नेहरू जी ने तैयार किया था पहला घोषणापत्र
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भारत के समग्र विकास का खांका
नवें बिंदु में छोटे और लघु उद्योगों को कैसे सरकार को बढ़ावा देना चाहिए, इसके लिए रिसर्च की बात की, हैडलूम इंडस्ट्री को कैसे धागा मिले इसकी बात की गई। दसवें बिंदु में नेहरूजी ने ये साफ कर दिया कि उद्योगों के मामले में अहस्तक्षेप की नीति नहीं अपनाई जा सकती। कई देशों में इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है, लिखा कि ये वर्तमान में भारत के लिए बिलकुल अनुपयुक्त है, साथ ही ये भी साफ कर दिया कि कांग्रेस की बरसों पुरानी नीति रही है कि आधारभूत उद्योग राज्य के अपने और राज्य द्वारा ही संचालित हों।
मेनीफेस्टो में साफ कर दिया गया था कि अर्थव्यवस्था निजी और सरकारी, दोनों तरह की मिश्रित होगी। ग्यारह और बारहें बिदुओं में महंगाई और उस पर नियंत्रण को लेकर नीति स्पष्ट की गई। 13वें बिंदु में साइंटिफिक रिसर्च, खेती और बिजली के लिए नदी घाटियों को प्राथमिकता और आधारभूत उद्योगों पर जोर देने की बात की गई।
14वें, 15वें और 16वें बिंदुओं में आर्थिक असमानता दूर करने, ब्लैक मार्केटिंग पर लगाम लगाने, असामाजिक गतिविधियों, आर्थिक घपलों को रोकने, भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की बात तो की गई। सरकार के लिए कहा गया कि उसको मजदूरों के लिए हाउसिंग भी बढ़ानी चाहिए। 17वें बिंदु में रेलवे की सुविधाओं की बढ़ाने की बात की गई तो 18वें में प्रदेशों की ट्रांसपोर्ट सर्विस के राष्ट्रीयकरण की बात की गई।
नई शिक्षा निति पर तब भी था जोर
19वें बिंदु में भर्तियों की बात की गई और कहा गया कि भर्तियों में उच्चतम नैतिकता बरती जानी चाहिए, साथ ही लिखा कि जहां जरूरत हो उचित ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
20वें बिंदु में समाज में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बात की गई। 21वें बिंदु में शिक्षा और स्वास्थ्य की चर्चा की गई और डिग्री मैन्युल वर्क अनुभव के बाद देने पर ही जोर दिया गया। आपको मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति यहां नजर आएगी।
22वें बिंदु में महामारियों पर नियंत्रण की बात हुई और केवल मलेरिया पर नियंत्रण का जिक्र हुआ। 23वें बिंदु में गांधीजी का जिक्र करके एससी, एसटी और पिछड़ा वर्ग के उत्थान की बात की गई। 24 वें बिंदु में उस वक्त के राज्यों के वर्गीकरण ए, बी, सी में सभी में कानूनी व्यवस्था एक जैसी करने को लेकर जिक्र किया गया।
25वें बिदु में पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों पर चिंता जताई गई और उनके पुनर्वास की बात की गई, ये कहा गया कि इस साल इन पर सरकार 140 करोड़ रुपया खर्च करेगी।
महिला और आर्थिक सुधार को किया रेखांकित
26वें बिंदु में ये कहा गया कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है, इसलिए सबको बराबर अधिकार हैं। 27वें बिंदु में भारत में महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने को कहा गया। 28वें बिंदु में भाषाई आधार पर नए राज्यों के गठन और आयोग बनाने की बात की गई।
29वें बिंदु में ही स्वतंत्र विदेश नीति की बात करना और उसी में कश्मीर मसले का समाधान कश्मीरियों की राय के मुताबिक ही करने का ऐलान करना, थोड़ा अजीब था। आखिरी बिंदु में दुनिया भर में होने वाले संकटों से भारत को बचाने के लिए भारत की भूमिका शांतिपूर्ण दिशा में रखने को कहा गया.
इसको पढ़कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे शरणार्थी, खाद्यान्न समस्या, मलेरिया, हस्तक्षेप की नीति, पशु संरक्षण, जमींदारी व्यवस्था आदि की जिक्र कमोवेश चुनावी घोषणा-पत्रों से खत्म सा हो चला है। गौर से इसको पूरा पढ़ेंगे तो पाएंगे कि ये लुभावने वायदों के बजाय आजकल प्रचलित संकल्प पत्र और शपथ पत्र जैसा नजर आता है, क्योंकि उनको ये बखूबी पता था कि कांग्रेस के मुकाबले कोई नहीं है।