गांवों को विशिष्ट पहचान दिलाने की कवायद (सांकेतिक)
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...ताकि बेटियों को न मानें बोझ
इसके दो माह पहले मुख्यमंत्री ने श्योपुर में ‘बेटी बचाओ’ और ‘लाडली लक्ष्मी अभियान’ तो गति देने के लिए ऐलान किया था कि हर आंगनवाड़ी में माह के तीसरे मंगलवार को नवजात बेटियों का लाडली जन्मोत्सव मनेगा। उद्देश्य यही कि लोग बेटी के जन्मदिन को बोझ न मानकर वरदान मानें। इसके पहले एक और कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए शहरी विकास के पांच मंत्र भी गिनाए।
जिसके मुताबिक हर नगर, राज्य के विकास का चेहरा बने, शहरों में जीवन जीना सभी के लिए आसान हो, हर नगरवासी को जीवन की गुणवत्ता मिले, शहरों के आकार भले ही बढ़ जाएं, लेकिन असमानताएं कम हों तथा सभी को सम्मान से जीवन यापन का अवसर उपलब्ध हो। बहरहाल नगर जन्मदिन मनाने की इस पहल से एक नई हलचल तो हुई है। अटकलों, तर्कों और ऐतिहासिक तथ्यों, किंवदंतियों का बाजार गर्म हो गया है।
अब सवाल यह कि गांव/शहर का जन्म दिन तय कैसे हो? क्योंकि ऐसे ऐतिहासिक प्रमाण मिलना दूभर हैं। इसे देखते हुए सरकार ने निर्देश दिए हैं कि ग्राम सभा की बैठक बुलाकर ग्राम गौरव दिवस तय करने के लिए गांव के किसी ऐतिहासिक दिवस को, गांव के किसी महापुरुष, स्वतंत्रता सेनानी या राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध पुरुष-महिला के जन्मदिन को ग्राम गौरव दिवस के रूप में तय किया जाए। प्रदेश के कुछ जिलों में इस पर काम भी शुरू हो गया है। इस पूरी कवायद का मकसद है कि प्रेम, सद्भाव, समरसता और सद्भाव ग्रामीण जीवन का मूलतत्व है। अपने खूबसूरत इतिहास, परम्परा के कारण हर गांव की विशिष्ट पहचान होती है। गांव गौरव दिवस उसी पहचान को कायम रखने का प्रयास है।
राजनीतिक रंग
मप्र का यह नवाचार अमूमन नेताओं और महापुरुषों की जन्मदिन मनाने और ऐसे आयोजनों को पूरा राजनीतिक रंग देने से थोड़ा अलग है, लेकिन अंतिम उद्देश्य वही है। जहां तक भोपाल की बात है तो भोपाल के नवाबी रियासत से मुक्त होने और इसके लोकतांत्रिक गंणराज्य का हिस्सा बनने की तिथि को शहर का जन्मदिन मान लिया गया है।
भोपाल का विलीनीकरण 1 जून 1949 को हुआ था। उसी तरह इंदौर का जन्म दिन होलकर शासिका देवी अहिल्या बाई के जन्म दिन को माना गया है। हालांकि इस इतिहासकारों और राजनेताअओं में कुछ मतभेद थे। मप्र के उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर आदि शहर भी बहुत प्राचीन हैं। इन्हें किसने और कब बसाया, इसकी ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। जाहिर है कि ऐसे में वो तारीख तय की जाएगी, जो राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो। हो भी यही रहा है।