अक्सर विवादों में रहने वाला बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला दीक्षांत समारोह से जुड़ा है। दीक्षांत समारोह से दो दिन पहले विश्वविद्यालय के दो मेडलिस्टों ने कुलपति प्रो. आरसी सोबती पर दलित छात्रों का उत्पीड़न और गलत व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मेडल लेने से इंकार कर दिया है। इन विद्यार्थियों ने दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिएं अपना रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया है। बता दें कि दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविद होंगे।
विश्वविद्यालय के छात्र, साल 2016 के पास आउट व एमफिल मैनेजमेंट के गोल्ड मेडलिस्ट सुधाकर पुष्कर ने आरोप लगाया कि दलित विद्यार्थियों-अधिकारियों के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा कि मुझे कुलपति प्रो. आरसी सोबती के हाथों मेडल लेना ही नहीं है इसलिए मैंने दीक्षांत में शामिल होने के लिए आवेदन नहीं किया है। सुधाकर ने कहा कि मेरी अपेक्षा है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविद हमारी बात सुने कि इतने बड़े पद पर बैठा व्यक्ति विद्यार्थियों से लड़ रहा है।
दलित छात्रों का उत्पीड़न सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि हमने उनकी नीतियो के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई है। क्या विद्यार्थियों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है? सुधाकर ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन एससी/एसटी कैटेगरी के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देना चाहता। कोर्ट से इस पर निर्णय हुआ तो सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने की बात करते हैं। उनकी नीतियां दलित विरोधी हैं इसलिए मैंने उनके हाथ से सम्मान नहीं लेने का निर्णय लिया है।