म्युजिकल ड्रामा कॉमेडी फिल्म ‘दिशा’
1992 में सई परांजपे ने सवा दो घंटे की म्युजिकल ड्रामा कॉमेडी फिल्म ‘दिशा’ के संवाद और कहानी लिखी और उसे निर्देशित भी किया। यहां भुखरी में परसाराम (ओम पुरी) है, जो बारह साल से एक कुंआ खोदते हुए ‘पगला परसा’ का खिताब पा गया है। उसकी पत्नी हंसा (शबाना आजमी) बीड़ी फैक्टरी में काम करती है। उनके चार बच्चे हैं, जिनके नाम सुन कर आप मुस्कुरा उठेंगे।
बच्चों के नाम हैं, शर्मीला, जीतेंद्र, अमिताभ तथा कद्दु। परसा का एक भाई है, सोमा सरपत (रघुवीर यादव) जिसे कभीकदा खेतों में काम मिल जाता है। उनका पड़ोसी युवा, हाल में विवाहित वसंत (नाना पाटेकर) है। वसंत की पत्नी फूलवती (राजश्री सावंत) और बीमार पिता दशरथ (नीलू फुले) है। बेटे की शादी के लिए पिता ने 10,000 रुपए का कर्ज लिया हुआ है। काम की खोज में पहले सोमा बंबई जाता है फिर आय के लालच में वसंत वहां जाता है।
पति से मिलने फूलवती बंबई जाती है और वह वहां जो हालात देखती है तो दंग रह जाती है। वसंत और सोमा 39 और लोगों के साथ एक कमरे में रह रहे हैं। सब मिल में काम करते हैं और कम वेतन के कारण कर्ज में डूबे हुए हैं। एक दिन वसंत पिता का पत्र पाकर वापस लौटता है। 135 मिनट की इस फिल्म में गांव में क्या हुआ है, बताना मेरा काम नहीं है।
सशक्त स्त्रियां पति की अनुपस्थिति में परिवार संभालती हैं। जब वसंत गांव लौट रहा है, दृश्य को आनंद मोदक का संगीत साधता है। सीधी-सरल फिल्म के सिनेमाटोग्राफर हैं, पुरस्कृत मधु अंबाट।
2013 में फिर से बनी ‘चश्मे बद्दूर’
सई परांजपे की लिखी पटकथा पर एक बार फिर से 2013 में करीब दो घंटे की फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ डेविड धवन ने बनाई, जिसका सई ने डेविड धवन और रेणुका कुन्जरु के साथ मिलकर लेखन किया है। कहानी वही है। खूबसूरत पड़ोसी लड़की सीमा (तापसी पन्नू) से शर्मीले सिड (अली जाफार) को प्रेम हो जाता है और उसके दोनों दोस्त ओमी (दिवेंदु शर्मा) एवं जय (सिद्धार्थ) उन्हें अलग करने की कोशिश करते हैं। फिल्म में अनुपम खेर तथा ऋषि कपूर भी हैं। फिल्म केलिए साउथ अफ्रीकन इंडिया फिल्म एंड टेलिविजन का पोपुलर पुरस्कार नवोदिता तापसी अप्न्नू को मिला था।
सई परांजपे ने ‘मैलोडी’, ‘पपीहा’, ‘चकाचक’, ‘सिकंदर’, ‘जादू का शंख’, ‘बेगार’, ‘फीडम फ्रॉम फियर’, ‘साज’, ‘कथा’, ‘कैप्टन लक्ष्मी’, ‘अंगूठा छाप’, ‘भागो भूत’ आदि 21 फिल्मों का निर्देशन किया, साथ ही दूरदर्शन केलिए ‘द लिटिल टी शॉप’, ‘अड़ोस-पड़ोस’, ‘छोटे बड़े’ फिल्मों का निर्देशन भी किया।
उन्होंने 1961 में एक अन्य फ़िल्म का स्क्रिप्ट लेखन किया था। इस ड्रामा फिल्म का नाम ‘निरुपमा आनी परिरानी’ है। इसमें सीमा देव, यशवंत दत्त, विश्वास कुंते ने भूमिकाएं की हैं और इस फिल्म का निर्देशन विनय काले ने किया है। इस फिल्म के विषय में जानकारी नहीं मिली, न ही फिल्म मिली।
सई परांजपे का नाम सिने-जगत में बड़े आदर के साथ लिया जाता है।
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