ट्रैफिक की समस्या के हल के लिए भारत को सीखना होगा सिंगापुर से
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पार्किंग की समस्या और बढ़ती गाड़ियां
आज के समय में अगर हम पार्किंग की समस्या को राष्ट्रीय समस्या कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इसकी वजह से हर साल सड़क निर्माण क्षेत्र में हो रहा काम भी बढ़ते हुए ट्रैफिक केअसर का कम करने में उतना प्रभावी नहीं हो पा रहा है। आप किसी भी शहर,कस्बे में जाएं तो आपको सड़कों पर अवैध रूप से खड़ी गाड़ियां दिख ही जाएंगी। शहरों में तो यह हालत और भी बदतर हैं।
सरकारी नाकामी की वजह से लोगों ने सड़कों को ही अपनी पार्किंग की जगह बना लिया है। लोग सरकारी जगहों को भी अपनी समझकर स्कूटर या गाड़ी खड़ी कर देते हैं। दरअसल, जिस हिसाब से गाड़ियां बढ़ी हैं उस अनुपात में पार्किंग स्पेस के बारे में कभी कोई योजना ही नहीं बनी। अवैध पार्किंग के कारण सड़कें ही गायब होती जा रही है और गाड़ियां खड़ी होने की वजह से चलने की जगह ही नहीं।
ऐसा नहीं है की ये समस्या सुलझायी नहीं जा सकती, लेकिन उसके लिए हमें दूसरे देशों से सीखना होगा। उदाहरण के लिए सिंगापुर को देखें तो वहां नई गाड़ी खरीदने पर ना सिर्फ भारी-भरकम टैक्स देना पड़ता है बल्कि सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए अलग से परमिट भी लेना पड़ता है। इसके अलावा, एरिया लाइसेंस प्रणाली के तहत्, चुनिंदा क्षेत्र में प्रवेश के लिए अलग से लाइसेंस लेना होता है।
अवैध पार्किंग रोकने के लिए एक हॉटलाइन नंबर भी है, जिस पर कोई भी इसकी सूचना दे सकता है। भले ही ये सब अपने देश में लागू करना काफी कठिन है और कई वर्षों का समय भी लगेगा, लेकिन जो त्वरित समाधान नज़र आता है वो है सरकार और निकायों की सक्रियता। जहां सरकार कठोर नियम बना सकती है, भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान कर सकती है तो निकायों की जिम्मेदारी उनको पूरी ईमानदारी से जमीनी स्तर पर लागू करने की है।
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