कई निर्देशकों को प्रेरित करने वाले विटारियो ड सिका का नाम आपने अवश्य सुना होगा, जिसने ‘बाइसिकिल थीफ़्स’ बनाई। सत्यजीत राय ने इस फ़िल्म ‘द बाइसिकिल थीफ़्स’ के विषय में कहा, ‘मैं थियेटर से निश्चय करके निकला। मैं एक फ़िल्म मेकर बनूंगा।’ यह व्यक्ति बहुत गरीबी में इटली में पैदा हुआ, इसने क्लर्क के काम से अपना आर्थिक जीवन प्रारंभ किया, फिर फिल्मों से जुड़ा। यह महान निर्देशक से पहले एक सफ़ल मंच तथा फ़िल्म अभिनेता था। उसने जैसी गंभीर फ़िल्में बनाई इसके उलट वह कॉमेडी भूमिकाएं कर रहा था।
1940 से वह निर्देशन की ओर मुड़ गया। शुरू में इसने कॉमेडी फिल्में बनाई भी। अपनी पांचवीं फ़िल्म ‘द चिल्ड्रेन आर वाचिंग अस’ से उसका सुर बदल गया। 1946 में इसने ‘शूशाइन’ बनाई और 1948 में कालजयी फ़िल्म ‘द बाइसिकिल थीफ़्स’।
चर्चित ‘द बाइसिकिल थीफ़्स’
‘द बाइसिकिल थीफ़्स’ एक गरीब आदमी एंटोनिओ रिकी के इर्द-गिर्द चलती है। वह काम पाना चाहता है ताकि अपनी पत्नी और बेटे का भरण-पोषण कर सके। चोरी हो गई अपनी साइकिल की खोज में वह रोम में भटक रहा है। साइकिल इस आदमी के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि उसे अपनी साइकिल पर पोस्टर टांग कर घूमने का काम मिलने और कुछ आमदनी की उम्मीद है।
युद्धोपरांत इटली में गरीबी को दिखाती इस फ़िल्म को 1949 का अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था और इसमें लम्बेर्टो मैगिओरनी ने एंटोनिओ की भूमिका की है, उसके बेटे के रूप में एन्ज़ो स्टैओला तथा पत्नी लिअनेला कारेल बनी है। साइकिल चोर की भूमिका में विटोरिओ एंटोनुसी है। फ़िल्म के स्क्रिप्टराइटर ज़वाटीनी हैं।
‘यस्टरडे, टूडे एंड टुमारो’ के लिए डि सिका को 1963 में दूसरा ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त हुआ। जब सब लोग सोच रहे थे कि डि सिका चूक गया है, इसने ‘द गार्डेन ऑफ़ द फ़िंज़ी-कोटिनिस’ बनाई और इस निर्देशक ने तीसरा ऑस्कर भी झटक लिया।
‘ए ब्रीफ़ वेकेशन’ इसकी अंतिम फ़िल्म है। डि सिका ने बेहतरीन फ़िल्में बनाई, इटली से आने वाली तथा विश्व प्रसिद्ध तारिका सोफ़िया लॉरेन के साथ अभिनय किया। न केवल सोफ़िया लॉरेन के साथ अभिनय किया वरन सोफ़िया को अपनी फ़िल्म में निर्देशित भी किया। आज चूंकि हम इटली से आने वाले सिने-कलाकारों की बात कर रहे हैं तो इटली से आने वाली तथा समस्त सिने-जगत पर छा जाने वाली सोफ़िया लॉरेन की बात करेंगे।
सोफ़िया लॉरेन का सफर
डि सिका की भांति सोफ़िया का बचपन भी अत्यंत गरीबी में गुजरा था। सोफ़िया की मां बहुत खूबसूरत थी, बचपन की बदसूरत (लोग उसे छड़ी और दतखोदनी कहते थे) सोफ़िया बार-बार दुनिया की खूबसूरत औरतों की सूची में शामिल की गई। इस स्क्रीन लेजेंड को इसके प्राकृतिक काले बालों, चमकती हरित आंखों, गहन मोहक आवाज के लिए जाना जाता है। उसकी लंबाई इतनी अधिक थी कि कई अभिनेता उसके साथ काम करने में हिचकते थे।
एक स्विस अभिनेत्री के नाम की तर्ज पर अपना नाम लॉरेन रखने वाली सोफ़िया ने 14 साल की बाली उमर में एक सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग लिया और वहीं से उसका भाग्य बदल गया।
इसी समय उससे 22 साल बड़े फ़िल्म प्रड्युसर कार्लो पोंटी की उस पर नजर पड़ी नतीजा हुआ सिने-जगत में एक सितारा जन्मा, बाद में दोनों ने शादी की। सोफ़िया लॉरेन ने हॉलीवुड और इटली दोनों स्थानों पर फ़िल्म में काम किया। एक समय ऐसा आया जब उसने अपने देश की नागरिकता छोड़ दी, बाद में (2005) इटली ने उसे ऑनरेरी नागरिकता प्रदान की।
नोबेल पुरस्कृत बॉब डिलेन ने सोफ़िया को अपने एक गीत (‘आई शेल बी फ़्री’) में पिरोया था। इस सैक्स सिम्बल ने ‘बॉय ऑन ए डॉल्फ़िन’, ‘लेजेंड ऑफ़ लोस्ट’, ‘द प्राइड एंड द पैशन’, ‘हाउसबोट’, ‘डिजायर अंडर दि एल्म’, ‘ए ब्रेथ ऑफ़ स्कैंडल’, आदि तमाम फ़िल्मों में काम किया। सोफ़िया को याद किया जाएगा उसकी ‘टू वीमेन’ की भूमिका के लिए। सोफ़िया को महान एक्ट्रेस तथा महान व्यक्तित्व मानने वाले डि सिका की ‘टू वीमेन’ युद्ध के दौरान एक मां (सोफ़िया लॉरेन) बलात्कार से न खुद को बचा पाती है न ही अपनी किशोरी बेटी को।
फ़िल्म को सर्वोत्तम अभिनेत्री का ऑस्कर प्राप्त हुआ। सोफ़िया ने कई दिग्गज अभिनेताओं जैसे पॉल न्यूमैन, मार्लोन ब्रांडो, ग्रेगरी पेक के साथ काम किया। ‘द फ़ॉल ऑफ़ द रोमन एम्पायर’, ‘मैन ऑफ़ ला मांचा’, ‘द कसांड्रा क्रॉसिंग’, मैरिज इटालिअयन स्टाइल’ आदि सोफ़िया की कुछ और फ़िल्में हैं। 2004 में भी खूबसूरत सोफ़िया ने ‘लाइव्स ऑफ़ द सेंट्स’ में काम किया। 1991 में उसे ऑनरेरी एकेडमी अवॉर्ड दिया गया और ‘सिने-संसार का एक खजाना’ संज्ञा से नवाजा गया।