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ओडिशा ट्रेन दुर्घटना: रेलों की गति से अधिक सुरक्षा जरूरी

सार

ओडिशा के बालासोर में हुए इस सदी के अब तक के भीषण रेल हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन सरसरी तौर पर इस हादसे में मानवीय चूक साफ नजर आ रही है।
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ओडिशा में भयंकर रेल दुर्घटना - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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मुम्बई और अहमदाबाद के बीच 320 कि.मी. प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेन की तैयारियों के बीच ही उड़ीसा के बालासौर में हुई भयंकर रेल दुर्घटना के कारण सवाल उठना वाजिब ही है कि भारत को गोली की माफिक तेज रफ्तार वाली रेल चाहिए या फिर सुरक्षित रेल? देखा जाए तो भारत इतना विशाल और विविधता भरा देश है जिसे दूरियां कम करने के लिए तेज रफ्तार रेल भी चाहिए और सुरक्षित रेल भी। 

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दरअसल, असली सवाल दोनों में से एक का विकल्प चुनने का नहीं बल्कि प्राथमिकता का है और प्राथमिकता में यात्रियों की सुरक्षा दूसरे स्थान पर नहीं आ सकती है। गौरतलब, है कि विज्ञान और प्रोद्यागिकी के क्षेत्र में सर्वाधिक विकसित देश अमेरिका ने भी रेलों की गति से अधिक यात्रियों की सुरक्षा और वित्तीय पहलू को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। भारतीय रेलवे अहमदाबाद, गुजरात से मुंबई, महाराष्ट्र तक 508 किलोमीटर के रूट पर देश की पहली बुलेट ट्रेन का निर्माण कर रहा है। हाई-स्पीड ट्रेन तीन घंटे में दूरी तय करते हुए 350 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड से दौड़ेगी। 

सबक है बालासौर रेल दुर्घटना

ओडिशा के बालासोर में हुए इस सदी के अब तक के भीषण रेल हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन सरसरी तौर पर इस हादसे में मानवीय चूक साफ नजर आ रही है। रेल या हवाई परिवहन के परिचालन में एक छोटी सी भी मानवीय त्रुटि इसी तरह का भयंकर परिणाम सामने ला सकती है।
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इस हादसे में मालगाड़ी के साथ हावड़ा एक्सप्रेस और कोरोमण्डल एक्सप्रेस के बीच टक्कर हो गई। इन एक्सप्रेस ट्रेनों की अधिकतम गति सीमा 130 कि.मी. प्रति घण्टा है। हालांकि, निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन परियोजना में सुरक्षा के अतिरिक्त और आधुनिकतम इंतजाम होते हैं, फिर भी जब कम गति की रेलों का परिचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है तो 320 कि.मी. प्रति घंटा की गति से चलने वाली बुलेट ट्रेन के परिचालन में कोई लापरवाही नहीं होगी, इसकी गारंटी कौन दे सकता है।  

देश में औसतन 85 रेल दुर्घटनाएं प्रति वर्ष

दुनिया में पहले भी कई भयंकर रेल दुर्घटनाएं होती रही हैं। तकनीकी रूप से विकसित यूरोप रेल दुर्घटनाओं में अगणी माना जाता है। रूस और चीन में भी विगत में भयंकर हादसे हो चुके हैं। हमारे देश में ही 20 नवम्बर 2016 को इंदौर-पटना एक्सप्रेस रेल दुर्घटना हो चुकी है जिसमें 600 से अधिक यात्रियों के मारे जाने का अनुमान था।

इनमें से ज्यादातर दुर्घटनाएं मानवीय चूक के कारण हुई हैं। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की 2019-20 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार सन् 2015-16 से लेकर 2019-20 तक भारत में कुल 427 छोटी बड़ी रेल दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें 353 लोगों की जानें जा चुकी हैं।

आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान प्रतिवर्ष औसतन 85 दुघटनाओं में लगभग 71 यात्री मारे गए हैं। भारत में भयंकर रेल दुर्घटनाओं का इतिहास भरा पड़ा है। इन दुर्घटनाओं के लिए मुख्य रूप से रेलों का पटरी से उतरना (डिरेलमेंट) ही मुख्य कारण रहा है और डिरेलमेंट के मुख्य कारणों में पटरियों में डिफेक्ट, रोलिंग स्टॉक में डिफेक्ट, ड्राइविंग में लापरवाही और सिगनल फेल्यौर जैसे कारण गिनाए गए हैं।

