रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 में राजस्थान का कर्ज बढ़कर 5 लाख 37 हजार 013 करोड़ हो चुका है। पं
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अशोक गहलोत ने वरिष्ठ नागरिकों की वृद्धावस्था पेंशन बढ़ा दी थी और हर साल 15 फीसदी बढ़ोतरी का प्रावधान किया। इससे राज्य पर 12,000 करोड़ रुपए सालाना का बोझ पड़ा। इस योजना में अभी केंद्र सरकार का योगदान मात्र 367 करोड़ रुपए का है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जवला गैस धारकों को 450 रुपए में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का वादा किया है। राजस्थान में 76 लाख परिवार उज्जवला के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में नई सरकार पर 750 करोड़ रुपए से ज्यादा का बोझ पड़ने वाला है।
अभी योजनाओं को लागू करने के लिए राजस्थान सरकार भारी कर्ज ले रही है। सरकार ने इसी साल अप्रैल से अगस्त की तिमाही में 12,288 करोड़ कर्ज लिया और अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में फिर 14,000 करोड़ का कर्ज लेने की ओर सरकार बढ़ गई।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 में राजस्थान का कर्ज बढ़कर 5 लाख 37 हजार 013 करोड़ हो चुका है। पंजाब के बाद राजस्थान देश में सबसे ज्यादा कर्ज में डूबा राज्य है।
वित्तीय प्रबंधन के अलावा नई सरकार के आगे कानून व्यवस्था बड़ी चुनौती रहने वाली है, क्योंकि यही एक ऐसा मुद्दा है, जिसे भाजपा ने सबसे ज्यादा उछाला था। दूसरा प्रतियोगी परीक्षाओं को करने के लिए भी नई सरकार को ठोस योजना बनानी पड़ेगी। राजस्थान अभी पेपर लीक के लिए बदनाम है। सांप्रदायिक सौहार्द बनाना भी नए मुख्यमंत्री के लिए बड़ा चैलेंज होगा, क्योंकि पिछले 5 सालों में करौली, भीलवाड़ा, जोधपुर समेत कई शहरों में सांप्रदायिक हिंसा हुई है।
अभी 100 दिन की कार्ययोजना की बात भाजपा की ओर से की जा रही है। लोकसभा चुनाव तक पुरानी सरकार की योजनाएं चलती रहेंगी, ऐसा लगता है। 6 महीने बाद स्पष्ट होगा कि नए मुख्यमंत्री का विजन क्या है और वो जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरे।
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