डिजिटल विकास में भारत अग्रसर
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देश के डिजिटली विकास
अस्सी के दशक के मध्य में बड़े पैमाने पर कम्प्यूटरीकरण का आगमन, स्वतंत्रता के बाद के भारत के लिए महत्वपूर्ण सकारात्मक विकासों में से एक है, जिसने अंततः भारत को एक विशाल आईटी शक्ति के रूप में माना। देश का भविष्य 'डिजिटल' है। डिजिटल लेनदेन का उदय और छोटे व्यापारियों में क्यूआर कोड की बढ़ती लोकप्रियता सुर्खियों में है, मंदिरों में क्यूआर कोड से डिजिटल दान हो रहा।
वर्ष 1991 में अर्थव्यवस्था का वैश्वीकरण करके औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली को समाप्त कर दिया गया और अर्थव्यवस्था को निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी के साथ-साथ विदेशी निवेश के लिए खोल दिया। 1991 के सुधारों के कारण वैश्विक जीडीपी में भारत की रैंकिंग तेजी से बढ़ी।
किसी भी अर्थव्यवस्था का उत्थान और पतन काफी हद तक उसके वित्तीय क्षेत्र के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। आज़ादी के 75 सालों में बैंकिंग की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और यह कई पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ रही। 1969 में राष्ट्रीयकरण ने बैंकिंग को 'क्लास बैंकिंग' से 'मास बैंकिंग' (सोशल बैंकिंग) में स्थानांतरित कर दिया।
बैंकों का बढ़ता नेटवर्क
1947 में जहां 664 निजी बैंकों की लगभग 5000 शाखाएं थीं वही आज 12 सरकारी बैंकों, 22 निजी क्षेत्र के बैंकों, 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और 46 विदेशी बैंकों की लगभग 1 लाख 40 हजार शाखाएं देश में कार्यरत हैं। इस वर्ष बजट में भारत ने एक डिजिटल मुद्रा की योजना की घोषणा की है। एचडीएफसी बैंक के मूल हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) के साथ विलय के बाद यह दुनिया के शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान बैंकों में से एक हो जाएगा और यह विश्व के शीर्ष 10 क्लब में जगह बनाने वाला पहला भारतीय बैंक भी होगा।
फार्मास्यूटिकल्स में भारत अब एक प्रमुख उत्पादक है और नई दवाओं के विकास के लिए नित नए अनुसंधान कर रहा है। इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल मशीनरी में देश नए वैश्विक बेंचमार्क छू रहा। 60 के दशक में, सेवा क्षेत्र में कामकाजी आबादी का केवल 4% कार्यरत था जो अभी 30% से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा। इस समय सेवा क्षेत्र का जीडीपी में 50% से अधिक का योगदान है, और भविष्य में आंकड़े बढ़ने की उम्मीद है। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स देश की अर्थव्यवस्था को लगातार मजबूत बना रहे।
वर्तमान सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में देश में उद्यमिता की संस्कृति को बढावा देने की कोशिश की है। देश अब बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर से ‘मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर’ की और बढ़ चुका है। भारत, जो अब विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली देश बन गया है, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 के लिए अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 8.2% की वृद्धि के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है।
कुछ चुनौतियां अब भी शेष
इसमें कोई संदेह नहीं कि देश ने इन 75 वर्षों में एक लंबा रास्ता तय किया है और जो एक मील का पत्थर है पर हम अभी भी एक 'विकासशील देश है, देश को अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है, और ये भी सही है कि आने वाले समय में देश के सामने कई चुनौतियां भी होंगी। रेलवे वर्तमान में सबसे बड़ा नियोक्ता है फिर भी ट्रेन में आरक्षित सीट पाने के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची है। देश के सामने रोजगार सृजन का मुद्दा भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बना रहेगा।
भारत ने स्वतंत्रता के बाद एक अरब अधिक उपभोक्ता जुड़े पर क्रय शक्ति कुछ लोगों तक सीमित है। आर्थिक असमानता भी देश के सामने बड़ा मुद्दा है, आज हम कृषि के मामले में आत्मनिर्भर हैं, लेकिन किसान इस पेशे से बाहर जा रहे हैं, राष्ट्रीय कर्ज बढ़कर 620 बिलियन हो गया है।
विदेशी सत्ता की बेड़िया टूटी, देश में बहुत कुछ बदला पर विदेशी ताकतें हमारे संस्कार को नहीं बदल सके आज भी हम “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना से आगे बढ़ रहे। अगले 25 वर्षों में एक विकसित भारत बनाने के लिए देश के सभी लोगों को एक साथ आना होगा। आज अमृत काल में भारत को 'राम राज्य' बनने के लिए गाँधी व बुद्ध के मूल्यों, विवेकानंद के विज़न और जेआरडी टाटा के लक्ष्य की पहले से अधिक जरूरत है।
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