जीन-क्लाउड कैरिएर बनना तो टीचर चाहता था मगर बन गया स्क्रीनप्ले राइटर एवं निर्देशक। फिल्म स्क्रिप्ट में उसका पहला काम सहायक का था, उसने जॉक टैटी के सहायक के रूप में स्क्रीनप्ले लिखा था। वही टैटी जो ‘दि इल्युसनिस्ट’, ‘ट्रेफिक’ जैसी फिल्मों के स्क्रीनप्ले राइटर के रूप में जाने जाते हैं।
द डिस्क्रीट चार्म ऑफ द बूर्जुआजी
कैरिएर ने 1972 में ‘द डिस्क्रीट चार्म ऑफ द बूर्जुआजी’ लिखी, यह स्क्रीनप्ले उन्होंने लुई बुनुएल के साथ मिल कर तैयार किया। यह करीब पौने दो घंटे की कॉमेडी है। ये फिल्म मध्यवर्ग के छ: लोगों के स्वप्न के इर्द-गिर्द घूमती है, उनका स्वप्न बहुत सामान्य है वे एक साथ खाना खाना चाहते हैं लेकिन इस स्वप्न के पूरे होने में पग-पग पर तमाम बाधाएं आती हैं।
‘द डिस्क्रीट चार्म ऑफ द बूर्जुआजी’ को लुई बुनुएल ने निर्देशित किया है और इसमें फेरनांडो रे, डेल्फिन सेरिग ने अभिनय किया है। इसे 7 पुरस्कार मिले जिसमें एक ऑस्कर भी शामिल है। राउल कोटार्ड तथा ग्रेग टोलैंड प्रसिद्ध ने इस फिल्म की सिनेमाटोग्राफी की है। जीन-क्लाउड कैरिएर का कहना था कि मैं सदा बकवास करता हूं, लेकिन कोई तो मुझे समझता है। लुई बुनुएल मेरे साथ काम करते हैं क्योंकि वे मुझे समझते हैं।
ऑनरेरी ऑस्कर ग्रहण करते हुए उन्होंने जो कहा वह ध्यान देने योग्य है। वे स्क्रीनराइतर का यह सम्मान पा कर बहुत प्रसन्न थे। कारण बताते हुए उन्होंने कहा,
अक्सर स्क्रीनराइटर भुला दिए जाते है अथवा अनदेखे किए जाते हैं। स्क्रीनराइटर सिनेमा के इतिहास में गुजरने वाली छाया की तरह होते हैं। रिव्यू में उनका नाम नहीं आता है। कितने दु:ख की बात है। लेकिन इसके बावजूद वे फिल्ममेकर हैं। इसीलिए उस रात वे इस अमूल्य छोटी मूर्ति को अपने सब सहयोगियों के साथ साझा करते हैं। वे उनके साथ भी इसे साझा करते हैं जिन्हें वे जानते हैं और उनके साथ भी साझा करते जिन्हें वे नहीं जानते हैं।
स्क्रीनराइटिंग नए विचारों को खोजने का काम
इसी तरह ‘द स्टोरीटेलर्स’ को एक साक्षात्कार देते हुए कहा, स्क्रीनराइटर बनने का सर्वोत्तम तरीका है, फिल्म बनाने में विनम्र ढंग से भाग लेना। साथ ही आवश्यक है, आइडियाज होना। इस पेशे में जाने वालों के लिए उनके विचार बहुत काम के हैं। वे कहते हैं, स्क्रीनराइटर का काम केवल फिल्म लिखना और फिल्म बनाने के प्रत्येक तकनीक पहलुओं- साउंड, इमेजेज, एडिटिंग की जानकारी होना नहीं है। उसका काम नए विचारों को खोजना है। यही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। विभिन्न विचारों का गुलदस्ता प्रस्तुत कर पाना।
जीन-क्लाउड कैरिएर प्रतिभा पहचानते थे। उन्होंने मंच की एक अभिनेत्री डेल्फिन सेरिग के लिए ‘ले’एड-मेमोइर’ नाटक लिखा। बाद में दोनों दोस्त बन गए। वे लुई बुनुएल को उसका नाटक दिखाने लेकर आए। लुई बुनुएल उसके अभिनय से इतने प्रभावित हुए कि उसे अपनी दो फिल्मों में मुख्य नायिका की भूमिका में लिया। ये फिल्में थीं, ‘द मिल्की वे’ (1969) तथा ‘द डिस्क्रीट चार्म ऑफ द बूर्जुआजी’ (1972)। दोनों फिल्म का स्क्रीनप्ले जीन-क्लाउड कैरिएर ने ही लिखा है।
1981 कान फिल्म समारोह की ज्यूरी में शामिल जीन-क्लाउड कैरिएर लिखित कॉमेडी-ड्रामा ‘द मिल्की वे’ में दो घुमक्कड़ फ्रांस से स्पेन की तीर्थ यात्रा पार निकलते हैं। रास्ते में वे हिचहैक करते हैं, भीख मांग कर खाते हैं, ईसाई रूढ़ियों और विभिन्न युगों के विधर्म से टकराते हैं। फिल्म को बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का इंटरफिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ।
जीन-क्लाउड कैरिएर ने स्क्रीनप्ले के अलावा उपन्यास, कहानियां, नाटक भी लिखे।
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