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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: रोमांटिक निर्देशक- वॉन्ग कार वाई

सार

निर्देशक बनने के पहले वॉन्ग काई-वाई एक स्क्रीनप्ले राइटर बने और जैसा कि रिवाज है स्क्रीनप्ले राइटिंग मिलजुल कर किया जाता है, वॉन्ग ने भी पहला रोमांटिक ड्रामा ‘वन्स अपॉन ए रेनबो’ दूसरों के साथ मिल कर लिखा। ‘एज टीयर्स गो बॉय’ उनकी निर्देशित पहली फिल्म थी।
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विश्व सिनेमा - फोटो : istock
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विस्तार
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आजकल वैलेन्टाइन (प्रेम-रोमांस) का समय चल रहा है और ऐसे में वॉन्ग कार-वाई की ‘इन द मूड फॉर लव’ देखना एक बहुत सुकूनदायक अनुभव है। हॉन्गकॉन्ग के फिल्म निर्देशक एवं स्क्रीनप्ले राइटर फिल्म ‘इन द मूड फॉर लव’ (2000 की इस फिल्म का मूल शीर्षक Fa yeung nin wah है) में रंगों की बहार लेकर आते हैं। ये रंग आपको वास्तविक रूप से स्पर्श करते हैं, गहरे लाल, पीले, भूरे और उनकी गहन छटा मनमोहक है।

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क्यों न हो जब नायक-नायिका प्रेम के मूड में हैं। मगर यहीं असली ट्विस्ट है, पूरी कहानी में वे दैहिक प्रेम नहीं करते हैं, ऐसा नहीं है कि कर नहीं सकते हैं, मगर उन्होंने तय किया है, वे ऐसा करेंगे नहीं। तय किया है, क्योंकि वे नहीं चाहते हैं वे ऐसा करें, जैसा उनके साथी कर रहे हैं। अगर वे ऐसा करते हैं, तो फिर नायक की पत्नी और नायिका के पति और उन दोनों में अंतर क्या रह जाएगा? दोनों के साथियों का विवाहेतर संबंध चल रहा है।

अत: नायक मिस्टर चाऊ (टोनी लेउन्ग) और नायिका सु ली-झेन (मैगी चेउन्ग) बार-बार मिलते हैं, कभी सीढ़ियों पर, कभी सड़क पर, कभी होटल से खाना ले जाते हुए, मगर सोने के लिए वे अपने-अपने घर चले जाते हैं। समय 1962 का है और स्थान हॉन्गकॉन्ग का भीड़ भरा इलाका। दोनों पड़ोसी हैं, अत: टकराना होगा ही। इस अनोखी प्रेम कहानी को एक बार देखना बनता है, आप दोबारा इसे देखना चाहेंगे।
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एक बाफ्टा एवार्ड के साथ 44 पुरस्कार जीतने वाले वॉन्ग कार-वाई ने 1997 में ड्रामा-रोमांस फिल्म ‘हैप्पी टूगेदर’ बनाई। ये एक समलैंगिक जोड़े के बारे में है। इसे वॉन्ग ने मैनुएल पुइग के साथ मिलकर लिखा है। करीब डेढ़ घंटे की इस फिल्म में यह जोड़ा अपनी पुरानी जिंदगी से छुटकारा पाने केलिए एर्जेंटीना की यात्रा करता है।

फिल्म दिखाती है कि लाई (टोनी लेउन्ग) तथा हो (लेस्ली चेउन्ग) दोनों साथ रहते हुए सदा झगड़ते हैं, उनका एक साथ रहना कठिन है, मगर एक-दूसरे के बिना रह भी नहीं सकते हैं। फिल्म हॉन्गकॉन्ग, जापान तथा साउथ कोरिया का को-प्रोडक्शन है।


निर्देशक और स्क्रीनप्ले राइटर

17 जुलाई 1958 को चीन के शंघाई में जन्मे वॉन्ग काई-वाई आगे चलकर फिल्म निर्देशक एवं स्क्रीनप्ले राइटर बने। जब वे मात्र पांच साल के थे उनकी मां उन्हें शंघाई से लेकर हॉन्गकॉन्ग चली आईं, जबकि होटल डॉयरेक्टर उनके पिता, उनका भाई और उनकी बहन वहीं शंघाई में रह गए। पहले वॉन्ग काई-वाई ने ग्राफिक डिजाइनिंग का प्रशिक्षण लिया और इसके बाद टीवी नाटक की शिक्षा ली। यहीं से उनके फिल्म में प्रवेश का रास्ता खुला।

निर्देशक बनने के पहले वे एक स्क्रीनप्ले राइटर बने और जैसा कि रिवाज है स्क्रीनप्ले राइटिंग मिलजुल कर किया जाता है, वॉन्ग ने भी पहला रोमांटिक ड्रामा ‘वन्स अपॉन ए रेनबो’ दूसरों के साथ मिल कर लिखा। ‘एज टीयर्स गो बॉय’ उनकी निर्देशित पहली फिल्म थी। तीन साल बाद 1990 में उन्होंने ‘डेज ऑफ बीइंग वाइल्ड’ बनाई। 

