इस वर्ष, 2020 में अन्य वर्षो की भांति ही हिंदी दिवस की ऑस्ट्रेलिया भर में धूम रही। फर्क सिर्फ इतना था कि कोविड-19 के चलते यह कार्यक्रम वर्चुअल रूप से आयोजित किए गए थे। जैसे-जैसे ऑस्ट्रेलिया में हिंदी बोलने वाले प्रवासियों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे हिंदी की गतिविधियों के प्रति लोगों का उत्साह भी बढ़ रहा है।
2016 की जनगणना के हिसाब से यहां हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या और सबसे ज्यादा बोली जाने वाली 10 भाषाओं में से हिंदी सात नंबर पर आती है और हिंदीभाषी लोग न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया, क्वींसलैंड, साउथ ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलिया कैपिटल टेरिटरी सभी राज्यों में बढ़ गए हैं।
हिंदी के अतिरिक्त यहां तमिल और पंजाबी बोलने वाले लोग भी काफी है। ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स के अनुसार जून 2018 तक यहां करीब 592,000 भारतवंशी थे। हिंदी भारतीय भाषाओं में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जिसे 159,652 से अधिक लोग बोलते हैं।
पिछले दो सालों में इस संख्या में वृद्धि ही हुई है। इसी कारण लोगों का अपनी भारतीय भाषाओं को सीखने के प्रति रुझान पैदा हुआ है। हिंदी दिवस ऑस्ट्रेलिया में प्रति वर्ष मनाया जाता था, इस साल भी वर्चुअल रूप से भारतीय हाई कमीशन और कौंसलावास के सहयोग से हिंदी दिवस पर अनेक गतिविधियां आयोजित की गईं।
सिडनी में कौंसलावास ने हिंदी दिवस के कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक सहयोग दिया। कुल मिलाकर तीन आयोजन हुए। पहले दिन यानी 11 सितंबर को सिडनी के भारतीय काउंसलेट में 'ऑस्ट्रेलिया में भारतीय भाषाएं - हिंदी का एक परिप्रेक्ष्य' विषय पर चर्चा रखी गई, जिसमें काउंसल जनरल श्री मनीष गुप्ता के सानिंध्य में वक्ताओं ने भाषा के अनेक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
ऑस्ट्रेलिया हिंदी मीडिया रेडियो - कुमुद मीरानी, हिंदी शिक्षण - माला मेहता, संस्कृत शिक्षण - डॉ मीना श्रीनिवासन , हिंदी साहित्य- रेखा राजवंशी और हिंदी क्यों - चार्ल्स थॉमसन ने अपने विचार व्यक्त करे। फेडरेशन ऑफ कम्युनिटी लैंग्वेजेज़ की प्रेसिडेंट लूसिया जोन्स ने भी हिंदी की स्थिति के बारे में प्रकाश डाला।