के.के. निराला
(आईएएस, सचिव और कमिश्नर
महिला एवं बाल विकास विभाग, गुजरात)
प्रशांत दास
(प्रमुख, यूनिसेफ गुजरात)
दुनियाभर में अगस्त महीने के पहले हफ्ते को 'विश्व स्तनपान सप्ताह' के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य नवजात के लिए स्तनपान के महत्व को लेकर माताओं को सूचित और जागरूक करना है। साल 2022 के लिए विश्व स्तनपान सप्ताह का थीम है "स्टेप फॉर ब्रेस्टफीडिंग: एजुकेट एंड सपोर्ट''। इस थीम के साथ वैश्विक स्तर पर नवजात स्वास्थ्य कल्याण के लिए स्तनपान को प्रोत्साहित करना है। बच्चे के शुरुआती विकास में इसकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
स्वस्थ जीवन के लिए स्वस्थ बचपन को मुख्य आधार माना जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं, जीवन के पहले 1000 दिन (गर्भधारण से बच्चे के दूसरे जन्मदिन के बीच का समय) बच्चों के विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान बच्चों के मस्तिष्क, शरीर और प्रतिरक्षा प्रणाली का विकास हो रहा होता है। जीवन के पहले दो वर्षों में मस्तिष्क भी सबसे तेजी से विकसित होता है। जन्म के बाद वातावरण और कई अन्य कारक मस्तिष्क के विकास को आकार देते हैं। चूंकि इसे भविष्य निर्माण काल माना जाता है ऐसे में इस दौरान पोषण का ख्याल रखना भी अति आवश्यक हो जाता है।
पोषण, निर्विवाद रूप से, बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण आयाम है। जन्म के शुरुआती छह माह तक स्तनपान और उसके बाद स्वस्थ और पौष्टिक आहार बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक होता है।
पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
बच्चों के विकास को लेकर किए गए तमाम अध्ययनों में पाया गया है कि पहले 1000 दिनों के दौरान पोषण और सीखने के शुरुआती अवसरों की कमी, विकास और शैक्षणिक क्षमता को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान देने की अपील करते हैं। ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट 2015 के अनुसार, पोषण में आज निवेश किए गए प्रत्येक डॉलर के बदले में भविष्य में देश को 16 डॉलर से अधिक का लाभ मिल सकता है। पोषण में निवेश से मानवीय और आर्थिक दोनों तरह के लाभ हैं।
मां स्वस्थ तो बच्चा स्वस्थ
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर तभी किया जा सकता है जब मां स्वस्थ रहेगी। इसलिए परिवार की जिम्मेदारी है कि वह गर्भवती की सेहत का भी विशेष ख्याल रखे। यदि गर्भावस्था के दौरान पोषण में कमी आती है तो इसका सीधा असर पल रहे शिशु की सेहत को प्रभावित करता है, जिसके कारण गंभीर जन्म दोष होने का भी संकट रहता है। इस तरह की दिक्कतों से बचे रहने और स्वस्थ बच्चे को जन्म को सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टर्स गर्भवती के आहार में विटामिन्स और खनिजों की अनुशंसित खुराक को शामिल करने की सलाह देते हैं।
गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म तक किसी कुशल परिचारक और चिकित्सक का साथ भी आवश्यक होता है, हाल के वर्षों में इस दिशा में काफी सुधार हुआ है, जिसका सुखद परिणाम मातृ-शिशु मृत्युदर में कमी के रूप में देखने को मिल रहा है। जन्म के पहले घंटे के भीतर ही बच्चे को स्तनपान शुरू कराने पर जोर दिया जाता है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध बच्चे के लिए अमृत के समान होता है।