election commission of india
एक के बाद एक समितियों का गठन फिर भी
तारकुंडे समिति (1974-75) के बाद दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने भी निर्वाचन आयोग को निष्पक्ष और दबाव मुक्त बनाने के लिए आयोग की नियुक्तियों में सरकार का एकाधिकार समाप्त करने की सिफारिश की थी। तारकुंडे समिति की सिफारिश पर मतदान की उम्र 21 से घटा कर 18 तो हो गई मगर निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार केन्द्र सरकार ने नहीं छोड़ा।
तारकुंडे समिति ने तीन सदस्यीयएक कमेटी की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति की सिफारिश की थी। इस कमेटी में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष का नेता या विरोध पक्ष का प्रतिनिधि होना था। तारकुण्डे समिति ने निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए केंद्र और राज्यों में स्वायत्त निर्वाचन परिषदें बनाने का भी सुझाव दिया था। इससे साथ ही अनुचित कामों पर निगरानी के लिये ‘‘मतदाता परिषद’’ के गठन का भी सुझाव दिया था।
महत्वपूर्ण थे गोस्वामी समिति के सुझाव
मई 1990 में दिनेश गोस्वामी समिति ने भी निर्वाचन आयोग तीन सदस्यीय निकाय बनाने का सुझाव दिया था। समिति की सिफारिश थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति भारत के प्रधान न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता द्वारा की जानी चाहिए और अन्य सदस्यों की नियुक्ति मुख्य निर्वाचन आयुक्त से विचार-विमर्श करके की जानी चाहिए।
समिति ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक करने की सिफारिश भी की थी। उसके बाद सरकारों ने अन्य सिफारिशें तो मान लीं मगर निर्वाचन आयोग पर सरकारी नियंत्रण हटाने की सिफारिश अब तक की सभी सरकारें टाल गईं।
वर्तमान में मुख्य निर्चाचन आयुक्त को सरकार अपनी सुविधानुसार नियुक्त करती है और उसे केवल संसद द्वारा ही हटाया जा सकता है और संसद में सत्ताधारी दल का ही बहुमत होता है।
अब तक निर्वाचन आयोग से लेकर सीएजी और लोकसेवा आयोगों में लगभग सभी संवैधानिक पदों पर केन्द्र सरकार अपने पसंद के लोगों को नियुक्त करती रही है। सवाल उठता है कि जब सीबीआई निदेशक, सूचना आयुक्त और लोकपाल/लोकायुक्त जैसे संवैधानिक पदों पर सरकार, न्यायपालिका, विधायिका और प्रतिपक्ष के नेता वाली कमेटी की सिफारिश पर नियुक्तियां हो सकती हैं तो निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियां भी इसी तरह सर्व सर्वम्मति से क्यों नहीं हो सकतीं?
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।