राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयास जरूरी
राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए उनके प्रतिनिधित्व की व्यवस्था एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है। क्योंकि पार्टियां महिलाओं को अपेक्षित संख्या में टिकट ही नहीं दे रही हैं। पार्टियां ऐसी महिलाओं की जानबूझकर अनदेखा करती हैं जो जमीनी स्तर पर समाज में अपने काम के बूते अपनी पहचान और प्रभाव रखती हैं। बावजूद इसके कि पंचायत स्तर पर महिलाएं राजनीतिक हिस्सेदारी से सकारात्मक परिणाम बड़े स्तर पर दर्ज कर रही हैं।
अध्ययन यह बताते है कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक क्रियाकलापों में व्यापक सुधार आए हैं। इसलिए ऊपर के स्तरों पर भी महिलाओं को उचित अनुपात में भागीदारी के अवसर प्रदान करना एक कल्याणकारी राज्य की प्राथमिकता हो। इस दिशा में महिलाओं के लिए सत्ता में भागीदारी की व्यवस्था सराहनीय और सामयिक महत्व की पहल होगी। सरकार को महिलाओं के लिए अपनी क्षमताओं का खुलकर सृजनात्मक उपयोग कर सकारात्मक वातावरण बनाने में सार्थक हस्तक्षेप कर आगे बढ़ना चाहिए, साथ ही महिलाएं परिपक्व राजनीतिक समझ के साथ राजनीति के परम्परागत सत्ता समीकरणों को बदलकर समाज में नई राजनीतिक संस्कृति का विस्तार करें।
21वीं सदी के शुरुआती दशक से ही ऐसे रुझान भारतीय चुनाव परिणामों से आते दिख रहे हैं कि भारतीय महिलाएं राजनीतिक चेतना से लैस हो रही हैं। सत्ता सदनों में उनकी सहभगिता धीमी ही सही पर बढ़ रही है। महिलाओं में बढ़ती राजनीतिक समझ का सर्वाधिक उज्जवल पक्ष यह है कि आजाद भारत में चुनाव-दर-चुनाव उनकी मतदान में सहभागिता भी बढ़ रही है। उनके राजनैतिक और चुनावी व्यवहार में नए परिवर्तन दर्ज हुए हैं।
नई राजनैतिक संस्कृति की ओर अग्रसर
महिला प्रतिनिधियों में अपने मुददों और चुनौतियों से निपटने की ललक पैदा हुई है। महिला मांगों को सही ढंग से उठाने की दूर-दृष्टि पैदा हुई है। पिछले आम चुनावों के मध्य महिलाओं ने अपने एक राजनीतिक दल की नींव रखी जो एक बड़ा संकेत है। “राष्ट्रीय महिला पार्टी” की संस्थापक श्वेता शेटटी पेशे से डॉक्टर हैं। उनका मानना है कि राजनीति में महिलाओं की घटती रुचि के पर्याप्त कारण हैं, जिसमें पुरुषवादी मानसिकता मुख्य है। पिछले आम चुनाव में मतदाता सूची से दो करोड़ से अधिक महिलाओं के नाम नदारत थे। यदि राजनीति पर महिलाओं की पकड़ मजबूत होती तो हम एक अलग ढंग की राजनीतिक संस्कृति में जिम्मेदार राजनैतिक व्यवहार के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत कर रहे होते।
यह सब नई राजनैतिक संस्कृति में ही संभव हो सकेगा। इस दिशा में महिलाओं की राजनैतिक सहभागिता एक बड़ी आश है। इसके लिए जरूरी है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि से महिलाएं राजनीति में आएं, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में नई संवेदनाएं विकसित हों। लोकतंत्र के प्रति नारीवादी मूल्यों में मजबूत विश्वास पैदा हो। तब नई सदी की नई राजनीति की नायक महिलाएं होगी।
राजनीति को अब आक्रामकता और अपनी हिंसक शैली की परम्परागत राह को छोड़ना ही होगा। उसे अब स्त्रैण स्रोतों की निर्बाध सौर उर्जा को अपनाकर लोकतांत्रिक दुनिया को दिखना होगा कि कैसे एक खूबसूरत संसार सत्ता से रचा जा सकता है? जहां समानता, शांति, समृद्धि, संवेदनाएं और संतुलित विकास नई राजनीतिक संस्कृति से उपजेगी। यह नई संस्कृति हाशिए पर पड़े लोगों को सत्ता में स्पेस दे सकेगी और समाज के प्रति सही मायनों में संवेदित व्यवहार कर सकेगी। परिणामतः एक नई राजनैतिक संस्कृति विकसित होगी जो आज की महती आवश्यकता है।
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