झज्जर। शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई और बागवानी को लेकर बजट जारी किया है। प्रति स्कूल 8 हजार रुपये सालाना दिए जाएंगे। इस राशि को 31 मार्च 2027 तक खर्च करना होगा। इसके बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र भी देना होगा।
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है। यह राशि जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से जारी होगी। इस काम को पूरा कराने की जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को दी है। इस राशि से स्कूल परिसर, छत, शौचालय, खेल मैदान की सफाई, कूड़ा प्रबंधन और बागवानी जैसे काम किए जाएंगे।
निदेशालय ने पत्र में बताया है कि सत्र 2026-27 के लिए विद्यालय की सफाई, छत की सफाई, शौचालयों व खेल के मैदान की सफाई, जल भराव/निकासी का प्रबंध कार्यों के लिए विभाग की तरफ से राजकीय प्राथमिक विद्यालयों को 8000 रुपये प्रति विद्यालय की दर से बजट उपलब्ध करवाया जा रहा है।
इन कार्यों के लिए किसी भी व्यक्ति की किसी भी प्रकार की आंशिक/अल्पकालिक/पूर्णकालिक अनुबंध/नियुक्ति न की जाए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे अनुशासनहीनता के दायरे में आएगी। संबंधित विद्यालय मुखिया सीधे जिम्मेदार होंगे। विद्यालय मुखिया एसएमसी साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके विद्यालयों में आवश्यकता के अनुसार किस-किस समय कौन सा कार्य करवाया जाना है। इसका निर्धारण मासिक आधार पर एसएमसी की मासिक बैठक में किया जाएगा उसी बैठक में ही इसे स्वीकृत करवाया जाएगा।
यह बजट जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों के जरिये दिया जाएगा और इस राशि का भुगतान एसएमसी करेगी। भुगतान का पूरा रिकाॅर्ड रखा जाएगा। इस काम के लिए जारी की गई राशि का यदि किसी विद्यालय की तरफ से उपयोग नहीं किया जाता है तो संबंधित विद्यालय के डीडीओ/प्रिंसिपल/इंचार्ज की तरफ से प्रमाण-पत्र दिया जाएगा कि उनके विद्यालय में सफाई व्यवस्था का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और उन्हें इस राशि की आवश्यकता नहीं है।
इंसेट
जहां कर्मी, वहां नहीं मिलेगा बजट
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए पार्ट टाइम वर्कर काम कर रहे हैं उन विद्यालयों में स्वच्छ प्रांगण स्कीम के तहत कोई बजट उपलब्ध नहीं करवाया जाना है। इसके अतिरिक्त यदि किसी अन्य व्यवस्था के लिए विद्यालय में उपरोक्त कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रबंध किया गया है तो डीडीओ/प्रिंसिपल/इंचार्ज की तरफ से डीईईओ को सूचना प्रेषित की जाएगी। इसके बाद डीईईओ अपने जिले की संकलित सूचना निदेशालय को प्रेषित करेंगे।