फोटो-62: बहादुरगढ़ में एक पैकेजिंग फैक्टरी में काम करता कामगार। फाइल फोटो
बहादुरगढ़। खाड़ी देशों में तनाव कम होने और युद्धविराम की खबरों के बाद बहादुरगढ़ के पैकेजिंग उद्योग से जुड़े उद्यमियों में राहत की उम्मीद जगी है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है तो पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की कीमतों में कमी आएगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और कारोबार को गति मिलेगी।
बहादुरगढ़ में करीब 500 इकाइयां विभिन्न प्रकार के पैकेजिंग उद्योग से जुड़ी हुई हैं। इनमें प्लास्टिक पैकेजिंग, फ्लेक्सिबल पैकेजिंग, इंडस्ट्रियल पैकिंग और अन्य उत्पाद बनाने वाली फैक्टरियां शामिल हैं। उद्यमियों के अनुसार पिछले चार-पांच महीनों के दौरान कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक अनिश्चितताओं और मांग में कमी के कारण उद्योग को करीब 300 करोड़ रुपये का आर्थिक फटका लगा है। खाड़ी देशों के बीच फरवरी माह के अंत में युद्ध की वजह से बहादुरगढ़ के उद्योग पर भी संकट छाया हुआ है।
शिवा इंटरप्राइजेज के संचालक सुरेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। खाड़ी क्षेत्र में शांति कायम रहने पर कच्चे माल के दाम नियंत्रित होंगे और उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी।
गोयल पैकर्स के नीरज गोयल ने बताया कि बीते महीनों में लागत बढ़ने से उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हुई है। अब उद्यमियों को उम्मीद है कि कच्चा माल सस्ता होने से उत्पादन बढ़ेगा और नए ऑर्डर मिलने शुरू होंगे।
वहीं विशिष्ट पैकेजिंग के विकास गुप्ता का कहना है कि युद्धविराम का सकारात्मक असर आने वाले महीनों में दिखाई दे सकता है। यदि वैश्विक बाजार स्थिर रहता है तो अगले पांच से छह माह में पैकेजिंग उद्योग पूरी तरह से पटरी पर लौट सकता है।
उद्यमियों का मानना है कि कच्चे माल की कीमतों में गिरावट और बाजार में मांग बढ़ने से बहादुरगढ़ का पैकेजिंग उद्योग फिर से विकास की राह पकड़ सकेगा, जिससे उत्पादन, रोजगार और निर्यात गतिविधियों को भी बल मिलेगा।
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