यूपी में संगठित अपराध रोकने के लिए योगी सरकार ने महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (यूपीकोका) लागू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यूपीकोका विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। विधानमंडल के बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में विधेयक को पेश किया जाएगा।
अवैध कब्जे व खनन के आरोपी भी होंगे दायरे में, 28 प्रावधान गैंगस्टर एक्ट से अलग
आतंकवाद, हवाला, अवैध शराब कारोबार, बाहुबल से ठेके हथियाने, फिरौती के लिए अपहरण, अवैध खनन, वन उपज के गैरकानूनी ढंग से दोहन, वन्यजीवों की तस्करी, नकली दवाओं के निर्माण या बिक्री, सरकारी व गैरसरकारी संपत्ति को कब्जाने और रंगदारी या गुंडा टैक्स वसूलने सरीखे संगठित अपराधों में यूपीकोका लागू किया जाएगा। इसमें 28 प्रावधान ऐसे होंगे, जो गैंगस्टर एक्ट में नहीं हैं।
मनमानी नहीं होगी
- अभियोग कमिश्नर और रेंज के डीआईजी की दो सदस्यीय समिति के अनुमोदन के बाद ही पंजीकृत होगा।
- अभियोग की विवेचना के बाद आरोप पत्र जारी जारी करने से पहले रेंज के आईजी की अनुमति अनिवार्य।
सजा-ए-मौत तक संभव
कम से कम सात साल कैद व 15 लाख रुपये का जुर्माना। अधिकतम सजा-ए-मौत व 25 लाख का जुर्माना।
कार्रवाई के खिलाफ अपीलीय प्राधिकरण में जा सकेंगे
यूपी कोका के तहत उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अपीलीय प्राधिकरण का गठन होगा। अगर किसी को गलत फंसाया गया तो वह कार्रवाई के खिलाफ प्राधिकरण में अपील कर सकेगा। पर, आरोपी को खुद अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी।