पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी सादा जीवन व्यतीत करते थे
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1963 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर लोकसभा के उपचुनाव में वे खड़े हुए परंतु उसमें वे जीत नहीं पाए। दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि भारत के लिए एक स्वदेशी आर्थिक मॉडल विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसमें व्यक्ति केंद्र में हो। उनके इस दृष्टिकोण ने इस अवधारणा को समाजवाद और पूंजीवाद से अलग बना दिया।
एकात्म मानववाद को 1965 में जनसंघ के आधिकारिक राजनीतिक सिद्धांत के रूप में अपनाया गया था। यहां पर एक बात गौर करने वाली है कि दीनदयाल उपाध्याय जी के बताए गए रास्ते तथा सिद्धांतों की चर्चा साम्यवाद और समाजवाद की तुलना में बेहद कम हुई है। जबकि उनके हर सिद्धांत में समाज के सबसे निचले, दबे कुचले व्यक्ति केंद्र में पाया जाता है। इस कारण यह आवश्यक है कि उनके विचारों को और सहज तथा सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाया जाए ताकि लोग न सिर्फ दीनदयाल जी को जाने बल्कि उनके विचारों और सिद्धांतों को भी समझे वे देश के नवनिर्माण के बजाय देश के पुनर्निर्माण पर विशेष जोर देते थे।
भारतीय चिंतन परंपरा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय
भारतीय चिंतन परंपरा में दीनदयाल उपाध्याय जी का विशेष स्थान है क्योंकि उन्होंने पाश्चात्य दर्शन के जगह भारतीय जीवन पद्धति में समाहित एकात्म मानववाद को आधुनिक ढंग से प्रस्तुत किया कहा कि पश्चिम में कहा जाता है कि ऑनेस्टी इस द बेस्ट पॉलिसी परंतु भारतीय जीवन दर्शन यह कहता है-
ऑनेस्टी इज नॉट ए पॉलिसी बट प्रिंसिपल अर्थात् हमारे यहां सत्य निष्ठा नीति नहीं बल्कि सिद्धांत है। उन्होंने राज्य का आधार धर्म माना है। उनका कहना था कि सिर्फ दंड के सहारे राज्य को नहीं चलाया जा सकता। राज्य को चलाने के लिए धर्म की भी आवश्यकता पड़ती है और धर्म के साथ ही उन्होंने अर्थ पर भी जोर दिया था क्योंकि बगैर अर्थ के धर्म टिक नहीं पाता है।
उन्होंने भारत की आर्थिक नीति पर भी किताबें लिखी है जो इस प्रकार हैं-
- भारतीय अर्थ नीति: विकास की एक दिशा
- भारतीय अर्थ नीति का अवमूल्यन
श्रेष्ठ नेता वही होता है जो उन सिद्धांतों का पालन खुद करें जो वह दूसरों के लिए कहता है पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी सादा जीवन व्यतीत करते थे और अपने कार्यकर्ताओं को भी यही कहा करते थे कि दो धोती, दो कुरते और दो वक्त का भोजन ही उनकी संपूर्ण आवश्यकता है।
वर्तमान समय में केंद्र सरकार ने उनके सम्मान में मुगलसराय जंक्शन का नाम दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन कर दिया गया।16 फरवरी 2020 को वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल सेंटर खोला और देश में उनकी सबसे ऊंची प्रतिमा उपाध्याय की 63 फुट की प्रतिमा का अनावरण किया।
आज जब हमारे देश में किसी योजना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और उस अंतिम व्यक्ति तक लक्षित करके योजनाएं बनाई जाती है तो मानो ऐसा लगता है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का सपना पूरा हो रहा है। आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जयंती पर हम सभी को उनके विचारों से प्रेरणा लेना चाहिए।
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