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वॉन्ग कार-वाई की फिल्में - फोटो : Istock
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाक्षुष रूप से अनोखे, शैलीगत विशेषता तथा भावात्मक फिल्म निर्देशक के रूप में पहचाने जाने वाले वॉन्ग कार-वाई की पहली दोनों फिल्मों को खास सफलता नहीं मिली, लेकिन उनकी तीसरी फिल्म ‘चुंगकिंग एक्सप्रेस’ (1994) ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय सिने-फलक पर स्थापित कर दिया। 8 पुरस्कार जीतने वाली इस फिल्म में हॉन्गकॉन्ग के दो उदास पुलिस वालों को प्यार होता है, एक को एक रहस्यमयी अंडरवर्ल्ड औरत से और दूसरे को एक खूबसूरत वायवी लेटनाइट क्लब की वेट्रेस से। इस फिल्म ने टैरेन्टीनों को आकर्षित किया और वॉन्ग की फिल्में अमेरिका में प्रवेश पा गईं।

सदैव काला चश्मा पहनने वाले वॉन्ग एक्शन सीन में हैंडहेल्ड कैमरे का उपयोग करते हैं। 2007 में वॉन्ग ने ‘माई ब्लूबेरी नाइट्स’ बनाई, जिसे उन्होंने लॉरेंस ब्लॉक के साथ मिल कर लिखा। इस फिल्म में आपको नोरा जोन्स, जूड लॉ, नैटली पोर्टमैन जैसे हॉलीवुड के अभिनेता नहर आएंगे। एक एकाकी स्त्री अपने आत्म की खोज में अमेरिका के आर-पार की यात्रा पर निकलती है, रास्ते में तमाम तरह के लोगों से मिलती है। यह उनकी पहली इंग्लिश फिल्म है, इसकी शूटिंग भी अमेरिका में हुई है।

फिल्म ‘द हैंड’

2004 में करीब एक घंटे की फिल्म ‘द हैंड’ बनाते हैं, जिसमें एक दर्जी का सहायक एक स्त्री ग्राहक के कपड़े डिजाइन करता है, इसी दौरान वह उसके प्रेम में पड़ जाता है। पहले स्त्री उसे मात्र लुभा रही थी पर बाद में दोनों में अच्छी ट्यूनिंग हो जाती है। इसी साल उन्होंने भविष्योन्मुख फिल्म ‘2046’ बनाई। एक साइंस फिक्शन के लेखक के जीवन में कुछ वर्षों में कई स्त्रियों का प्रवेश होता है। फिल्म ने 48 पुरस्कार अपनी झोली में किए।

1995 में वॉन्ग कार-वाई ने ‘फॉलन एंजल्स’ बनाई। करीब डेढ़ घंटे की इस क्राइम-ड्रामा फिल्म में हॉन्ग कॉन्ग का एक पेशेवर गुंडा इस काम से निकलना चाहता है, इतना ही नहीं वह अपने पेशे की साथिन से भी दूर होना चाहता है। आगे क्या होता है, यह आप खुद देखें। फिल्म को 8 पुरस्कार प्राप्त हुए। इसके एक साल पहले वॉन्ग ने 9 पुरस्कार जीते थे, उनकी फिल्म थी, ‘एशेज ऑफ टाइम’। करीब पौने दो घंटे की इस फिल्म लेखन उन्होंने लुइस चा के साथ मिल कर किया है।

क्राइम-ड्रामा फिल्म ‘एशेज ऑफ टाइम’ में एक पेशेवर गुंडा दिल टूटने के बाद उजाड़ में चला जाता है, वहां से वह एक कुशल तलवारबाज की सहायता से अपने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के पेशे को चलाता है। फिल्म में ब्रिजिट लिन, मैगी चेउन्ग तथा लेस्ली चेउन्ग ने अभिनय किया है।
 

बायोपिक- ‘द ग्रैंडमास्टर’

2013 में वॉन्ग कार-वाई ने ‘द ग्रैंडमास्टर’ नाम से एक बायोपिक बनाई। यह एक्शन-ड्रामा फिल्म ब्रूस ली के प्रशिक्षक मार्शल आर्ट्स के शिक्षक इप मैन या यिप मैन के जीवन को चित्रित करती है। 68 पुरस्कारों से नवाजी इस फिल्म को 2 ऑस्कर नामांकन भी मिला था। इस फिल्म का मजा बड़े परदे पर देखने में ही है।

फिल्म निर्देशक और सिनेमाटोग्राफर का बड़ा निकट का संबंध होता है, दोनों के तालमेल से एक अच्छी फिल्म बनती है। वॉन्ग कार-वाई और उनके सिनेमाटोग्राफर क्रिस्टोफर डॉयल का संबंध ऐसा ही था। क्रिस्टोफर ने वॉन्ग की साथ एक-से-एक नायाब फिल्मों (डेज ऑफ बीइंग वाइल्ड’, ‘एशेज ऑफ टाइम’, ‘चुन्गकिंग एक्सप्रेस’, ‘फॉलन एन्जल्स’, ‘हैप्पी टूगेदर’ ‘न द मूड फॉर लव’ तथा ‘2046’) की सिनेमाटोग्राफी की है।

वॉन्ग कार-वाई 2006 कान फिल्म समारोह तथा 2013 बर्लिन फिल्म समारोह की ज्यूरी के प्रेसीडेंट रहे हैं। 2006 में उन्हें फ्रांस सरकार का सर्वोच्च सम्मान ‘नेशनल ऑर्डर ऑफ द लीग ऑफ ऑनर: नाइट’ प्राप्त हुआ है। 2013 में फ्रांस के संस्कृति मंत्री ने उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स: कमांडर’ भी प्रदान किया।

वॉन्ग कार-वाई ने अब तक 36 फीचर, टीवी, लघु फिल्में निर्देशित की हैं। 66 साल के इस फिल्म निर्देशक से अभी काफी उम्मीद है। इंतजार करते हैं, पिक्चर अभी बाकी है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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