फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: क्यूबा का सिनेमा इतिहास, आंदोलन के इस ओर-उस ओर

सार

क्यूबा के इतिहास की भांति इसका सिने-इतिहास भी उथल-पुथल भरा रहा है। इसके सिने-इतिहास को आंदोलन पूर्व तथा आंदोलन पश्चात दो स्पष्ट भागों में बांटा जा सकता है। बीसवीं सदी के प्रारंभ में सिनेमा क्यूबा में पहुंच गया था।
विज्ञापन
क्यूबा सिनेमा का इतिहास - फोटो : Istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वेस्टइंडीज का देश क्यूबा कैरिबियन इलाके का सबसे बड़ा द्वीप है। क्यूबा का इतिहास प्रारंभ से बहुत उथल-पुथल भरा रहा है। 1492 में क्रिस्टोफ़र कोलंबस ने इस पर स्पेन के लिए अधिकार किया था, इसके मूल निवासियों का अब अता-पता नहीं है। एक समय गन्ने के कारण इस पर आधिपत्य किया गया था लेकिन आज भी क्यूबा में जीवन आसान नहीं है। वहां भोजन, ट्रांसपोर्ट, बिजली तथा अन्य जरूरत की चीजों की किल्लत है।

विज्ञापन


सन् 1898 तक इस पर स्पेन का शासन बना रहा। इसके बाद इस पर अमेरिका का आधिपत्य हो गया। स्वतंत्र होने के बाद भी इस पर अमेरिका का वर्चस्व बना रहा। 1 जनवरी 1959 में फ़िडेल कास्त्रो ने तानाशाही उखाड़ फेंकी, मगर रूस से नजदीकी के कारण इसे कई आर्थिक कठिनाइयां झेलनी पड़ीं। फ़िर भी क्यूबा के अधिकांश नागरिक अपने आंदोलनकारी समाज पर गर्व करते हैं। हम भारतीय क्यूबा और उसके नेताओं, फ़िडेल कास्त्रो, च्वेग्वेरा से खूब परिचित हैं। 
 

क्यूबा के इतिहास की भांति इसका सिने-इतिहास भी उथल-पुथल का रहा है। इसके सिने-इतिहास को आंदोलन पूर्व तथा आंदोलन पश्चात दो स्पष्ट भागों में बांटा जा सकता है। बीसवीं सदी के प्रारंभ में सिनेमा क्यूबा में पहुंच गया था। मैक्सिको सिटी से क्यूबा आकर गैब्रियल वेय्रे ने हवाना की सीमा पर जनता को लुमियर भाइयों के काम से परिचित कराया। उसने एक सप्ताह लुमियर की फ़िल्में दिखाई। कुछ सप्ताह के बाद एडिसन की मशीन भी क्यूबा पहुंची और कैनवास के परदे पर लोगों ने चलती-फ़िरती तस्वीरें देखीं।

 

विज्ञापन

आंदोलन के पूर्व क्यूबा का सिनेमा

सन् 1959 के आंदोलन के पूर्व यहां पूरी लंबाई की करीब 80 फ़ीचर फिल्में बनी थीं। इनमें से अधिकांश फिल्में हॉलीवुड की तर्ज पर मेलोड्रामा, म्युजिकल एवं कॉमेडी थीं। वही फ़िल्में बन रही थीं जो शासकों को जंचती थीं, जो विदेशी ताकत के अनुरूप थीं। तब तक क्यूबा पूरी तरह अमेरिकी सांस्कृतिक छाया की गिरफ़्त में था। वास्तव में आंदोलन के पूर्व क्यूबा का अपना सिनेमा था ही नहीं। शुरू में क्यूबा में सिनेमा के नाम पर क्यूबन-स्पेनिश-अमेरिकन युद्ध से जुड़ी न्यूजरील की फ़ुटेज बनती थीं।

