घर के काम के अलावा महिलाएं बाहर का भी काम संभाल रही हैं।
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चूंकि बच्चों और उनके पढ़ाई की सारी जिम्मेदारी माताओं पर थोप दी गई है इसलिए बच्चों की पढ़ाई इनके लिए सिर का दर्द बन चुकी है। घर का सारा काम निबटाकर बच्चों के साथ ऑनलाइन क्लास के समय बैठना, उनका होम वर्क करवाना, जो चीजें समझ में न आएं उसे समझाना बहुत ही चुनौती भरा काम है।
कई बार बच्चे पढ़ाई की जगह अन्य साइट देखने लगते हैं जिसपर ध्यान रखना होता है। इसके बाद भी एक्टिविटी और प्रोजेक्ट वर्क में काफी वक्त निकल जाता है। इसके साइड इफेक्ट भी सामने आने लगे हैं जैसे बच्चों में आंखों की समस्या का बढ़ना और उनका चिड़चिड़ा होना।
महिलाएं इन समस्याओं से परेशान हो रही हैं। कई महिलाओं की यह भी शिकायत रही है कि स्कूल प्रशासन अभिवावकों की बात नहीं सुन रहे और पैरेंट-टीचर मीटिंग से कतरा रहे हैं। कोचिंग और ट्यूशन का भी कोई विकल्प नहीं रह गया है ऐसे में लाख कोशिशों के बावजूद बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।
आजकल ज्यादातर लोग घर से ही काम कर रहे हैं, जिससे हम महिलाओं का काम कई गुना बढ़ गया है। हर वक्त अलर्ट रहना होता कि पति, बच्चे या घर के बुजुर्ग जो भी काम कर रहे हैं, उनकी जरूरतें पूरी होती रहें। उनके काम में किसी तरह की बाधा न पहुंचे।
इसके अलावा जो महिलाएं वर्क फ्राॅम होम कर रही हैं उनकी परेशानी और चुनौतियां कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी हैं। घर और बच्चों की सारी गतिविधियों को संभालते हुए काम करना एक अलग तरह की चुनौती है। इतनी व्यस्तता और तनाव में होने के बावजूद एक चीज जो महिलाओं को शायद जन्म से मिली है, वह है सकारात्मक और रचनात्मक सोच।
थोड़ा प्यार और अपनों का साथ हमें हर मुश्किल से लड़ने को तैयार कर देता है। इस महामारी ने एक मौका दिया है देश-दुनिया के पुरुषों को महिलाओं का खुले दिल से साथ दें। जिस तरह बाहर की दुनिया में महिलाओं ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। आज पुरुषों को भी महिलाओं के साथ खड़ा होने की जरूरत है। घर के अंदर की जिम्मेदारियों को मिलकर संभाल सकें, ऐसी सोच की जरूरत है, तभी यह साथ पूरा हो पाएगा।
लेखिका, भारतीय सामाजिक विज्ञान शोध परिषद (ICSSR) से संबद्ध हैं।
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