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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: स्क्रीनप्ले राइटर जीन-क्लाउड कैरिएर

सार

जीन-क्लाउड कैरिएर बनना तो टीचर चाहता था मगर बन गया स्क्रीनप्ले राइटर एवं निर्देशक। फिल्म स्क्रिप्ट में उसका पहला काम सहायक का था, उसने जॉक टैटी के सहायक के रूप में स्क्रीनप्ले लिखा था। वही टैटी जो ‘दि इल्युसनिस्ट’, ‘ट्रेफिक’ जैसी फिल्मों के स्क्रीनप्ले राइटर के रूप में जाने जाते हैं।
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Jean-Claude Carrière - फोटो : Twitter
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विस्तार
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पटकथा लेखन फिल्म (कथा) की केन्द्रीय आधार भूमि होती है, जिस पर निर्देशक फिल्म का ताना-बाना खड़ा करता है। निर्देशन सुयोग्य हाथों में जितना ज्ञानात्मक संवेदन के साथ होगा, कथा अपने उद्देश्य पर उतनी पहुंचेगी। तो आज बात करती हूं, स्क्रीनप्ले राइटर जीन-क्लाउड कैरिएर की। वैसे जीन-क्लाउड कैरिएर पटकथा लेखन के साथ-साथ अभिनेता तथा निर्देशक भी थे। उन्होंने मिलान कुंडेरा जैसे उपन्यासकार के काम पर बनने वाली फिल्म की पटकथा लिखी। उन्होंने लुई बुनेल, लुई माले, मिलोस फोरमैन, साउल जेन्ट जैसे सिने-निर्देशकों के साथ काम किया, उनके साथ मिल कर फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी।

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जीन-क्लाउड कैरिएर का जन्म 17 सितम्बर 1931 को फ्रांस में हुआ था। पहले उनका विवाह निकोल जेनिन से हुआ। मगर यह रिश्ता कुछ दिन के बाद तलाक में बदल गया। नेहाल तेजाडोड उनकी दूसरी पत्नी हैं, जो कैरिएर की मृत्यु तक उनके संग थीं। कैरिएर की बेटी का नाम आइरिस कैरिएर है। जीन-क्लाउड कैरिएर की पेरिस में 8 फरवरी 2021 को मृत्यु हुई।

जीन-क्लाउड कैरिएर ने मिलान कुंडेरा (जिनकी अभी हाल में मृत्यु हुई है) के उपन्यास ‘दि अनबेयरेबल लाइटनेस ऑफ बीइंग’ पर इसी नाम से बनने वाली 1988 की फिल्म का लेखन किया जिसमें निर्देशक फिलिप कौफमैन ने भी सहयोग दिया। फिलिप कौफमैन निर्देशित इस फिल्म में 1968 के सेंट्रल यूरोप में कहानी चलती है।

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द अनबेयरेबल लाइटनेस ऑफ बीइंग

करीब तीन घंटे की इस ड्रामा, रोमांस फिल्म में एक चेक डॉक्टर अपनी एक्टिव सेक्स लाइफ के समय एक स्त्री से मिलता है। परंतु समस्या है, यह स्त्री एकल संबंध चाहती है और, सब छिन्न-भिन्न हो जाता है क्योंकि उनके देश पर रूसी अतिक्रमण होता है। फिल्म ‘दि अनबेयरेबल लाइटनेस ऑफ बीइंग’ में डैनियल डे-लेविस तथा जुलिएट बिनोके ने भूमिकाएं की हैं।

अक्सर फिल्म लेखन कई लोग मिल कर करते हैं, नहीं भी करते हैं तो प्रचार-प्रसार के मद्देनजर निर्देशक का नाम इस श्रेणी में शामिल किया जाता है। अत: अधिकतर जीन-क्लाउड कैरिएर के नाम के साथ वोल्कर श्लॉन्डोर्फ, जाक डेरे तथा पियरे एटेक्स का नाम हम जुड़ा देखते हैं।

1962 में जीन-क्लाउड कैरिएर ने पियरे एटेक्स के साथ मिल कर ‘हैप्पी एनिवर्सरी’ का स्क्रीनप्ले लिखा। दोनों ने न केवल इस फिल्म को साथ मिल कर लिखा, इसका निर्देशन भी दोनों ने साथ मिल कर किया। इस फिल्म ने कई नामी पुरस्कार अपने नाम किए। इसे 1963 का ऑस्कर पुरस्कार मिला, वह भी सर्वोत्तम लघु विषय का। साथ ही सर्वोत्तम लघु फिल्म केलिए मिला बाफ्टा पुरस्कार और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में इसे पुरस्कृत किया गया।

मात्र 15 मिनट की इस फिल्म में जॉर्ज्स लोरिओट, नोनो जैमिट आदि ने अभिनय किया है। कहानी कुछ इस प्रकार है, एक स्त्री अपनी वैवाहिक वर्षगांठ मनाने के लिए अपने एवं अपने पति के लिए डिनर तैयार कर रही है। उसका पति भागदौड़ कर बाहर के काम निपटा रहा है, वह कई स्थानों पर पत्नी केले उपहार खरीदने रुकता है। मगर देव उसके विपरीत हैं।

पेरिस का ट्रेफिक जाम और तमाम अन्य परेशानियां हर कदम पर उसकी राह में अड़चने डाल रही हैं। वह हर हाल में समय पर डिनर हेतु घर पहुंचना चाहता है। इधर पत्नी को पता नहीं है कि उसके पति के साथ क्या हो रहा है? क्या यह एक खुशनुमा वर्षगांठ डिनर होगा? क्या पति समय पर घर पहुंच सकेगा? इसी ऊहापोह में फिल्म समाप्त होती है।