आंदोलन के बाद आज क्यूबा में औपनिवेशिक तथा कम्युनिस्ट दोनों कालों से जुड़ी फ़िल्में बनती हैं और दुनिया भर में देखी जाती हैं। इनमें तेजी से हुए परिवर्तन को देखा जा सकता है। 1960 में सिनेमा से जुड़ी संस्था ICAIC का निर्माण हुआ जिसका प्रमुख काम क्यूबा की सिने-विरासत को सुरक्षित कर उसका प्रचार-प्रसार करना है।

यह संस्था देश-विदेश में क्यूबा की फ़िल्में दिखाती है। क्यूबा में पुरानी फ़िल्म सुरक्षित रखने की सुविधा न होने के कारण पहले की फ़िल्मों का बहुत नुकसान हुआ। ICAIC पुरानी फ़िल्मों का रेस्टोरेशन करती है। मरम्मत (रेस्टोरेशन) एक जटिल प्रक्रिया है, अभी क्यूबा में इसकी पूरी सुविधा न होने के कारण ये लोग बाहरी संस्थाओं, खासकर अमेरिका से तकनीकि सहायता लेते हैं। 

मशहूर फिल्म ‘लुसिया’

‘लुसिया’ एक ऐसी ही फ़िल्म है जिसका रेस्टोरेशन किया गया है। यह क्यूबा की तीन स्त्रियों की कहानी है, तीनों का नाम लुसिया है। इन्होंने क्यूबा के इतिहास के तीन आंदोलन, उन्नीसवीं सदी का अंत, बीसवीं सदी का तीसरा दशक तथा 1959 के कास्त्रो आंदोलन के ठीक बाद कठिन जीवन संघर्ष किया था। ‘डेथ ऑफ़ ए ब्यूरोक्रेट’, ‘ला सर्पिएंट रोजा’, ‘द लास्ट सपर’, ‘स्ट्राबेरी एंड चॉकलेट’ आदि ऐसी ही फ़िल्में हैं जिनकी मरम्मत कर उन्हें नवजीवन प्रदान किया गया है।

एक समय ‘स्ट्राबेरी एंड चॉकलेट’ (1993) सर्वोत्तम विदेशी फ़िल्म के रूप में ऑस्कार के लिए नामांकित हुई थी। 108 मिनट की इस फ़िल्म के निर्देशन टॉमस गुटिएरेज़ एलिआ तथा जुआन कार्लोस टैबिओ हैं। इसमें दो धुर विपरीत व्यक्ति एक-दूसरे को स्वीकार करते हैं, एक-दूसरे से प्रेम करने लगते हैं।

कॉमेडी तथा रोमांस की इस फ़िल्म में एक समलैंगिक है, एक कम्युनिस्ट है, जबकि दूसरा व्यक्तिवादी है। एक शक्की है, दूसरा सहज विश्वास करने वाला है। टॉमस गुटिएरेज़ एलिआ, हम्बर्टो सोलास से लैटिन अमेरिका तथा दुनिया के अन्य फ़िल्म निर्देशकों प्रभावित हैं।

विज्ञापन

विश्व सिनेमा का इतिहास, क्यूबा सिनेमा - फोटो : Istock
एक समय निर्देशक मैनुअल ऑक्टाविओ गोम्ज ने ‘द फ़र्स्ट चार्ज ऑफ़ मैचेट’ एवं ‘द डेज ऑफ़ वाटर’ जैसी फ़िल्में बनाई थीं। फ़र्नांडो परेज एक और ऐसे ही निर्देशक हैं, उन्होंने 1987 में ‘क्लेडेन्स्टीनो’ बनाई। आज क्यूबा में नवीनतम तकनीक उपलब्धियों के साथ बेहतरीन फ़ीचर फ़िल्में तथा डॉक्यूमेंट्री बनती हैं। 
 

 म्युजिकल-रोमांस ‘चीको एंड रीटा’

