होता जा रहा हैै। चंद लोगों की जानबूझकर की गई गलतियों से आज वातावरण में प्रदूषण फैल रहा है। आज मानव अपनी ही गलतियों के कारण सासों की बीमारियों और अन्य लाईलाज बीमारियों से ग्रस्त हो रहा है। दमा का शिकार हो रहा है। यह सब पर्यावरण प्रदूषण का ही नतीजा सामने आ रहा है। जब तक मानव सच्चे दिल से पर्यावरण का सरंक्षण नहीं करेगा, तब तक ऐसे आयोजन व्यर्थ है।

एक दिन पर्यावरण को बचाने के लिए नारे लगाए जाते है, फिर पूरी साल पर्यावरण की याद नहीं रहती। सभी की सहभागिता ही पर्यावरण को सुरक्षित कर सकती है। आज आपदाएं हो रही हैं, पहाड़ दरक रहे हैं, बादल फट रहे हैं, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, पेड़-पौधों का अंधाधुंध कटान किया जा रहा है, जंगलों में आग लगाई जा रही है। सरकारों और समाज के बुद्धिजीवियों को पर्यावरण के संरक्षण हेतू मंथन करना होगा। पर्यावरण के सरक्षंण के लिए अभियान चलाने होगें।
 
भाषणबाजी करने से कुछ नहीं होगा धरातल पर काम करना होगा। एक दिन चोचलेबाजी की जाती है, फिर पूरे साल 365 दिन लोग पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर सही मायनों में पर्यावरण को बचाना है, तो सभी को एकजूट होना होगा। तभी हम इसका संरक्षण कर सकते हैं।

आज अवैज्ञानिक रूप से खनन किया जा रहा है, पहाड़ि़यां दरक रही हैं, खड्डों का सीना छलनी किया जा रहा है, जलस्रोत सूख रहे हैं, जलस्तर घटता जा रहा है। खनन करके आज इंसान महल बना रहे हैं, मगर एक दिन पानी को तरसेगें। खनन को रोकना होगा। नदियों और नालों का जलस्तर गिर रहा है। आज अधिकांश नदियों का पानी प्रदूषित हो चुका है। आज पर्यावरण को सुरक्षित रखनें के लिए स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे है। पर्यावरण की स्वच्छता ही हमारा धर्म है।

मिलकर उठाने होंंगे छोटे छोटे कदम 
पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त करना होगा। आज जहां पूरे भारतवर्ष में पर्यावरण सरंक्षण के लिए स्वच्छता अभियान चला हुआ है, करोड़ों रुपया इस अभियान पर खर्च किया जा रहा है कि वातावरण शुद्ध रहे और हर नागरिक स्वस्थ रहे, क्योंकि कहते हैं कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता बेहद जरूरी है। मगर कुछ बीमार और नीच मानसिकता के लोग इस अभियान को बट्टा लगा रहे हैं।

ऐसे लोग गांव और शहरों में गंदगी फैलाने और प्रदूषण बढ़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। दरअसल, इन लोगों के दिमागों में गंदगी ही भरी पड़ी है। नतीजतन यह गंदगी ही फैलाएगें। गंदगी के कारण जब बीमारियों से ग्रस्त होंगे, तब इन लोगों के होश ठिकाने आएगें।सड़कों और दुकानों के सामने गंदा कूड़ा-कचरा और कपड़ा जला रहे हैं, जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है। इस जहरीले धुएं के कारण लोग सांस की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। मगर इन लोगों को इससे कोई सरोकार नहीें है कि उनकी छोटी सी गलती के कारण कितना बड़ा नुकसान हो रहा है।
 
सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों के धुएं के कारण भी जनमानस को नुकसान हो रहा है। ऐसे वाहन चालकों के लाइसेंस रदद करने चाहिए, जो ऐसे जानलेवा कार्याें को अंजाम देतें है। ऐसे लोगों कि छोटी सी गलती कितने लोगों का अहित कर रही है। आज भले ही पूरे भारत में स्वच्छता अभियान को लेकर कार्यक्रम चल रहे हैं, मगर इन लोगों को इस से कोई सरोकार नहीं है। इन पर 'हम नहीं सुधरेंगे' का लेबल लगा हुआ है।

यह बेशर्म टाइप के लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं और लगातार गंदगी फैला रहे हैं।बसफाई अभियान के लिए सामाजिक संस्थाएं कदम से कदम बढ़ा रही है और इस अभियान में लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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छोटी-छोटी कोशिशों से बदलेगी पर्यावरण की तस्वीर - फोटो : Pixabay
कुछ लोगों को सफाई पसंद नहीं है। वे लोग आज भी गंदगी फैला रहे हैं। दुकानों और मकानों का सारा कचरा लोगों की दुकानों के आगे जला रहे हैं। ऐसे लोग इस अभियान को बट्टा लगा रहे हैं। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस प्रकार के लोगों पर शिकंजा कसा जाए, जो गंदगी फैला रहे हैं। अगर इन पर कानूनी कारवाई की जाए, तब इनको समझ आएगी कि गंदगी फैलाने कितना जुर्म है।

अक्सर देखा गया है कि लोग सुबह के समय ही कुड़ा फेंक देते हैं, जब सैर करने निकलते हैं। प्रशासन को चाहिए कि बाजारों में सीसीटीवी कैमरें लगाए जाएं, ताकि गंदगी फैलाने वालों की हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड हो जाए, तभी इन पर रोक लग सकती है।

सरकार को उठाने चाहिए कदम
सरकार को चाहिए कि प्रदूषण और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ कारवाई की जाए और मनमानी करने वालो पर जुर्माना लगाया जाए, तभी इन लोगों को होश आएगी। गंदगी फैलाने वाले लोगों को सजा दी जाए, ताकि फिर गंदगी फैलाने का दुस्साहस न कर सकें। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी समय-समय पर प्रदूषण फैलाने वालों पर नजर रखनी चाहिए। पंचायतों को भी ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए।

देश के प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण की स्वच्छता के इस यज्ञ में आहुती डालनी होगी, तो वह दिन दूर नहीं जब भारतवर्ष में प्रत्येक गांवों और शहरों में वातावरण स्वच्छ होगा। स्वच्छता अभियान को लगातार चलाना होगा, तभी गंदगी से निजात मिल सकती है। पर्यावरण को बचाना हमारा नैतिक कर्तव्य है। इस कर्तव्य से हमें विमुख नहीं होना चहिए। अगर सब एकजुट होकर काम करेगें, तो हम पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं।

सरकारी और गैर सरकारी सस्थाओं को इसमें अपना योगदान देना होगा, मिलजुल कर अभियान चलाने होंगे। पर्यावरण को संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। जागरूकता शिविरों का आयोजन करना होगा। संचार के माध्यमों से पर्यावरण को बचाने के लिए अलख जगानी होगी। पर्यावरण बचेगा, तभी मानव जीवन भी बचेगा। आज पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण को बचाने का एक संकल्प लेना होगा, तभी ऐसे पर्यावरण दिवसों की सार्थकता होगी।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 
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