आठ-आठ ऑस्कर से नवाजी ‘गांधी’ फिल्म
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2007 की फिल्म ‘क्लोजिंग द रिंग’
बहुत सारे लोगों की भांति एटनबरो के जीवन पर भी द्वितीय विश्वयुद्ध का गहन प्रभाव रहा है। वे बार-बार अपनी फिल्मों में इसकी ओर मुड़ते हैं। ‘व्हिच वी सर्व’ तथा ‘द ग्रेट एस्केप’ ऐसी ही फिल्में हैं। 2007 में ‘क्लोजिंग द रिंग’ उनकी निर्देशित अंतिम एवं एक ऐसी ही फिल्म है। ऐसा ही कदाचित होता है जब रिचर्ड एटनबरो फिल्म बनाएं और वह विश्व के बड़े सिने-पुरस्कार के लिए नामित न हो।
करीब दो घंटे की शिरली मैक्लैन, क्रिस्टोफर प्लमर, डायलैन रॉबर्ट्स द्वारा अभिनीत इस फिल्म को दो पुरस्कारों हेतु नामांकित किया गया। फिल्म अतीत को उधेड़ती है। इस फिल्म में एक युवा (मार्टिन मैकैन) को उत्तरी आयरलैंड के बेलफ़ास्ट में एक अमेरिकन फाइटर प्लेन के मलबे से सोने की एक अंगूठी मिलती है। युवा उस अंगूठी को सही व्यक्ति तक पहुंचाने केलिए अमेरिका चल पड़ता है। यात्रा है, तो, तमाम रहस्य खुलते जाते हैं। असल में एक आदमी के प्रेम की निशानी सही व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक अमेरिकन बम वर्षक, मरने से पहले अपनी प्रेमिका (शर्ली मैक्लेन) तक यह अंगूठी पहुंचाना चाहता था। प्रेमिका कोई और नहीं उसके सबसे करीबी दोस्त की पत्नी है, यह व्यक्ति अपना प्रेम कभी प्रकट न कर पाया था।
फिल्म निर्देशन के साथ-साथ रिचर्ड एटनबरो ने लेखन भी किया। उन्होंने अपनी दोस्त एवं सहकर्मी डायना हॉकिंग्स के साथ मिलकर ‘एंटायरली अप टू यू, डार्लिंग लिखा है। इसमें उन्होंने दोनों की अनोखी जिंदगी तथा बेमेल दोस्ती को मजेदार तरीके से व्यक्त किया है।
द्वितीय विश्वयुद्ध में रॉयल एयरफोर्स में अपनी सेवा देने वाले एटनबरो कहते हैं कि सिनेमा ने पोर्नोग्राफी के अत्याचार को बढ़ावा दिया है और उन्हें इससे नफरत है। वे सबको इसका जिम्मेदार मानते हैं, जिसमें वे खुद को भी शामिल करते है। वे ‘राडा’, ‘कैपिटल रेडियो’, ‘बाफ़्टा’, गांधीफाउंडेशन’, ‘द ब्रिटिश नेशनलफिल्म एंड टेलिविजन स्कूल’ आदि कई संस्थाओं के प्रमुख हैं। कई संस्थाओं के पैटर्न भी हैं। एक समय ससेक्स यूनिवर्सिटी के चांसलर भी थे। चेल्सीफुटबॉल क्लब के आजीवन सपोर्टर हैं।
रिचर्ड एटनबरो समाज सेवा से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिल कर ‘रिचर्ड एंड शैला एटनबर्ग विजुअल आर्ट्स सेंटर’ की स्थापना की है। स्विटजर्लैंड में अपनी बेटी की स्मृति में ‘जेन क्रियेटिव सेंटरफॉर लर्निंग’ भी खोला है। बेटी 2004 में सुनामी के दौरान गुजरी थी। इस सुनामी में न केवल उनकी बेटी गई वरन उसके साथ उनकी नतनी और बेटी की सास भी बह गईं।
जब शिक्षा की बात आती है तो उनके लिए रंग, नस्ल, धर्म कोई मायने नहीं रखता है। अपने इन्हीं विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने ‘क्राईफ्रीडम’फिल्म बनाई। इन्हीं उदारवादी विचारों तथा कार्यों के लिए उन्हें ब्रिटिश एम्पायर का कमान्डर ऑफ द ऑर्डर बनाया गया तथा नाइटहुड भी प्रदान की गई।
गंभीर फिल्में बनाने के साथ उन्होंने कई कॉमेडी फिल्मों में काम किया है। ‘प्राइवेट’स प्रोग्रेस’, ‘आई’एम ऑलराइट जैक’ उनमें से कुछ हैं। बतौर प्रड्यूसर उन्होंने ‘द लीग ऑफ़ जेन्टलमैन’, ‘दि एंग्री साइलेंस’, ‘विसल्स डाउन द विंड’ आदिफिल्में प्रड्यूस की हैं। 24 अगस्त 2014 को गिरने के बाद लगी चोटों से रिचर्ड एटनबरो की लंदन में हुई मृत्यु हुई।
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