2010 में बनी ‘चीको एंड रीटा’ एक म्युजिकल-रोमांस, एनीमेशन फ़िल्म है। हवाना के चीको पियानोवादक के सपने बड़े हैं, ऐसे ही सपने पाले हुई आकर्षक स्वर की मालकिन गायिका रीटा है। डेढ़ घंटे में संगीत और सपनों का तथा एक-दूसरे का पीछा करते हुए ये न्यूयॉर्क, पेरिस, हॉलीवुड, लास वेगास आते-जाते हैं। 47 साल इंतजार के बाद उनका मिलन होता है।

रीटा एक मोटेल में सफ़ाई कर्मचारी का जीवन बिता रही है। क्यूबा के प्रसिद्ध पियानोवादक और पांच बार ग्रैमी अवॉर्ड जीतने वाले बेबो वाल्डेस का ओरिजन साउंडट्रैक इस फ़िल्म को विशिष्ट बनाता है। फ़िल्म जाज संगीत तथा क्यूबा के इतिहास के एक कालखंड को साकार करती है। ‘चीको एंड रीटा’ ने 2012 में सर्वोत्तम एनीमेशन फ़िल्म का ऑस्कर नामांकन पाया।

‘क्यूबा लिब्रे’ में जिस समय फ़िडेल कास्त्रो प्रथम चुनाव की घोषणा कर रहे हैं उसी समय एक अति उग्रवादी समूह मैड्रिड की क्यूबा एम्बसी में घुस जाता है। इससे उग्रवादियों पुलिस का निशाना बनते हैं। सारी बात एक रिपोर्टर के माध्यम से दिखाई गई है। ‘कास्त्रो’स रिवोलुशन वर्सेस द वर्ल्ड’ (2019) फ़िडेल कास्त्रो और क्यूबा के कम्युनिस्ट आंदोलन के विषय में बायोपिक तथा डॉक्युमेंट्री है। 
 

चे ग्वेरा पर बनी फ़िल्में

दुनिया के युवाओं के चहेते और भारत के दीवाने चे ग्वेरा पर कई फ़िल्में बनी हैं। 1969 में ‘चे’ रिचर्ड फ़्लेइस्चर की इस फ़िल्म में क्यूबा के आंदोलन को फ़्लैशबैक में दिखाया गया है, चे डॉक्टर से राजनेता बन कास्त्रो के लिए प्रचार करते हैं। 2005 की ‘चे ग्वेरा’ इतिहासिक बायोपिक है। 102 मिनट में पीढ़ी-दर-पीढ़ी युवाओं को प्रेरित करने वाले विद्रोही, हीरो, प्रेमी, प्रसिद्ध चे ग्वेरा के जीवन को परदे पर उकेरा गया है। वे गरीबों तथा दमित जनता के मसीहा थे। 

निर्देशक जोस इवान ने अभिनेता एडुराडो नोरिएगा को चे के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसने चे ग्वेरा की बेचैनी, साहस, निर्भीकता, आंदोलन को उनकी सहायता करने को पूरी तरह साकार कर दिया है। एक ऐसा आंदोलन जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। चे ग्वेरा पर बनी तीसरी फ़िल्म ‘द मोटरसाइकिल डायरीज’ (2004) से सिने-दर्शक भली-भांति परिचित हैं।

126 मिनट की इस बायोपिक-एडवेंचर फ़िल्म में निर्देशक वॉल्टर सैलेस जवानी में चे ग्वेरा की मोटरसाइकिल यात्रा को परदे पर उतारते हैं। इस यात्रा ने दुनिया भर के युवाओं को चे का दीवाना बना दिया था। उनकी यह जीवन शैली युवाओं का आदर्श बन गई थी। यह फ़िल्म आज भी देखी और सराही जाती है।

‘द क्यूबा लिब्रे स्टोरी’, ‘हवाना डायरीज’, ‘द राफ़्ट: ला बाल्सा’, ‘फ़ोन्ड मेमोरीज ऑफ़ क्यूबा’, ‘बिफ़ोर नाइट फ़ॉल्स’, ‘पापा हेमिग्वे इन क्यूबा’, ‘द लेजेंड’ आदि इस सदी में क्यूबा से जुड़ी अन्य प्रसिद्ध फ़िल्में हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें