नाम न छापने के अनुरोध के साथ संघ के एक पदाधिकारी का कहना है कि संघ योगी को मोदी का विकल्प नहीं बल्कि उनके बाद की भाजपा के लिए तैयार कर रहा है। जब तक नरेंद्र मोदी राजनीति में सक्रिय हैं, वही भाजपा और सरकार के शीर्ष नेता हैं और रहेंगे। लेकिन उनके सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद नेतृत्व शून्यता नहीं पैदा होनी चाहिए जैसी कि अटल बिहारी वाजपेयी के बाद पैदा हो गई थी इसलिए संघ की कोशिश है कि भाजपा में दूसरी पंक्ति के कुछ मजबूत नेता समय रहते तैयार हो जाएं।
अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति के उदारवादी युग के नेता थे जो सबको स्वीकार थे और नरेंद्र मोदी राजनीति के विकासवादी युग के नेता हैं जिन्होंने देश विदेश में विकास और सुशासन में अपनी छाप छोड़ी और राजनीति का अगला युग प्रखर राष्ट्रवाद का है जिसमें योगी जैसा प्रखर राष्ट्रवादी और द़ृढ़ हिंदुत्ववादी नेता ही भाजपा को आगे ले जा सकता है। इसलिए संघ किसी भी सूरत में योगी आदित्यनाथ को कमजोर नहीं होने देगा।
बताया जाता है कि पिछले दो दिनों से राजधानी में चल रही संघ के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में यह सहमति बनी है जिसे संघ द्वारा भाजपा को अवगत करा दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक संघ में यह राय भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष की लखनऊ यात्रा के बाद तैयार रिपोर्ट पर चर्चा करने के बाद बनी है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व की बैठक गुरुवार से दिल्ली में हो रही है जो शनिवार तक चलेगी।
बैठक में सर संघचालक मोहन भागवत, सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले समेत संघ के सभी प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं। बैठक में पहले दिन पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति और कोरोना को लेकर उत्पन्न स्थिति पर चर्चा हुई। दूसरे दिन शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर गंभीर चिंतन मनन हुआ। संघ नेतृत्व ने सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष की हाल ही में की गई लखनऊ यात्राओं के बाद दी गई रिपोर्ट पर विचार विमर्श हुआ।
सूत्रों के मुताबिक दोनों ही रिपोर्ट के आधार पर संघ नेतृत्व उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के कामकाज से संतुष्ट है। संघ का मानना है कि कोविड संक्रमण की पहली लहर में जहां योगी सरकार ने सफलता पूर्वक कोरोना को नियंत्रित किया वहीं दूसरी लहर में भी स्थिति को संभालने के पूरे प्रयास किए गए और उसमें सफलता भी मिली।
संघ में एक स्वर से यह राय बनी है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही लड़े जाने चाहिए। इसके साथ ही राज्य में सभी जातियों और समुदायों के सामाजिक संतुलन को साधने पर भी विचार हुआ और इसे लेकर संघ की राय है कि इस पर भाजपा नेतृत्व को अपने हिसाब से फैसला लेना चाहिए किसे क्या जिम्मेदारी दी जाए जिससे पार्टी मजबूती से चुनाव में विपक्ष की चुनौती का सामना कर सके।
संघ की बैठक में उत्तर प्रदेश में योगी मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार और विधायकों की भावना पर भी चर्चा हुई। संघ नेतृत्व की राय है कि चुनाव में अब सिर्फ आठ महीने का समय है और दिसंबर तक ही सरकार कुछ कामकाज कर सकती है उसके बाद चुनावों की घोषणा और आचार संहिता का समय आ जाएगा। इसलिए सरकार के कामकाज गति देने, नौकरशाही के बीच समन्वय और संतुलन बनाने के लिए पूर्व आईएएस अरविंद कुमार जैसे अनुभवी प्रशासक को मंत्री बनाकर प्रदेश के विकास कार्यों से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से सरकार और पार्टी को लाभ हो सकता है।
संघ नेतृत्व का मानना है कि किसी मंत्री को क्या विभाग दिया जाए यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और यह उन्हें ही तय करना चाहिए। इसके साथ ही संघ ने कोरोना संकट के कारण सरकार की छवि को हुए नकुसान की भरपाई के लिए क्या किया जाना चाहिए इस पर भी चर्चा की और जल्दी ही संघ के सभी संगठन इस दिशा में सक्रिय होंगे।