हमारे ऋषि-मुनियों को वर्षों पहले पता था कि सूर्य ऊर्जा का अंतिम और उत्तम स्रोत है
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इस पर्व की गतिविधियां जैसे कि सूर्य पूजा, पतंग उड़ाना, अलाव के चारों ओर नाचना, गाना, नाचना, नदी में डुबकी लगाना और दूसरों को दान देना, इन सबका आध्यात्मिक महत्व है। यही नहीं इस पर्व पर मूंगफली, गुड़, तिल आदि से तैयार भोजन भी हमें संतुष्टि देता है। नदी में डुबकी लगाने से हमारी नकारात्मक ऊर्जाओं का शोधन होता है और हम खुद को अंदर से साफ महसूस करते हैं।
इस दिन पतंग उड़ाने का तात्पर्य आकांक्षी होने से है। लेकिन, ब्रह्मांड का पता लगाने और आकाश की तरह उड़ने का उत्साह होने के साथ ही हमें अपने अपनो और संस्कारों से जुड़े रहना का सकंल्प भी पतंग की डोरी देती है। ये हमें अनुशासित रहने और आत्म संयम का अभ्यास करते रहने को भी कहती है।
हमारे ऋषि-मुनियों को वर्षों पहले पता था कि सूर्य ऊर्जा का अंतिम और उत्तम स्रोत है और उन्होंने उस दिन की गणना की जब सूर्य की किरणें भारत की उपचार और स्फूर्तिदायक शक्तियों को अवशोषित करने के लिए सबसे अच्छी थीं।
मकर संक्रांति पर हमें इस तरफ भी ध्यान देना है कि हमारे सनातन और वैदिक ज्ञान का का लोप होने से ही समाज में, स्वास्थ्य, धन, संबंध, शांति आदि सभी क्षेत्रों में तनाव और अवसाद बढ़ा है। जब हम एक साथ आते हैं और अपने त्योहार मनाते हैं, तो हम वास्तव में अपनेपन की भावना रखते हैं और हमारी खुशी का सूचकांक ऊपर उठता है।
मकर संक्रांति का अर्थ यही है। इस दिन सभी देवता विष्णु की पूजा कर अपने उपक्रम पर निकलते हैं। आइए हम भी अपने अंतर्मन को सशक्त करें। पालनकर्ता की आराधना करें और हर हाल में खुश रहने का संकल्प लें और दूसरों की खुशियों के लिए उत्प्रेरक बनें।
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