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ग्रैप के तीसरे और चौथे चरण में कड़े प्रतिबंध, संशोधित समय-सारणी मंजूर

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बहादुरगढ़। वायु प्रदूषण बढ़ने पर लागू होने वाले संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) में तीसरे और चौथे चरण के प्रतिबंध पहले की तुलना में सख्त किए गए हैं। अब दिल्ली में बीएस-4 और इससे नीचे के मानकों वाले मालवाहक वाहनों को आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई के नाम पर भी छूट नहीं मिलेगी। साथ ही दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-4 और इससे नीचे के डीजल चालित हल्के व मध्यम मालवाहक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक रहेगी। खास बात यह है कि बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल या इससे नीचे के हल्के मोटर वाहनों पर प्रतिबंध अब सोनीपत में भी लागू होगा। इससे पहले यह व्यवस्था गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में लागू थी।
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केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई 30वीं पूर्ण आयोग बैठक में एनसीआर के लिए संशोधित ग्रैप समय-सारणी को मंजूरी दी गई। संशोधित व्यवस्था में चारों चरणों में कुल 48 कार्रवाई निर्धारित की गई हैं। इनमें पहले चरण में 25, दूसरे में आठ, तीसरे में 10 और चौथे चरण में पांच कार्रवाई शामिल हैं।

तीसरे चरण में अब गड्ढों की मरम्मत जैसे जरूरी कार्यों को सीमित राहत दी गई है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अन्य प्रतिबंध जारी रहेंगे। तीसरे चरण में दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-4 और इससे नीचे के डीजल चालित हल्के व मध्यम मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक होगी। चौथे चरण में मालवाहक वाहनों पर और कड़े प्रतिबंध लागू होंगे। आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाले पुराने वाहनों को भी पहले जैसी छूट नहीं मिलेगी।
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पहले चरण से ही डीजल जनरेटर पर कार्रवाई
संशोधित ग्रैप में डीजल जनरेटर सेट से संबंधित कार्रवाई को दूसरे चरण से हटाकर पहले चरण में शामिल किया गया है। इसी तरह एनसीआर और आसपास के राज्यों से आने वाली बीएस-4 और इससे नीचे की श्रेणी की बसों के प्रवेश से संबंधित कार्रवाई भी पहले चरण में लागू होगी। धूल नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन और परिवहन से जुड़ी दोहराई जाने वाली कार्रवाई को भी पहले चरण में एकीकृत किया गया है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर चार चरण
ग्रैप के तहत दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर चार चरण निर्धारित हैं। चरण-1 में सूचकांक 201 से 300 तक रहने पर खराब, चरण-2 में 301 से 400 तक बहुत खराब, चरण-3 में 401 से 450 तक गंभीर और चरण-4 में 450 से अधिक होने पर अति गंभीर श्रेणी मानी जाती है। किसी नए चरण के लागू होने पर पहले के चरणों की कार्रवाई भी जारी रहती है।

निर्माण स्थलों की निगरानी का दायरा बढ़ेगा
आयोग ने निर्माण एवं विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण की निगरानी के लिए वेब पोर्टल पर पंजीकरण का दायरा भी बढ़ाया है। अब नगर निकायों की सीमा से बाहर शहरी, नियंत्रित, विकास, औद्योगिक और राजमार्ग गलियारा क्षेत्रों में आने वाली पात्र परियोजनाएं भी निगरानी में शामिल होंगी। 500 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल की मौजूदा सीमा और अन्य शर्तें यथावत रहेंगी। सीएक्यूएम के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने बताया कि नए प्रतिबंध ग्रैप के विभिन्न चरणों के हिसाब से लागू होंगे।
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