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स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ: आजादी के 74 वर्ष बाद कैसी है भारतीय अर्थव्यवस्था?

सार

भारत अपनी आजादी का 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इन 75 सालों में भारत ने हर मोर्चे पर विकास किया है। भारत आज दुनिया की बड़ी आर्थिक महाशक्तियों में से एक है।

स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली में ऐसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी बता रहे हैं आजादी के 74 साल बाद कैसी है भारत की अर्थव्यवस्था.. 

 

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1951 में शुरू की गई भारत की पहली पंचवर्षीय योजना, मुख्य रूप से कृषि, मूल्य स्थिरता, बिजली और परिवहन पर केंद्रित थी। - फोटो : istock
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विस्तार
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15 अगस्त 1947, पूरे देश द्वारा मनाया जाने वाला एक दिन और एक संघर्ष के अंत का प्रतीक नहीं था, बल्कि पूरे देश के अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण की शुरुआत थी। इस वर्ष हम एक स्वतंत्र राष्ट्र होने के 74 गौरवशाली वर्षों को पूरा कर रहे हैं। 1947 में भारत की स्वतंत्रता उसके आर्थिक इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ था। अंग्रेजों द्वारा किए गए विभिन्न हमलों और विमुद्रीकरण के कारण, देश बुरी तरह से गरीब और आर्थिक रूप से ध्वस्त हो गया था।

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दरअसल, यह पंडित नेहरू की रणनीति थी कि भारत को शीत युद्ध के दौरान दोनों ओर से बड़ी मदद मिली। सोवियत संघ और पूर्वी यूरोप ने वस्तुओं और तकनीकी सहायता में लगभग उतना ही योगदान किया जितना कि संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और पश्चिम जर्मनी ने किया था।

1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बावजूद, भारतीय राजनीति के सभी नेता चिंतित थे कि व्यापार और निवेश के माध्यम से विदेशी शासन आर्थिक नियंत्रण के बहाने वापसी करेगा।
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ऐसी स्थिति को रोकने के लिए, भारत ने आर्थिक स्वतंत्रता को अपनाया और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पंचवर्षीय योजनाओं को तैयार करने के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में काम किया। पंचवर्षीय योजनाएं राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास की पहल थी जो यूएसएसआर में मौजूद लोगों के साथ तैयार की गई थी। 


पंचवर्षीय योजना और भारत 

1951 में शुरू की गई भारत की पहली पंचवर्षीय योजना, मुख्य रूप से कृषि, मूल्य स्थिरता, बिजली और परिवहन पर केंद्रित थी। यह हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित था जिसने बचत और निवेश में वृद्धि के माध्यम से भारत की आर्थिक वृद्धि को गति दी। यह योजना सफल रही  जिसने अर्थव्यवस्था को 3.6% की वार्षिक दर प्रदान की और 2.1% के लक्ष्य को भी पार कर गई। दूसरी पंचवर्षीय योजना ने तेजी से औद्योगिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया और इस योजना ने एक तरह से आत्मनिर्भरता की नींव रखी।
 

जून 1964 को श्री लाल बहादुर शास्त्री ने पंडित नेहरू के बाद हरित क्रांति और श्वेत क्रांति को प्रोत्साहन दिया। चीन के साथ युद्ध ने भोजन की कमी और बढ़ती कीमत को जन्म दिया था और उसे आश्वस्त करने के लिए भारत को कृषि पर ध्यान केंद्रित करने और निजी उद्यमों व विदेशी निवेशों के लिए अनुमति देने की आवश्यकता थी।


हरित क्रांति के परिणामस्वरूप 1978/79 में 131 मिलियन टन का रिकॉर्ड अनाज उत्पादन हुआ। इसने भारत को दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादकों में से एक के रूप में स्थापित किया था। शास्त्री जी ने अपने कार्यकाल में यह भी तय किया कि भारत के पास चाय व रबर और इंजीनियरिंग उत्पादों तथा  कृषि वस्तुओं का निर्यात शुरू करने के लिए पूंजी और क्षमता दोनों हैं।

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हरित क्रांति के परिणामस्वरूप 1978/79 में 131 मिलियन टन का रिकॉर्ड अनाज उत्पादन हुआ। इसने भारत को दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादकों में से एक के रूप में स्थापित किया था। - फोटो : istock

आजादी के बाद अर्थव्यवस्था 

1960 का दशक भारत के लिए विभिन्न आर्थिक चुनौतियों का एक दशक था। रुपये के अवमूल्यन ने सामान्य रूप से कीमतें बढ़ाई दी थीं। 19 जुलाई, 1969 को तत्कालीन प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश के 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला किया, जिसका मुख्य उद्देश्य अकेले बड़े व्यवसायों के विपरीत बैंकों द्वारा कृषि क्षेत्र को दिए गए ऋण को बढ़ाना था।
 
जब पी.वी. नरसिम्हा राव ने 1991 में प्रधान मंत्री के रूप में पदभार संभाला तब  उन्होंने एक नई औद्योगिक नीति की घोषणा की जिसने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण पर जोर दिया, जिससे भारत की विकास दर, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की आधारभूत  संरचना पर ध्यान दिया व स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को हाईवे नेटवर्क से जोड़ा वहीँ गावों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से शहर व ग्रामीण अर्थव्वस्था को मजबूत किया। 

अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान देश में निजीकरण को उस रफ़्तार तक बढ़ाया गया जहां से वापसी की कोई गुंजाइश नहीं बची. अटल जी ने 1999 में अपनी सरकार में विनिवेश मंत्रालय के तौर पर एक अनोखा मंत्रालय का गठन किया व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया।
 
"आर्थिक प्रगति के एक नए युग की शुरुआत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना आयोग की जगह नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) का गठन किया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की शुरुवात की।
 
जीएसटी भारत को उन कुछ देशों में से एक बनाता है जिनके पास कर कानून है जो विभिन्न केंद्रीय और राज्यों के कर कानूनों को एकजुट करता है, सरकार ने समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए औद्योगिक कॉरिडोर की स्थापना कर रही है। 


सड़कें तरक्की का रास्ता 

भाग्य की रेखाओं की तरह सड़कें तरक्की का रास्ता होती हैं। देश में पहली बार प्रतिदिन 37 किमी नेशनल हाईवे 6 से 12 लेन के बनाये जा रहे। आम आदमी के लिए हवाई यात्रा को और अधिक किफायती बनाने के लिए “उड़ान योजना” अक्टूबर 2016 में शुरू की गई है। 5जी से जहां संचारक्रांति आई वहीं इसरो ने एक साथ 100 से ज़्यादा उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड मोदी सरकार के कार्यकाल में ही बनाया है। 

देश अब बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर से ‘मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर’ की और बढ़ चुका है। 2014 और 2021 के बीच बहुत कुछ बदल गया है। लाल फीताशाही पद्धति को बदलते हुए पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रमों की प्रगति की निगरानी और समीक्षा करते हैं। आज भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जा रहा है।

आज विश्व भारत को अग्रणी राष्ट्र एक संभावित महाशक्ति के रूप में देखता है। भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर अग्रसर है और एक उभरती हुई वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए हर दिन कड़ी मेहनत कर रहा है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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