इन रहस्यों को जानना और मानव कल्याण के लिए उनका उपयोग करना ही विज्ञान का सच्चा धर्म है। इस बार समूचे देश ने मिशन चंद्रयान की सफलता की कामना की। गनीमत रही कि किसी ने चंद्रयान के चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने को लेकर आशंका का धुआं उड़ाने की हिमाकत नहीं की।
लिहाजा वैज्ञानिक पूरे मनोयोग से अपना लक्ष्य प्राप्त कर सके। चंद्रयान-3 की कामयाबी में राजनीतिक चांदनी भी महसूस की गई। यह इस मायने में सही है कि आज देश का नेतृत्व जिनके हाथों में है, उनका संकल्प और योगदान तो है ही, लेकिन सफलता का पहला श्रेय तो हमारे उन वैज्ञानिकों को है, जो जी जान से इस मिशन में लगे रहे और उनमें से ज्यादातर को ये देश उतना भी नहीं जानता जितना सोशल मीडिया पर बेहूदा डांस या कमेंट करने वालों को जानता है। यह इस देश की नाकामी है।
चंद्रयान के लिए अगले 14 दिन काफी महत्वपूर्ण हैं। चांद की धरती को चूमना ही काफी नहीं है, उसके आगे विक्रम और प्रज्ञान को काफी काम करना है। यकीनन हम चांद को देखकर खुश होते हैं, पर चांद इन विज्ञान यांत्रिकों को देखकर कौतूहल के साथ मुस्कुरा रहा होगा।
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