मोहनजोदड़ो में हर चौराहे पर प्रकाश स्तंभ थे और कुएं थे। मकान पक्के थे। वे ईंटों से बने थे।
- फोटो : फणिकांत मिश्र
आज की तरह बसी थीं कॉलोनियां
मोहनजोदड़ो में बस्तियों का निर्माण आज की तरह ही इंजीनियरिंग कौशल से हुआ था। मैं अपने समर्थन में इतिहासकार आर.सी. मजूमदार का एक कथन उद्धृत करुंगा।
वे लिखते हैं- 'अब तक सात स्तरों की खुदाई हो चुकी है। उनमें यही प्रमाण मिले हैं। संभव है और पुरानी तहें नीचे दबी हों। जो अवशेष मिले हैं, उनसे नगर निर्माण की अदभुत कुशलता का विवरण मिलता है।
अब इसे इस तरह समझिए कि हम आज अपनी कॉलोनियों की सड़कें बीस से तीस फीट चौड़ी बनाते हैं और मुख्य सड़क तीस से साठ फीट चौड़ी रखते हैं। मकान एक सीध में बने होते हैं और बाहर ड्रेनेज प्रणाली काम करती है। कॉलोनियों में थोड़ी थोड़ी दूर पर चौराहे होते हैं। मोहनजोदड़ो में भी ठीक ऐसा ही था।
मैंने अपने बचपन में देखा था कि सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के लिए चौराहों पर पंचायत या नगरपालिका प्रकाश के लिए लैंप पोस्ट खड़े करती थी। एक व्यक्ति की नौकरी यही होती थी कि वह रोज शाम उन लैम्पों में उतना तेल भर दे कि वे रात भर उजाला देते रहें। अब तो घर घर में नल लगे हैं, लेकिन कुछ दशक पहले कॉलोनियों अथवा मोहल्लों के चौराहों पर हैंड पम्प या कुएं होते थे। वहां से उस क्षेत्र के लोग पानी भरते थे।
मोहनजोदड़ो में ठीक ऐसा ही मिला था। हर चौराहे पर प्रकाश स्तंभ थे और कुएं थे। मकान पक्के थे। वे ईंटों से बने थे। मकानों और कॉलोनियों के नक्शे से पता चलता है कि उस सभ्यता में भी एक ही नक्शे पर घर बनते थे और उन्हें भी आज की तरह किसी नगरपालिका या प्रशासन तंत्र की अनुमति लेनी होती होगी।
मोहनजोदड़ो काल में चौराहे पर बना कुंआ
- फोटो : फणिकांत मिश्र
अमीरों और गरीबों के घर
मोहनजोदड़ो में आर्थिक आधार पर स्पष्ट विभाजन था। वे या तो अमीर थे या गरीब। उनके बीच कोई मध्यम वर्ग नहीं था, जिस तरह घरों का नक्शा या डिजाइन मिला है, वह इसका साक्ष्य है। गरीबों के मकान सिर्फ दो कमरे के होते थे।
अमीरों के घरों में कई कमरे होते थे। आंगन होता था। वे दो मंजिल के हो सकते थे। ऊपर की मंजिल से नीचे पानी निकास के लिए नाली बनाई गई थी, जैसे आज हम किसी फ्लैट से पाइप के जरिए बाथरूम या किचन का पानी निकालते हैं। यानी ऊपर भी लोग स्नानागार और भोजनालय बनाते थे। जमीनी तल की छतें एकदम सपाट फर्श वाली और उनके नीचे लकड़ियों का आधार होने के प्रमाण हैं।
यदि आपका बचपन गांव में बीता है तो अवश्य ही आपने इस तरह के मकान देखे होंगे। बड़े अमीरों की कोठियां होती थीं, जिनमें स्वीमिंग पूल भी होते थे। मोहनजोदड़ो में एक स्वीमिंग पूल का आकार 180 फीट लंबा, 108 फीट चौड़ा है। लेकिन इसमें पूल के चारों ओर छतवाला गलियारा तथा उससे सटे कमरे भी शामिल हैं। स्वीमिंग कुंड 39 फीट लंबा, 23 फीट चौड़ा और 8-10 फीट गहरा है। अब इस बात से पता चलता है कि उस जमाने में महिलाएं भी स्वीमिंग पूल का आनंद लेती रही होंगीं और वह भी घर के भीतर।
दूसरा यह कि संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलन में थी। बड़े परिवार के सदस्य उसी कुंड में नहाते रहे होंगे। शायद अमीर नदी में जाकर स्नान करना शान के खिलाफ समझते हों। अर्थ यह भी लगा सकते हैं कि गरीबों के लिए घर से बाहर कुएं अथवा नदी पर जाकर नहाने की मजबूरी थी।
(जारी)
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