अफगानिस्तान के इन प्रांतों पर तालिबान का कब्जा।
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वर्तमान में प्रेसिडेंट बाइडेन ने जब अप्रैल 2020 में अफगानिस्तान से समस्त अमेरिकी व नाटो फौजों की वापसी की घोषणा की तभी यह तय हो गया कि अफगानी धरती फिर से बड़े विनाश की तरफ जाएगी। आज के हालात यह हैं कि अगले 31 अगस्त तक अंतिम अमेरिकी सैनिक की वापसी से पहले पूर्ण रूप से अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण रोक पाना लगभग असंभव सा है।
अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि और United Nations Assistance Mission on Afghanistan (UNAMA) की प्रमुख डियोब्राह लियोंस ने कल ही हालात की भयावहता बयान करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद व विश्व समुदाय से यह मार्मिक अपील की है कि यदि तत्काल ही किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के द्वारा अफगानिस्तान में युद्धरत दलों को शांति वार्ता की टेबल पर नहीं लाया गया तो अफगानिस्तान में बाद के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।
पूरी दुनिया के लिए पैदा होगा संकट
मित्रों यह चर्चा करना आवश्यक होगा कि अमेरिका के भीषण हवाई हमले काबुल पर तालिबानी कब्जे को बहुत दिनों तक नहीं रोक सकते, इस क्षेत्र का भूगोल जानने वाले यह जानते हैं कि बिना ज़मीन पर उतरे यह लगभग असंभव है लेकिन अमेरिका को इस क्षेत्र में शांति व स्थिरता स्थापना की अपेक्षा अपने सैनिकों की जान की फिक्र ज़्यादा है जिसका उन्हें पूरा अधिकार भी है लेकिन कम से कम आज का नाज़ुक समय अफगानिस्तान को अनाथ और भाग्य पर छोड़ने का बिल्कुल भी नहीं था।
पूरा विश्व जानता है तालिबान इस्लाम के नाम पर इस पूरे क्षेत्र पर अपनी बर्बरता और अमानवीयता थोपना चाहता है, महिलाओं व अल्पसंख्यकों के लिए उनके कानून में रहम का वजूद ही नहीं है।
आने वाले दिन निश्चित रूप से इस समस्त क्षेत्र के राष्ट्रों (जिसमे पाकिस्तान,रूस,ईरान व चीन के साथ भारत भी शामिल है) के लिए काफ़ी अहम होंगे, लेकिन इस दौरान आकाश से अमेरिकी बमबारी व धरती पर अफगान वॉर लॉर्ड्स के भीषण संघर्ष में बहुत बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों, बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों को होने वाली क्षति मानवता के विरुद्ध सबसे बड़ा अपराध होगी जिसका सबसे बड़ा ज़िम्मेदार सिर्फ संयुक्त राज्य अमेरिका ही होगा।
सवाल यह भी वाजिब है कि काबुल पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त करने के बाद क्या ये खूंखार आतंकवादी पड़ोसी राष्ट्रों को सुकून चैन से रहने देंगे?
लेखक मेरठ कॉलेज में डिफेंस स्टडीज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
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