हर बार चुनाव के दौरान महानगर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए जनप्रतिनिधि वादा करते हैं, लेकिन इस समस्या से छुटकारा नहीं मिला। प्रशासन ने भी प्रमुख बाजार और सड़कों पर लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए। शहर के एकमात्र इलाइट चौराहे पर ही ट्रैफिक व्यवस्था के लिए प्रबंध हैं। यहां के अलावा कहीं पर भी इलेक्ट्रिक सिगनल और यातायात पुलिस के समुचित इंतजाम नहीं हैं।
चुनाव आते ही प्रत्याशी जनता से सभी समस्याओं का निदान करने का दावा करते हैं। इसके बाद पांच साल तक के लिए उन वादों को भूल जाते हैं। आम लोग रोज इन समस्याओं से जूझते रहते हैं। चुनावी मौसम में जाम की समस्या प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। जगह-जगह जाम होने से लोग परेशान हैं। बाजारों में भारी वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित न होना और हाथ ठेले वालों की बेरोकटोक आवाजाही से दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। व्यापारियों ने बताया कि इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई निदान नहीं हुआ। व्यापारियों के लिए जाम की समस्या ही चुनावी मुद्दा होगी।
ये हैं समस्याएं
- प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल नहीं।
- बाजारों और चौराहों पर ट्रैफिक सिपाहियों की तैनाती न होना।
- बाजारों में वन-वे व्यवस्था नहीं।
- बाजारों के आसपास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।
- लोडिंग वाहनों का बाजार में प्रवेश प्रतिबंधित नहीं।
- ऑटो के लिए स्टैंड और स्टापेज न होना।
इन जगहों पर फंसते हैं राहगीर
बस स्टैंड, सीपरी ओवरब्रिज के नीचे, बड़ा बाजार, मानिक चौक, सुभाष गंज, न्यू रोड, गोविंद चौराहा, कचहरी चौराहा, सीपरी स्थित कच्चे पुल के पास, जीवनशाह चौराहा, पंचकुंइया, सराफा बाजार, दतिया गेट अंदर, मेडिकल कॉलेज।
फोटो
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पैदल चलना मुश्किल
बाजारों में इतना जाम रहता है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बाजार जाने के लिए दो घंटे पहले निकलना पड़ता है। जाम से निजात दिलाने के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है। - मंजूलता, ग्रहणी, गुमनावारा
बेरोकटोक आते-जाते हैं वाहन
मानिक चौक बाजार में जाम से जाने से भी डर लगता है। मजबूरी में जाना ही पड़ता है। हाथ ठेला और ऑटो वालों पर कोई रोकटोक न होने से समस्या होती है। - नेहा दीक्षित, ग्रहणी, गुमनावारा
समस्या का नहीं हुआ समाधान
कई बार नगर निगम में पार्किंग की व्यवस्था करने के लिए ज्ञापन दे चुके हैं। कोई कदम ही नहीं उठाया गया। पार्किंग की व्यवस्था हो जाए तो जाम से छुटकारा मिल सकता है। - गोपाल कंचन, व्यापारी, मानिक चौक
विश्वविद्यालय जाने में होती है देरी
जाम से कई बार विश्वविद्यालय जाने में भी देर हो जाती है। जीवनशाह चौराहे से कचहरी चौराहे तक जाम की बुरी स्थिति रहती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - श्यामजी, छात्र, थापक बाग
चुनाव का मुद्दा बने जाम
आए दिन जाम की समस्या से दो चार होना पड़ता है। जनप्रतिनिधि चुनाव के समय समस्याओं का निदान दिलाने का भरोसा दिलाते हैं। बाद में सबकुछ भूल जाते हैं। चुनाव का मुद्दा जाम की समस्या होनी चाहिए। - दिलीप, व्यापारी मानिक चौक
उठाए जाएं जरूरी कदम
जाम से हर शहरवासी परेशान है। इसके लिए जल्द ही जरूरी कदम उठाने चाहिए। प्रत्याशियों को इस ओर पहल कर जनता को राहत दिलाने के लिए प्रयास करना चाहिए। - अरुण कुमार, मानिक चौक
वर्जन
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पार्किंग के लिए जमीन नहीं
बाजारों के आसपास नगर निगम की जमीन न होने के कारण शहर में हर जगह पार्किंग नहीं बनाई गई है। व्यापारी जगह चिन्हित करें नगर निगम पार्किंग बनाने के लिए तैयार है।- किरन वर्मा, महापौर
स्टाफ की कमी बनी वजह
बाजारों में सकरी गलियां होने के कारण जाम लग जाता है। स्टाफ की भी कमी है। इस कारण हर जगह पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं हो पाती है। मुख्य जगहों पर तैनात किए जाते हैं।- सुभाषचंद्र यादव, यातायात उप निरीक्षक
घने बाजारों ने मुसीबत बढ़ाई
बाजार घने होने के कारण जाम की समस्या रहती है। व्यापारियों और प्रशासन के साथ मिलकर शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।- रवि शर्मा, भाजपा प्रत्याशी
होगी पार्किंग की व्यवस्था
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैये से लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। चुनाव बाद हर बाजार में पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। - सीताराम कुशवाहा, बसपा प्रत्याशी
मार्डन ट्रांसपोर्ट सिस्टम लागू हो
शहर के लिए मार्डन ट्रांसपोर्ट सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। इससे बाजारों में भारी वाहनों का प्रवेश निर्धारित समय में ही होगा। बाजारों को अतिक्रमण मुक्त भी होना चाहिए। - राहुल राय, प्रत्याशी कांग्रेस