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कोरोना की तीसरी लहर: आखिर कैसे सुरक्षित होंगे हमारे बच्चे? कितनी तैयार है सरकार?

सार

बच्चों पर कोरोना के खतरे को देखते हुए सरकार अलग से योजना बनाए। बच्चों पर कोरोना के संभावित खतरे को देखते हुए  योजनाबद्ध तरीके से चीजों को आगे बढ़ाए।

ऐसे स्थान जहां न अस्पताल हैं, न प्रशिक्षित बाल चिकित्सक, वहां बच्चों को कोरोना के कहर से बचाना सरकार का दायित्व होना चाहिए।

अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना और बच्चों को लेकर लोग गंभीर नहीं हैं।

सम्बंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर कोरोना और बच्चों को लेकर जनजागरण कार्यक्रम चलाना चाहिए।
 
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कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को खतरा है। - फोटो : iStock
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विस्तार
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देश में कोरोना के मामले लगातार कम हो रहे हैं। कई राज्यों ने बेहतर हुई स्थिति को देखते हुए अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन अभी कोरोना का खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। कई विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर आने की भी संभावना जताई है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि कोरोना की यह तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर सकती है।

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इधर, एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया का मानना है कि ऐसी संभावनाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसी बीच आयुष मंत्रालय द्वारा बच्चों पर कोरोना के खतरे को देखते हुए दिशानिर्देश जारी किया गया है। इन दिशानिर्देशों में बच्चों में कोरोना के लक्षण, बचाव और सावधानियों पर बात की गई है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि हम अपने बच्चों को कोरोना के खतरे से बचाने के लिए कितने तैयार हैं ?

केंद्र सरकार बच्चों के लिए बनाए नेशनल टास्क फाॅर्स
बच्चों पर कोरोना के खतरे को देखते हुए सरकार अलग से योजना बनाए। बच्चों पर कोरोना के संभावित खतरे को देखते हुए योजनाबद्ध तरीके से चीजों को आगे बढ़ाए। ऐसे स्थान जहां न अस्पताल हैं, न प्रशिक्षित बाल चिकित्सक, वहां बच्चों को कोरोना के कहर से बचाना सरकार का दायित्व होना चाहिए। अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना और बच्चों को लेकर लोग गंभीर नहीं हैं। सम्बंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर कोरोना और बच्चों को लेकर जनजागरण कार्यक्रम चलाना चाहिए।

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मसलन आज भी देश में ऐसे गांव हैं जहां लोग टीवी और इंटरनेट की दुनिया से दूर हैं। सरकारों के साथ मिलकर बच्चों के लिए ऑक्सीजनयुक्त अस्थायी अस्पताल बनाए जाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड कोविड केयर फंड को बिना देर किए स्थापित करे।

यह फंड नेशनल टास्क फाॅर्स द्वारा उपयोग में लाया जाए। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी भी एक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर बच्चों के लिए इस नेशनल टास्क फाॅर्स के गठन की पैरवी कर चुके हैं।

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बच्चों में कोरोना के लक्षण समझना होंगे और एहतियात बरतनी होगी। - फोटो : Pixabay

बाल श्रम की बेड़ियों से अबोध बच्चों को मुक्त कराना होगा
दुनिया ने 2025 तक बाल श्रम को मिटा लेने का प्रण लिया है। भारत भी इसके लिए कटिबद्ध है। लेकिन कोरोना का यह दौर चुनौती लिए खड़ा है। ऐसे में बच्चों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ वे मजदूरी कर अपने बचपन को खो रहे हैं तो दूसरी तरफ ऐसे बाल श्रमिकों पर कोरोना का खतरा ज्यादा है, क्योंकि यह बच्चे बाहरी दुनिया के संपर्क में ज्यादा आते हैं।

ऐसे में जरूरी हो गया है कि ऐसे बच्चों को चिन्हित कर सरकारी एजेंसियों और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा मुक्त कराया जाए, साथ ही उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह तभी संभव हो पाएगा जब लोग एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी समझने लगेंगे।  ऐसा इसलिए कि अभी भी बहुत से लोग बाल श्रमिक को किसी ढाबे, गैरेज या फैक्ट्री में काम करते हुए देखते हैं और भूल जाते हैं। जबकि उनकी नैतिक जिम्मेदारी यह है कि वह इसकी शिकायत पुलिस या किसी समाजसेवी संस्था को करे। 

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तीसरी लहर में बच्चों को बचाने के लिए सरकार को अभी से तैयारी करनी होगी। - फोटो : prayagraj

केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर करें काम
पिछले दिनों देखने में आया था कि ऑक्सीजन को लेकर कुछ राज्य सरकारों और केंद्र के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई थी। ऐसे में जरूरी हो गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें आपस के मतभेद भूलकर एक होकर 'टीम इंडिया ' की तरह काम करे।

बच्चों को कोरोना की संभावित लहर से बचाने के लिए जरूरी है कि केंद्र और राज्य सरकार समन्वय में काम करें जिसके बेहतर नतीजे आ सकते है। केंद्र और कई राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए कदम उठाएं हैं। ऐसे में जरूरी है कि वे 'एक शक्ति' के रूप में काम करें। 

बच्चों को भी टीकाकरण अभियान से जोड़ा जाए
इस दिशा में सरकार ने कदम उठाया है। बच्चों पर टीके के ट्रायल शुरू हो गए हैं। अगर हम समय रहते बच्चों के टीकाकरण अभियान को शुरू कर देंगे तो कोरोना की बच्चों पर संभावित लहर पर काबू पाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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