बच्चों में कोरोना के लक्षण समझना होंगे और एहतियात बरतनी होगी।
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बाल श्रम की बेड़ियों से अबोध बच्चों को मुक्त कराना होगा
दुनिया ने 2025 तक बाल श्रम को मिटा लेने का प्रण लिया है। भारत भी इसके लिए कटिबद्ध है। लेकिन कोरोना का यह दौर चुनौती लिए खड़ा है। ऐसे में बच्चों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ वे मजदूरी कर अपने बचपन को खो रहे हैं तो दूसरी तरफ ऐसे बाल श्रमिकों पर कोरोना का खतरा ज्यादा है, क्योंकि यह बच्चे बाहरी दुनिया के संपर्क में ज्यादा आते हैं।
ऐसे में जरूरी हो गया है कि ऐसे बच्चों को चिन्हित कर सरकारी एजेंसियों और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा मुक्त कराया जाए, साथ ही उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह तभी संभव हो पाएगा जब लोग एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी समझने लगेंगे। ऐसा इसलिए कि अभी भी बहुत से लोग बाल श्रमिक को किसी ढाबे, गैरेज या फैक्ट्री में काम करते हुए देखते हैं और भूल जाते हैं। जबकि उनकी नैतिक जिम्मेदारी यह है कि वह इसकी शिकायत पुलिस या किसी समाजसेवी संस्था को करे।
तीसरी लहर में बच्चों को बचाने के लिए सरकार को अभी से तैयारी करनी होगी।
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केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर करें काम
पिछले दिनों देखने में आया था कि ऑक्सीजन को लेकर कुछ राज्य सरकारों और केंद्र के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई थी। ऐसे में जरूरी हो गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें आपस के मतभेद भूलकर एक होकर 'टीम इंडिया ' की तरह काम करे।
बच्चों को कोरोना की संभावित लहर से बचाने के लिए जरूरी है कि केंद्र और राज्य सरकार समन्वय में काम करें जिसके बेहतर नतीजे आ सकते है। केंद्र और कई राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए कदम उठाएं हैं। ऐसे में जरूरी है कि वे 'एक शक्ति' के रूप में काम करें।
बच्चों को भी टीकाकरण अभियान से जोड़ा जाए
इस दिशा में सरकार ने कदम उठाया है। बच्चों पर टीके के ट्रायल शुरू हो गए हैं। अगर हम समय रहते बच्चों के टीकाकरण अभियान को शुरू कर देंगे तो कोरोना की बच्चों पर संभावित लहर पर काबू पाया जा सकता है।
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