ओडिशा में रेल हादसे की तस्वीरें
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कई देशों में चल रहीं बुलेट ट्रेनें
रेलवे सेफ्टी आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में रेल दुर्घटनाओं की संख्या घट रही है। लेकिन तमाम सावधानियों के बावजूद दुर्घटनाओं की संभावनाएं समाप्त नहीं हुई हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा बुलेट ट्रेन से जरूरी माना जाना स्वाभाविक ही है। यह सही है कि जिस जापान से हम बुलेट ट्रेन की टैक्नॉलाजी और ऋण ले रहे हैं, उससे कहीं तेज रफ्तार की शंघाई-मागलेव ट्रेन (430 कि.मी. प्रति घंटा) चीन में चल रही है।
चीन ने अपनी विशाल जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेज गति की रेलवे व्यवस्था पर काफी निवेश कर रखा है। चीन और जापान के अलावा वर्तमान में फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, इटली, दक्षिण कोरिया, ताइवान, ग्रेट ब्रिटेन और तुर्की में तीव्र गति की रेलें चल रही हैं। लेकिन सोचनीय विषय यह है कि विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व का सर्वाधिक विकसित देश अमेरिका बुलेट ट्रेन की तरह अति तीव्र गति के रेल परिवहन के मामले में पिछड़ा क्यों है?
अमेरिका क्यों हिचक गया बुलेट ट्रेन चलाने में
हालांकि, अमेरिका में कुछ क्षेत्रीय हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं चल रही हैं। एक उल्लेखनीय उदाहरण एमट्रैक एसेला एक्सप्रेस सेवा है, जो बोस्टन और वाशिंगटन, डीसी के बीच पूर्वोत्तर कॉरिडोर पर संचालित होती है। एसेला एक्सप्रेस वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे तेज ट्रेन है, जो कुछ निश्चित क्षेत्रों में 240 किमी घंटा तक की गति तक पहुंचती है। हालांकि, यह अन्य देशों में बुलेट ट्रेनों द्वारा प्राप्त गति से कम है।
जाहिर है कि जब तक रेल सुरक्षा के मामले में फूल प्रुफ व्यवस्था नहीं हो जाती और तेज गति रेलों के प्रोजेक्ट देश की आर्थिकी के अनुकूल नहीं हो जाते तब तक अमेरिका हमारी तरह उतावली दिखाने के पक्ष में नहीं है। पूर्व में भारत में भी आगरा से दिल्ली और कानपुर के बीच एक हाई-स्पीड रेल लाइन प्रस्तावित की गई थी। लेकिन उस प्रोजेक्ट के अति खर्चीले होने और उसका किराया आम आदमी की हैसियत से बाहर होने के कारण वह विचार ही स्थगित कर दिया गया था। मुबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का अनुमानित किराया भी हवाई जहाज के किराए के बाराबर ही है।
रेलों की तेज गति से ज्यादा सुरक्षा जरूरी
भारत एक विशाल एवं विविधताओं से भरपूर देश होने के कारण इसे आधुनिक बुनियादी ढांचे वाली परिवहन प्रणाली की आवश्यकता है। बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें प्रमुख शहरों को जोड़ने और यात्रा के समय को कम करने, आर्थिक विकास, पर्यटन और व्यापार के अवसरों को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।
हाई-स्पीड ट्रेनों में अतिरिक्त सुरक्षा और जोखिम को कम करने के लिए अलग डिजाइन की जाती हैं। उसके रखरखाव, सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक रखरखाव और स्टाफ प्रशिक्षण सहित रेलवे संचालन के सभी पहलुओं में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
हाई-स्पीड ट्रेनों में जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों की तुलना में प्रदूषण नगण्य होता है। हालांकि, हाई-स्पीड रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और संचालन के पर्यावरणीय प्रभाव पर विचार करना और टिकाऊ व्यवस्था का पालन करना सुनिश्चित करना आवश्यक है।
भारत की परिवहन जरूरतें बहुआयामी हैं, और इसके लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो कनेक्टिविटी, सुरक्षा, सामर्थ्य, पहुंच और पर्यावरणीय प्रभाव पर विचार करे। बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों का कार्यान्वयन मौजूदा ट्रेन सेवाओं का पूरक हो सकता है, लेकिन फिलहाल देश को तेज रेलों के बजाय सुरक्षित और कम किराए वाली रेलों की जरूरत है।
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