झांसी। नगर के कई इलाकों में लोगों को भीषण पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि अधिकांश टंकियों से एक बार ही संबंधित क्षेत्रों में जलापूर्ति हो पा रही है। वहीं, जल संस्थान की तेरह में चार पानी की टंकियों से रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इन टंकियों में पिछले कई वर्षों से लीकेज हैं, लेकिन इन्हें दुरुस्त कराने की सुध नहीं ली गई है, जिससे लगातार पानी बर्बाद हो रहा है।
महानगर में बबीना जल शोधन केंद्र से आने वाले पानी को पहले अलग- अलग स्थानों पर स्थापित सीडब्लूआर (स्वच्छ जलाशय) के पास स्थापित जोनल पंपिंग स्टेशन के माध्यम से ओवर हैड टैंक (पानी की टंकी) को भरा जाता है। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति की जाती है। इन दिनों झांसी शहर में बनी दरीगरान (पंचवटी) टंकी (क्षमता 1600 किलोलीटर) से संबंधित क्षेत्रों को 24 घंटे में मात्र एक बार जलापूर्ति की जा रही है। खंडेराव गेट तहसील पर बनी 1500- 1500 किलोलीटर क्षमता की दो टंकियों से दो बार जलापूर्ति की जा रही है।
हालांकि, पर्याप्त पानी के अभाव में टंकियां पूरी नहीं भरतीं हैं। नतीजतन, 30 से 40 मिनट ही लोगों को पानी की आपूर्ति हो पाती है। तालपुरा टंकी व सागरगेट टंकी (1800- 1800 किलोलीटर) से सुबह- शाम, खुशीपुरा टंकी (1600 किलोलीटर) से सुबह- शाम आपूर्ति की जाती है। इसी तरह, सिविल लाइन टंकी (450 किलोलीटर), सीपरी बाजार टंकी (900 किलोलीटर), आयुर्वेद टंकी (2500 किलोलीटर), खाती बाबा टंकी (2500 किलोलीटर), नगरा व पुलिया नंबर पर बनी टंकियों से (450- 450 किलोलीटर) व नरसिंह राव टौरिया पर बनी टंकी (800 किलोलीटर) से भी सुबह- शाम पानी की सप्लाई की जा रही है।
गर्मी में जहां अधिकांश टंकियों से एक समय भी जलापूर्ति करना संभव नहीं हो पा रहा है, तो वहीं तहसील, सागर गेट, मसीहागंज व नरसिंह राव टौरिया टंकियों की आउट गोईंग पाइप सप्लाई में लीकेज से हजारों लीटर पानी प्रतिदिन बेकार होकर बह गया है। यहां लगे कई वाल्व भी लीक कर रहे हैं। कई बार शिकायतों के बाद भी मरम्मत का काम नहीं हो सका है।
‘जल निगम ने टंकियों का निर्माण किया था। उनको ही मरम्मत का काम करना है। इस संबंध में कई बार जल निगम अधिकारियों को पत्र लिखा चुका है। मगर, मरम्मत काम उनके द्वारा नहीं किया गया।’
आर एस यादव
अधिशासी अभियंता जल संस्थान।
सार्वजनिक शौचालय बन सकता है परेशानी का कारण
खंडेराव गेट तहसील पर स्थित पानी की टंकी (जोनल पंप हाउस) की दीवार के बगले से ही नगर निगम सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करा रहा है। चूंकि, जोनल पंप हाउस जमीन से करीब पंद्रह फीट नीचे बना है और हर बरसात में जलस्तर बढ़ने पर पंप हाउस में पानी भर जाता है। आसपास के लोगों को शंका है कि शौचालय के टैंक की गंदगी जोनल पंप हाउस में न आने लगे। स्थानीय लोग शौचालय बनने का विरोध भी कर रहे हैं।