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दूसरे दिन भी शिक्षामित्रों ने किया हंगामा, लगाया जाम

Fri, 28 Jul 2017 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
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shiksha mitra on agitation - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 24 घंटे बीत चुके है लेकिन शिक्षामित्रों का गुस्सा थमने के बजाए हर घंटे उफान मार रहा है। गुरुवाह सुबह के 9 बजने तक बीएसए कार्यालय एक बार फिर शिक्षामित्रों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय में सांकेतिक तालाबंदी कर विरोध दर्ज कराया। सीओ सिटी स्वतंत्र सिंह जैसे ही पुलिस बल के साथ आगे बढ़े तो शिक्षामित्र गेट का ताला खोलकर धरने पर बैठ गए। सूर्य की तपिश व भीषण उमस के बीच प्रदर्शनकारी शिक्षामित्र पसीना से तर बतर होकर हक की आवाज बुलंद करते रहे। शाम के करीब 3 बजे तक शिक्षामित्रों का हुजूम बीएसए में नारेबाजी कर सरकार से रोजी रोटी की मांग में अड़े रहे।
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दूसरे दिन उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर शिक्षक संघ समेत अन्य शिक्षक संगठन शिक्षामित्रों के साथ मंच साझा कर प्रदर्शन को धार देते हुए सरकार से हित में फैसला करने की मांग की। दोपहर बाद बीएसए कार्यालय पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट राम प्रसाद को सीएम को प्रेषित ज्ञापन देकर भविष्य की दुहाई लगाई। शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन के दौरान सरकार की तरफ से उचित फैसला न आने तक शिक्षण कार्य से बहिष्कार को दोहराया है। साथ ही जल्द स्कूलों में तालाबंदी की चेतावनी भी दी। प्रदर्शन की अगुवाई दीपनारायण त्रिपाठी, राकेश बाजपेई, कुलदीप शुक्ल, रेखा सिंह, अजय प्रताप सिंह, संतोष द्विवेदी कर रहे थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष ब्रजेश पांडेय, कोषाध्यक्ष संजीव शंखवार, शिक्षक नेता सत्यदेव सिंह, संजय सिंह, विवेक तिवारी भी शामिल रहे।

सूर्य की तपिश व उमस से शिक्षामित्र भले ही बेहाल हुए जा रहे थे लेकिन भविष्य रूपी  मैदान में पूरे जोश के साथ डटे रहे। करीब 2 बजे भीषण उमस के बीच हल्की बारिश शुरू हुई। बारिश की फुहारों में पुलिस कर्मी व शिक्षक नेता बीएसए भवन व पेड़ों की छांव तलाशने लगे। जबकि शिक्षामित्र भीगते हुए हक की आवाज बुलंद करते रहे।
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समायोजन रद्द होने से शिक्षामित्रों में सनसनी फैल गई है। सालों के संघर्ष व पुलिस की लाठियां खाने के बाद शिक्षामित्र से सहायक शिक्षक बने चेहरों को कुछ समझ नहीं आ रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षामित्र सरकार से हक मांगने के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आखिर परिणाम क्या होगा। इसका सच तलाशने में दूसरे दिन भी खासतौर पर जुटे रहे। दूसरे दिन भी बीएसए में मौजूद कई महिला शिक्षामित्रों की आंखें आंसुओं में डूबी हुई थी। उम्मीद की सिसकियों सभी के दिलों को कसोट रहीं थी।


शाम करीब सवा तीन बजे बीएसए कार्यालय से धरना प्रदर्शन मेें शामिल होकर लौट रहे शिक्षामित्रों के हुजूम ने कलक्ट्रेट के सामने पहुंचते ही नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान सरकार से नौकरी की यथावत मांग के बीच विरोध के नारे भी गूंजे। कुछ दूर चलने के बाद शिक्षामित्र एसपी आफिस के पहले सड़क पर बैठ गए। जिससे दोनों तरफ जाम लग गया। जाम लगते ही प्रशासन में अफरा तफरी मच गई। शिक्षामित्रों के व्यवहार पर सुबह से संयम रखे पुलिस अधिकारी उपद्रव पर अपने को रोक नहीं सके। लाठी लेकर जैसे ही आगे बढ़े तो शिक्षामित्र मौके की नजाकत को भांप इधर उधर होने लगे। एक बार फिर अधिकारियों ने गुस्से पर काबू पाते हुए सड़क पर लाठी पटक शिक्षामित्रों को तितर बितर कर सुरक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ न करने की चेतावनी दी। पुलिस का सख्त रुख देख शिक्षामित्र टुकड़ों में बंटकर निकल गए। शाम करीब पांच बजे के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।

बांगरमऊ (ब्यूरो)। जिले के हर कोने में शिक्षामित्रों का गुस्सा उबाल पर है। लंबी लड़ाई के बाद सहायक शिक्षक बने अधिकांश शिक्षामित्रों की उम्मीद लगभग बिखरने की कगार पर है। जिसकी कसक शिक्षामित्रों के दिलों में खूब कसोट रही है। शिक्षामित्रों का प्रदर्शन जिला स्तरीय होने के साथ ही ब्लाक स्तर पर भी शुरू हो गया है। दूसरे दिन बांगरमऊ के शिक्षामित्रों ने कस्बे में प्रदर्शन कर सीएम का पुतला फूंक कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस दौरान  शिक्षामित्र देवेंद्र सिंह, रमेश द्विवेदी, ठाकुर प्रसाद, संजय शुक्ला, सुधीर कुमार गुप्ता, जितेंद्र मिश्र, रामजी, रुकमणि यादव, सुनीता देवी, मुन्ना सिंंह भी मौजूद रहे।
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