नोटबंदी की वजह से बैंकों में बढ़ी भीड़ से अन्य बैंकिंग के कम भी प्रभावित हो रहे हैं। जिससे भी उपभोक्ताओं को परेशानियां उठानी पड़ रही है। कैश खत्म होने के साथ ही कई बैंक शाखाओं में शटर गिरा दिए जाते हैं और उपभोक्ताओं को निराश होकर लौटना पड़ता है। ऐसे ही नजारा वर्कशाप की मेन गेट स्थित बैंक शाखा में देखने को मिला।
यहां स्थित शाखा में सुबह से ही गेट बंद कर दिया और उपभोक्ताओं को अन्य कार्यों करवाने में भी परेशानियां उठानी पड़ी। रेलवे कालोनी निवासी मुकुल ने बताया कि उसे 22 हजार रुपये की एनईएफटी करवानी थी। बैंक शाखा पहुंचा तो देखा कि गेट बंद था। उसने बैंक स्टॉफ से बंद करनी चाहिए, लेकिन उसे अंदर ही नहीं आने दिया गया। जिस वजह से वह एनईएफटी भी नहीं करवाया पाया। उन्होंने बताया कि बैंक शाखा में सुबह से ही गेट नहीं खोला गया, जिससे भी अन्य उपभोक्ताओं को परेशानियां उठानी पड़ी।
वर्किंग हॉवर में बैंक शाखा तो खुलना चाहिए था:
वर्कशाप के मेन गेट स्थित शाखा न खुलने से उपभोक्ता बाहर ही खड़े रहे। बैंक में आए उपभोक्ता सुरेंद्र सिंह व राजबीर ने बताया कि कैश नहीं थी, लेकिन उपभोक्ताओं को अंदर भी नहीं आने दिया गया। उन्होंने पूछा तो बताया कि बैंक में कैश नहीं है। फिर कहा गया कि सरवर भी डाउन है, जबकि उन्होंने बैंक में सिर्फ चैक लगाना था। चेक लगाने के लिए सरवर की जरूरत भी नहीं पड़ती। ऐसे ही परेशानी कई अन्य उपभोक्ताओं को उठानी पड़ी।
उधर, रादौर रोड स्थित सिंडिकेट बैंक में करीब डेढ़ घंटे तक सरवर डाउन की समस्या रही, जिससे लोगों को परेशानियां उठानी पड़ी। बैंक सुबह 10 बजे से खुला, लेकिन सरवर डाउन हो गया। ऐसे में बैंक में कामकाज नहीं हो पाया और उपभोक्ताओं की लाइन और लंबी हो गई। साढ़े 11 बजे सरवर ठीक होने पर शाखा में काम शुरू हुआ और उपभोक्ताओं को पेमेंट दी गई। शाखा में पेंशन के लिए अलग लाइन बनाई गई, जिससे सीनियर सिटीजन को भी राहत रही।
पास बुक पर चिप नहीं लग रही: रमेश
कैंप निवासी रमेश मालवीय का कहना है कि उसने 11 नवंबर का पैसे जमा करवा थे। उसकी पास बुक पर चिप नहीं है। ऐसे में वह पास बुक की एंट्री भी नहीं करवा पा रहा है। वह बैंक में जाता है, लेकिन उसे टरका दिया जाता है। ऐेसे में उसे परेशानी का सामना करना पड़ा है, मगर उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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कई चक्कर लगाने के बाद मिला कैश: हनीफ
पुराना हमीदा निवासी मोहम्मद हनीफ ने बताया कि शुक्रवार को आठ बजे आया था, लेकिन पैसे नहीं मिले। इससे पहले भी बैंक के चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन पैसे नहीं मिल रहे थे। शनिवार को चार घंटे लाइन में लगने के बाद दस हजार रुपये मिले हैं। जिससे कुछ दिन का काम चल जाएगा।
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भात लेकर जाना है: राजेश कुमार
ममीदी गांव निवासी राजेश कुमार ने बताया कि भात लेकर यूपी जाना है, जिसके लिए छह हजार रुपयेन की जरुरत है। शुक्रवार को भी बैंक में आया था, मगर अंदर ही नहीं जा पाया। ऐसे में शनिवार को सुबह दस बजे आकर बैंक की लाइन में लगना पड़ा। इससे पहले भी बैंक में कई चक्कर लगा चुका हूं, मगर हर बार ऐसे ही जान पड़ता है।
अढ़ाई सौ रुपये किराए पर ही खर्च कर दिए: कौशल्या
लाजपत नगर निवासी कौशल्या ने बताया कि उसके पति शंकर साहनी आंखों से देख नहीं सकते हैं। वे चल फिर भी नहीं सकते हैं। उन्हें सरकार की ओर से 14 सौ रुपये मिलती है, जिसमें अढ़ाई सौ रुपये आने-जाने के किराए पर ही खर्च हो गए। कौशल्या ने बताया कि शुक्रवार को सौ रुपये किराए पर रिक्शा करके आए थे, मगर पेंशन नहीं मिली। शनिवार को डेढ़ सौ रुपये किराये पर रिक्शा करके आए हैं। बस, राहत की बात ये हैं कि शनिवार को पेंशन मिल गई।