Pushpendra Pal Singh Death
- फोटो : Facebook/प्रतिभा_प्रसाद
उनका दायरा सिर्फ छात्रों तक सीमित हो ऐसी बात नहीं है। नेता, अभिनेता,ब्यूरोक्रेट,शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, एनजीओ, एक्टिविस्ट कला क्षेत्र के लोग और ना जाने किन-किन विधाओं के लोग उनके पास ऐसे चले आते थे, जैसे फूल के ऊपर तितलियां।
वे इस समय एक किस्म के प्रशासनिक सह राजनीतिक काम में व्यस्त थे। अगर ईमानदारी से कहा जाए तो वह सच में 18 घंटे काम करते थे और हमेशा मुस्कुराते हुए। सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी इस तरह की मांग हो गई थी कि वह जहां जाना नहीं भी चाहते थे, वहां भी आयोजक का लिहाज कर के चले जाते थे। भले ही इसके एवज में उन्हें रात में कुछ और घंटे काम करना पड़े।
काम करना ही उनका आराम था
अगर डॉक्टरों की भाषा में कहें तो वह 'वर्कोहोलिक' हो गए थे। काम करना ही उनका आराम था। काम करना ही उनका शौक था, काम करना ही उनकी मेहनत। वे हर तरह की सत्ता के साथ सामंजस्य बैठाने लगे थे, लेकिन उनकी आत्मा आज भी सेकुलर थी और स्वभाव समाजवादी। मुझे तो कभी इस बात की कल्पना ही नहीं थी कि वह समय भी आएगा जब पीपी सर हमारे बीच नहीं होंगे।
उनका जाना किसी मशाल का बुझ जाना नहीं है, बल्कि उनका जाना किसी पावर हाउस का चला जाना है। वे दीपक नहीं थे, भटके हुए जहाजों को रास्ता दिखाने वाले लाइटहाउस थे।
हम कहीं कुछ लिख-पढ़ पाते हैं तो उसके पीछे सर का कितना बड़ा योगदान है, उसे व्यक्त करने के लिए शब्द और जुबान नाकाफी है। मुझे उनके निधन से ज्यादा इस बात की पीड़ा होती है कि उनके माता-पिता ने जब अपने पुत्र का शव देखा होगा तो उनके ऊपर क्या गुजरी होगी? शायद इसकी तुलना श्रवण कुमार के मृत्यु के बाद उनके माता-पिता की दशा से की जा सकती है।
यह लिखते समय मेरी आंखें डबडबा रही हैं और स्क्रीन पर लिखे शब्द धुंधले दिखाई देते हैं। और फिलहाल तो मुझे बहुत कुछ धुंधला दिखाई दे रहा है। वह शून्य जो पीपी सर के जाने से पैदा होगा, वह कभी नहीं भरा जाएगा। लेकिन इतना तो कहना ही पड़ेगा वे जब तक जिए, शान से जिए, दूसरों के लिए जिए और इस तरह जिए जैसे इंसान को जीना चाहिए।
उनका जीवन जीने और मरने दोनों की कलाओं में पारंगत सिद्ध हुआ। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके शिष्यों ने उनसे जो सीखा है, उसे हम सब अपने जीवन में अपनाएं और अपरिचितों की मदद करने की वह आदत पैदा करें जो पीपी सर को सहज सिद्ध थी।
जिंदगी की लौ ऊंची कर चलो।
सर अंतिम प्रणाम।
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