झज्जर। मानेसर में मजदूर आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज कर 55 मजदूरों को गिरफ्तार करने के विरोध में सोमवार को लघु सचिवालय में सीटू के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इसमें मजदूरों को रिहा करने की मांग की गई है।
सीटू जिला प्रधान किरण ने बताया कि सरकार के इशारे पर इन मजदूरों पर लाठीचार्ज किया गया और पांच दर्जन के करीब मजदूरों की गिरफ्तारियां की गई जो निंदनीय है। सरकार के इशारे पर लाठीचार्ज कर मजदूरों को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्हाेंने चेतावनी दी है कि यदि इन मजदूरों की बगैर शर्त रिहाई नहीं होती है तो फिर 16 अप्रैल काे उनका संगठन सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि कारखानों में काम करने वाले मजदूरों का आज भयंकर शोषण किया जा रहा है।
मजदूरों से बिना किसी ओवरटाइम के 12 से 14 घंटे काम लिया जा रहा है और साप्ताहिक अवकाश तक का मजदूर आज मोहताज हो चुका है। उन्होंने कहा कि मानेसर में हुए घटनाक्रम के लिए मालिक और खुद सरकार इसकी जिम्मेदार है।
ट्रेड यूनियनों की मांग के बावजूद पिछले 6 साल से न्यूनतम मजदूरी तय नहीं की जा रही थी। ट्रेड यूनियनों ने प्रदेश में 26 हजार वेतन तय करने की मांग उठाई। 8 मई से लेकर 29 दिसंबर 2025 तक न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 9 त्रिपक्षीय (श्रम विभाग, ट्रेड यूनियनों और मालिक प्रतिनिधियों के बीच) बैठक हुई। 29 दिसम्बर को पानीपत में हुई अंतिम बैठक में 23196 मासिक न्यूनतम मजदूरी तय करने पर सर्व सम्मति बन बन गई थी, लेकिन सरकार ने मालिकों के हितों की रक्षा करने के लिए 2 मार्च बजट भाषण में 15220 रुपये की घोषणा की और उसका भी नोटिफिकेशन जारी नहीं किया।
अगर सरकार ये अधिसूचना जारी कर देती तो यह नौबत नहीं आती। महंगाई ने मजदूरों की कमर तोड़ रखी। कम मजदूरी के चलते मजदूरों का जीना हराम हो चुका है, जिसके कारण मजदूरों को मजबुरन सड़कों पर उतरना पड़ा। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में झूठे मुकदमे रद्द किए जाए। सभी गिरफ्तार मजदूरों को बिना शर्त रिहा किया जाए। न्यूनतम सलाहकार समिति की बैठक में 23196 रुपये न्यूनतम वेतन की जो सहमति बनी थी उसको लागू किया जाए। सफीदों और फरीदाबाद सहित अनेक जगह कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं में मारे गए मजदूरों के परिजनों को 50 लाख मुआवजा दिया जाए और कार्यस्थल पर सुरक्षा के इंतजाम मजबूत किए जाएं।