प्रदेश में हर साल करीब 150 डॉक्टर डीएम-एमसीएच की डिग्री हासिल करते हैं। इन्हें दो साल तक किसी चिकित्सा संस्थान या मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सेवा करनी होती है। माहभर पहले ये डॉक्टर डिग्री हासिल कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इन्हें तैनाती के लिए काउंसिलिंग नहीं हुई है।
चिकित्सा संस्थानों में डीएम व एमसीएच की डिग्री हासिल करने वाले डॉक्टरों को बॉन्ड के तहत तैनात करने का मामला गरमाता जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग उन्हें ब्राड स्पेशियलिटी के तहत तैनाती की तैयारी कर रहा है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि इससे कई तरह की समस्याएं आएंगी।
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प्रदेश में हर साल करीब 150 डॉक्टर डीएम-एमसीएच की डिग्री हासिल करते हैं। इन्हें दो साल तक किसी चिकित्सा संस्थान या मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सेवा करनी होती है। माहभर पहले ये डॉक्टर डिग्री हासिल कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इन्हें तैनाती के लिए काउंसिलिंग नहीं हुई है। वहीं, चिकित्सा शिक्षा विभाग इन विशेषज्ञ डॉक्टरों के जरिए विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में बने सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को चालू करने की तैयारी कर रहा है। इन विशेषज्ञों को कार्य ब्राड स्पेशियलिटी के तहत दिया जाएगा।
इसके तहत जहां न्यूरो सर्जरी विभाग नहीं है, वहां जनरल सर्जरी विभाग में इन विशेषज्ञों को तैनात किया जाएगा। इसी तरह जहां इम्युनोलॉजी विभाग नहीं है, वहां इनसे मेडिसिन में कार्य लिया जाएगा। विभाग की इस तैयारी पर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि मास्टर ऑफ सर्जरी करने के बाद ही उन्हें एमसीएच न्यूरो सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी, इंडोक्राइन सर्जरी आदि में प्रवेश मिला है। ऐसे में फिर से जनरल सर्जरी में काम करना उनकी प्रशिक्षण दक्षता का दुरुपयोग है।
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डीएम व एमसीएच की डिग्री पूरी करने वालों की तैनाती के लिए काउंसिलिंग की तैयारी चल रही है। प्रयास है कि सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक शुरू कर दिया जाए, जिससे मरीजों को लखनऊ के चक्कर नहीं काटने पड़े। ब्राड स्पेशियलिटी के तहत डीएम डिग्रीधारी संबंधित मेडिकल कॉलेजों में कार्य कर सकते हैं।