फिल्म ‘इटैलियन फॉर बिगिनर्स’ का दृश्य
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सन् 2000 के बाद का डेनिस सिनेमा
इस सदी की बात करें तो डेनमार्क से कई बहुत अच्छी फिल्में आई हैं। 2000 में निर्देशक लोन सेर्फिग की फिल्म ‘इटैलियन फॉर बिगिनर्स’ डॉग्मा फिल्म एक कॉमेडी है जो बिखरे डेनिश परिवार को दिखाती है जिसके कुछ सदस्य इटैलियन बोलने की कोशिश करते हैं। अगले साल एंडर्स थॉमस जेनसेन की फिल्म ‘फ्लिकिरिंग लाइट्स’ आई जो कोपेनहेगन के अपराधियों को लेकर चलती है। कैसे उनका जीवन बदलता है यही इस फिल्म का कथानक है।
2010 में सुसैन बैएर की फिल्म ‘इन ए बेटर वर्ल्ड’ आई। करीब दो घंटे की इस फिल्म में दर्शक एक जटिल परिवार को देखता है। एक डॉक्टर डेनमार्क तथा सुडान में युद्ध में घायल हुए मरीजों का इलाज करता है। साथ ही वह और उसका बेटा अपने जीवन में भी संघर्ष कर रहे हैं। इसकी कहानी डेनमार्क के एक छोटे से गांव तथा अफ्रीका के शरणार्थी शिविर में चलती है। फिल्म को अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
दो साल बाद 2012 में निकोलाज एर्सेल ने ‘ए रॉयल अफेयर’ बनाई, वास्तविक घटना पर आधारित यह फिल्म ऐतिहासिक ड्रामा है। इसमें इंग्लैंड की एक राजकुमारी केरोलीन मथिल्डे की डेनिस राजकुमार क्रिस्चियन छठवें से ब्याह दी जाती है। राजकुमार मानसिक रूप से अस्वस्थ है। यह नाखुश राजकुमारी राजकुमार के चिकित्सक से अफेयर शुरू करती है।
इसाबेल एक्लोफ की फिल्म ‘होलीडे’ एक अपराधी के विषय में है जो अपनी प्रेमिका को एक ट्रिप पर ले जाता है। पूरी फिल्म कार, क्लब, शराब और सेक्सुअल अत्याचार को चित्रित करती है। सवा दो घंटे की 2018 की यह फिल्म निर्देशक की पहली फिल्म है। दर्शक को पूरी तरह से खींचती यह फिल्म टर्किश रिविएरा की सैर कराती है।
2019 की फिल्म ‘क्वीन ऑफ हार्ट’ अभिभावक, बच्चा, मां-प्रेमी सारी सीमाओं को तोड़ती है। यहां स्त्री अपने सौतेले बेटे के साथ एक खतनाक संबंध बनाती है। इस फिल्म में भी भरपूर सेक्स सीन हैं। यह फिल्म दर्शक को असहज बनाती है। अगले साल थॉमस विन्टेरबर्ग ने ‘अनादर राउंड’ फिल्म बनाई जो डेनमार्क की पियक्कड संस्कृति को दिखाती है। इस मास्टरपीस में हाई स्कूल के चार शिक्षक नॉर्वेजियन फिलॉसफर की एक हाईपोथिसिस पर अमल करने के लिए पीना शुरू करते हैं, वे जानना चाहते हैं क्या इससे वे बेहतर टीचर और बेहतर इंसान बन जाएंगे? पर क्या ऐसा होता है? यह फिल्म डेनमार्क से ऑस्कर जीतने वाले चौथी फिल्म है।
आज डेनमार्क में निकोलाई विंडिंग रेफ्न, सुसैन बैएर, थॉमस विंटरबर्ग, निकोलाई आर्सेल खूब सक्रिय सिने-निर्देशक हैं। इसमें शक नहीं है कि डेनमार्क की फिल्मों में हमें सृजनात्मकता देखने को मिलती है भले ही वे डार्क क्यों न हों। दर्शक इन्हें देखते हुए कभी भी ऊबता नहीं है। डेनिश फिल्में अपने कथानक और कलात्मकता के लिए जानी जाती हैं।
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