फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Father's day 2022: फल-फूल रहे हैं अब, पिता होने के बीज

सार

अक्सर जब पैरेंटिंग की बात चलती है तो पिता की भूमिका परिवार के मुखिया, बच्चों की फीस भरने वाले, अपनी कठोर छवि से बच्चों के मन में डर पैदा करने वाले या हमेशा गम्भीर मुख मुद्रा के साथ प्रस्तुत होने वाले आदमी के रूप में होती है।
विज्ञापन
Happy Father's Day 2022 - फोटो : Istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अक्सर जब पैरेंटिंग की बात चलती है तो पिता की भूमिका परिवार के मुखिया, बच्चों की फीस भरने वाले, अपनी कठोर छवि से बच्चों के मन में डर पैदा करने वाले या हमेशा गम्भीर मुख मुद्रा के साथ प्रस्तुत होने वाले आदमी के रूप में होती है। वह अपने बच्चों से प्यार तो करता है लेकिन जताने से हमेशा पीछे रह जाता है, पर अब यह रूप बदल रहा है और सकारात्मक परिणामों के साथ समाज में पुरुषत्व को नए अर्थों में परिभाषित कर रहा है।

विज्ञापन


वो एक संगीत सम्बन्धी टीवी शो था। पूरा परिवार साथ बैठकर उसका आनंद ले रहा था। बच्चे ने वाकई बहुत अच्छा गाया था।  प्रस्तुति समाप्त होते ही सामने बैठे निर्णायकों ने उसकी तारीफ करनी शुरू की और इस दौरान कैमरा बच्चे के माता-पिता की ओर घूमा। और निर्णायकों ने उनसे बात करना शुरू किया।

अचानक बोलते बोलते बच्चे के पिता का गला भर्रा गया और वह रो पड़े। बच्चा आधी मुस्कुराहट, आधे असमंजस में अपने पिता की ओर देख रहा था और बाद में उसने बताया कि यह 14 वर्षों के उसके जीवन मे पहली बार था जब उसने अपने पिता को इस तरह भावुक होते देखा था।
विज्ञापन


यह एक कार्यक्रम की बात नही है। यह भी मान लीजिए कि कैमरे के सामने तो चीजें निर्देशित भी हो सकती हैं, लेकिन पिछले एक दशक में जिस तेजी से समाज मे पुरुषों की भूमिका, व्यवहार और विचार में परिवर्तन आया है, वह उसके भावनात्मक पक्ष को और भी अधिक दृढ़ता से दिखाता है।

खासकर पिता की भूमिका में आने के बाद पुरुष जिस तरह अपनी भावनाओं का प्रदर्शन अब अधिक सहजता से करने लगे हैं, उससे बच्चे और पिता के बीच के उस सदियों पुराने रूखे और फॉर्मल रिश्ते को नया अर्थ मिला है। अब बच्चों के लिए पिता केवल पॉकेटमनी देने या घुमाने -फिराने पर पैसे खर्च करने वाला या शिकायत करने पर डांट-फटकार करने तक व्यवहार सीमित रखने वाला नहीं रह गया है।


विशेषकर सिंगल पैरेंटिंग की स्थितियों में। जहां पिता, मां की भूमिका में रहकर बेटी के पहले पीरियड्स पर उसकी घबराहट दूर करता है और उसे समझाता है और बेटे के स्कूल में स्टेज परफॉर्मेंस पर आंखों में आए आंसुओं को दिखाने से डरता नहीं।

विज्ञापन

दुनिया बदली है और समाज भी। अब पुरुषों का भावुक होकर अपने बच्चों के प्रति लगाव दिखाना आम बात है। - फोटो : Istock
दुनिया बदली है और समाज भी। अब पुरुषों का भावुक होकर अपने बच्चों के प्रति लगाव दिखाना आम बात है। वे अब केवल बच्चे के पिता बनने तक सीमित नहीं रह गए है बल्कि पिता होने के सहज रूप को भी खुलकर जी रहे हैं।
 
मेरे एक परिचित सज्जन हैं। 3-4 साल पहले जब उनके बच्चे का जन्म हुआ तो वे लेबर रूम में अपनी पत्नी के साथ थे और बाहर आकर इतना रोये की डॉक्टर को उन्हें सम्भालने आना पड़ा। बाद में उन्होने बताया कि एक महिला जीवन के इस पड़ाव पर इतने दर्द और तकलीफ से गुजरकर बच्चे को जन्म देती है उन्हें यह अंदाजा नहीं था। वह बोले कि यह देखने के बाद अपनी पत्नी और हर महिला के लिए उनके मन मे सम्मान और बढ़ गया है।

वे इस दर्द को तो नहीं सहन कर सकते लेकिन बच्चे की परवरिश में मां के बराबर भूमिका निभाने का पूरा प्रयास करेंगे और उन्होने यह बात सच कर दिखाई। बाद में एक दिन उनकी पत्नी ने खुद हंसते हुए  कहा कि रात को जागकर बच्चे की नैपी बदलने से लेकर उसके साथ साथ उनकी (पत्नी की) डाइट का भी पूरा ख्याल रखने तक हर काम उनके पति ने इतनी शिद्दत से किया कि उन्हें लगा माँ जरूर वे बनी हैं लेकिन पैरेंटिंग के पूरे नम्बर तो उनके पति को ही मिलेंगे।

अपनी दादी की मृत्यु के समय जब मैंने पहली बार अपने पिता को रोते देखा तो मैं एकदम से जड़ हो गई थी। हमेशा धीर गम्भीर रहने वाले पिता को इस तरह टूटते मैंने कभी नही देखा था। रफ-टफ इमेज वाले अपने पिता को इस तरह देखना मुझे अंदर तक झकझोर गया।

उस दिन मैंने यह भी समझा कि अपने दायित्वों को निभाते हुए हमेशा एक सख्त पिता की भूमिका निभाने वाले पापा न जाने कितने सालों से अपने आंसुओं को भीतर दबाए हुए थे। उनके इस रूप ने मेरे लिए उनके नए भावनात्मक पक्ष को सामने ला खड़ा किया था।

आजकल जमाना सोशल मीडिया का है और यहां आपको भावनाओं में भरकर रोते हुए कई पिता आसानी से दिखाई दे जाएंगे। तो इस फादर्स डे पितृत्व के एहसास को खुलकर जीने और अपने बच्चे के प्रति भावनाओं को खुलकर प्रकट करने वाले पिताओं के इन आंसुओं का स्वागत कीजिये, ये उनके कमजोर होने की नहीं, भावनात्मक रूप से और मजबूत होने की निशानी है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें