स्वास्थ्य विभाग अब गर्भवती महिलाओं को ऑनलाइन ट्रैक करेगा। इसके लिए विभाग की ओर से मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (एमसीटीएस) नाम से एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इस सॉफ्टवेयर में गर्भवती महिला एवं योग्य दंपति का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा, जिससे विभागीय अधिकारी व कर्मचारी को निगरानी रखने में मदद मिलेगी। विभाग का दावा है कि इससे कन्या भ्रूण हत्या रोकने में भी मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग के पास अभी जो महिला मरीज आती हैं, उनका ओपीडी कार्ड बनाया जाता है। गर्भवती महिलाओं को क्या-क्या इलाज मिला है, इसकी जानकारी ओपीडी कार्ड में होती है। अब सारा कुछ ऑनलाइन करने की कवायद चल रही है। स्वास्थ्य विभाग गर्भवती होने के बाद ही सारा रिकॉर्ड पोर्टल पर रख लेगा। उसके बाद बच्चे के जन्म तक सभी रिकॉर्ड को व्यवस्थित ढंग से ऑनलाइन किया जाएगा।
गर्भावस्था के दौरान उसको दिया जाने वाला सभी इलाज और कोर्स भी उसमें दर्ज करना होगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चे के जन्म तक उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। मोबाइल पर जांच संबंधित मैसेज भी आएंगे। इसके लिए महिलाओं को रजिस्ट्रेशन के वक्त अपना मोबाइल नंबर देना होगा।
16 नंबर का यूनिक आईडी
विभाग द्वारा 16 अंकों का एक यूनिक आईडी दिया जाएगा। आईडी के द्वारा डॉक्टर व मरीज अपना रिकॉर्ड कभी भी देख सकेंगे। इसके अलावा योग्य दंपति का रिकार्ड भी ऑनलाइन रखा जाएगा। योग्य दंपति ऑनलाइन 21 से लेकर 49 वर्ष की आयु तक रखे जाएंगे, लेकिन ये पोर्टल पर नहीं होंगे। पोर्टल पर केवल गर्भवती महिला ही होगी। इसके लिए विभाग ने सभी एएनएम तथा आशा वर्कर्स को इसकी ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी है, ताकि वे सभी का रिकॉर्ड मेनटेन रख सकें।