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ओडिशा में रेल हादसे की तस्वीरें - फोटो : पीटीआई
कई देशों में चल रहीं बुलेट ट्रेनें

रेलवे सेफ्टी आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में रेल दुर्घटनाओं की संख्या घट रही है। लेकिन तमाम सावधानियों के बावजूद दुर्घटनाओं की संभावनाएं समाप्त नहीं हुई हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा बुलेट ट्रेन से जरूरी माना जाना स्वाभाविक ही है। यह सही है कि जिस जापान से हम बुलेट ट्रेन की टैक्नॉलाजी और ऋण ले रहे हैं, उससे कहीं तेज रफ्तार की शंघाई-मागलेव ट्रेन (430 कि.मी. प्रति घंटा) चीन में चल रही है।

चीन ने अपनी विशाल जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेज गति की रेलवे व्यवस्था पर काफी निवेश कर रखा है। चीन और जापान के अलावा वर्तमान में फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, इटली, दक्षिण कोरिया, ताइवान, ग्रेट ब्रिटेन और तुर्की में तीव्र गति की रेलें चल रही हैं। लेकिन सोचनीय विषय यह है कि विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व का सर्वाधिक विकसित देश अमेरिका बुलेट ट्रेन की तरह अति तीव्र गति के रेल परिवहन के मामले में पिछड़ा क्यों है? 

अमेरिका क्यों हिचक गया बुलेट ट्रेन चलाने में

हालांकि, अमेरिका में कुछ क्षेत्रीय हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं चल रही हैं। एक उल्लेखनीय उदाहरण एमट्रैक एसेला एक्सप्रेस सेवा है, जो बोस्टन और वाशिंगटन, डीसी के बीच पूर्वोत्तर कॉरिडोर पर संचालित होती है। एसेला एक्सप्रेस वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे तेज ट्रेन है, जो कुछ निश्चित क्षेत्रों में 240 किमी घंटा तक की गति तक पहुंचती है। हालांकि, यह अन्य देशों में बुलेट ट्रेनों द्वारा प्राप्त गति से कम है।

जाहिर है कि जब तक रेल सुरक्षा के मामले में फूल प्रुफ व्यवस्था नहीं हो जाती और तेज गति रेलों के प्रोजेक्ट देश की आर्थिकी के अनुकूल नहीं हो जाते तब तक अमेरिका हमारी तरह उतावली दिखाने के पक्ष में नहीं है। पूर्व में भारत में भी आगरा से दिल्ली और कानपुर के बीच एक हाई-स्पीड रेल लाइन प्रस्तावित की गई थी। लेकिन उस प्रोजेक्ट के अति खर्चीले होने और उसका किराया आम आदमी की हैसियत से बाहर होने के कारण वह विचार ही स्थगित कर दिया गया था। मुबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का अनुमानित किराया भी हवाई जहाज के किराए के बाराबर ही है। 

रेलों की तेज गति से ज्यादा सुरक्षा जरूरी

भारत एक विशाल एवं विविधताओं से भरपूर देश होने के कारण इसे आधुनिक बुनियादी ढांचे वाली परिवहन प्रणाली की आवश्यकता है। बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें प्रमुख शहरों को जोड़ने और यात्रा के समय को कम करने, आर्थिक विकास, पर्यटन और व्यापार के अवसरों को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।

हाई-स्पीड ट्रेनों में अतिरिक्त सुरक्षा और जोखिम को कम करने के लिए अलग डिजाइन की जाती हैं। उसके रखरखाव, सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक रखरखाव और स्टाफ प्रशिक्षण सहित रेलवे संचालन के सभी पहलुओं में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।

हाई-स्पीड ट्रेनों में जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों की तुलना में प्रदूषण नगण्य होता है। हालांकि, हाई-स्पीड रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और संचालन के पर्यावरणीय प्रभाव पर विचार करना और टिकाऊ व्यवस्था का पालन करना सुनिश्चित करना आवश्यक है।

भारत की परिवहन जरूरतें बहुआयामी हैं, और इसके लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो कनेक्टिविटी, सुरक्षा, सामर्थ्य, पहुंच और पर्यावरणीय प्रभाव पर विचार करे। बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों का कार्यान्वयन मौजूदा ट्रेन सेवाओं का पूरक हो सकता है, लेकिन फिलहाल देश को तेज रेलों के बजाय सुरक्षित और कम किराए वाली रेलों की जरूरत है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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