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विश्व सिनेमा - फोटो : Instagram
जीन-क्लाउड कैरिएर बनना तो टीचर चाहता था मगर बन गया स्क्रीनप्ले राइटर एवं निर्देशक। फिल्म स्क्रिप्ट में उसका पहला काम सहायक का था, उसने जॉक टैटी के सहायक के रूप में स्क्रीनप्ले लिखा था। वही टैटी जो ‘दि इल्युसनिस्ट’, ‘ट्रेफिक’ जैसी फिल्मों के स्क्रीनप्ले राइटर के रूप में जाने जाते हैं।

द डिस्क्रीट चार्म ऑफ द बूर्जुआजी

कैरिएर ने 1972 में ‘द डिस्क्रीट चार्म ऑफ द बूर्जुआजी’ लिखी, यह स्क्रीनप्ले उन्होंने लुई बुनुएल के साथ मिल कर तैयार किया। यह करीब पौने दो घंटे की कॉमेडी है। ये फिल्म मध्यवर्ग के छ: लोगों के स्वप्न के इर्द-गिर्द घूमती है, उनका स्वप्न बहुत सामान्य है वे एक साथ खाना खाना चाहते हैं लेकिन इस स्वप्न के पूरे होने में पग-पग पर तमाम बाधाएं आती हैं। 

‘द डिस्क्रीट चार्म ऑफ द बूर्जुआजी’ को लुई बुनुएल ने निर्देशित किया है और इसमें फेरनांडो रे, डेल्फिन सेरिग ने अभिनय किया है। इसे 7 पुरस्कार मिले जिसमें एक ऑस्कर भी शामिल है। राउल कोटार्ड तथा ग्रेग टोलैंड प्रसिद्ध ने इस फिल्म की सिनेमाटोग्राफी की है। जीन-क्लाउड कैरिएर का कहना था कि मैं सदा बकवास करता हूं, लेकिन कोई तो मुझे समझता है। लुई बुनुएल मेरे साथ काम करते हैं क्योंकि वे मुझे समझते हैं।

ऑनरेरी ऑस्कर ग्रहण करते हुए उन्होंने जो कहा वह ध्यान देने योग्य है। वे स्क्रीनराइतर का यह सम्मान पा कर बहुत प्रसन्न थे। कारण बताते हुए उन्होंने कहा,

अक्सर स्क्रीनराइटर भुला दिए जाते है अथवा अनदेखे किए जाते हैं। स्क्रीनराइटर सिनेमा के इतिहास में गुजरने वाली छाया की तरह होते हैं। रिव्यू में उनका नाम नहीं आता है। कितने दु:ख की बात है। लेकिन इसके बावजूद वे फिल्ममेकर हैं। इसीलिए उस रात वे इस अमूल्य छोटी मूर्ति को अपने सब सहयोगियों के साथ साझा करते हैं। वे उनके साथ भी इसे साझा करते हैं जिन्हें वे जानते हैं और उनके साथ भी साझा करते जिन्हें वे नहीं जानते हैं।


स्क्रीनराइटिंग नए विचारों को खोजने का काम

इसी तरह ‘द स्टोरीटेलर्स’ को एक साक्षात्कार देते हुए कहा, स्क्रीनराइटर बनने का सर्वोत्तम तरीका है, फिल्म बनाने में विनम्र ढंग से भाग लेना। साथ ही आवश्यक है, आइडियाज होना। इस पेशे में जाने वालों के लिए उनके विचार बहुत काम के हैं। वे कहते हैं, स्क्रीनराइटर का काम केवल फिल्म लिखना और फिल्म बनाने के प्रत्येक तकनीक पहलुओं- साउंड, इमेजेज, एडिटिंग की जानकारी होना नहीं है। उसका काम नए विचारों को खोजना है। यही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। विभिन्न विचारों का गुलदस्ता प्रस्तुत कर पाना।

जीन-क्लाउड कैरिएर प्रतिभा पहचानते थे। उन्होंने मंच की एक अभिनेत्री डेल्फिन सेरिग के लिए ‘ले’एड-मेमोइर’ नाटक लिखा। बाद में दोनों दोस्त बन गए। वे लुई बुनुएल को उसका नाटक दिखाने लेकर आए। लुई बुनुएल उसके अभिनय से इतने प्रभावित हुए कि उसे अपनी दो फिल्मों में मुख्य नायिका की भूमिका में लिया। ये फिल्में थीं, ‘द मिल्की वे’ (1969) तथा ‘द डिस्क्रीट चार्म ऑफ द बूर्जुआजी’ (1972)। दोनों फिल्म का स्क्रीनप्ले जीन-क्लाउड कैरिएर ने ही लिखा है।

1981 कान फिल्म समारोह की ज्यूरी में शामिल जीन-क्लाउड कैरिएर लिखित कॉमेडी-ड्रामा ‘द मिल्की वे’ में दो घुमक्कड़ फ्रांस से स्पेन की तीर्थ यात्रा पार निकलते हैं। रास्ते में वे हिचहैक करते हैं, भीख मांग कर खाते हैं, ईसाई रूढ़ियों और विभिन्न युगों के विधर्म से टकराते हैं। फिल्म को बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का इंटरफिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ।

जीन-क्लाउड कैरिएर ने स्क्रीनप्ले के अलावा उपन्यास, कहानियां, नाटक भी लिखे।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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