झज्जर। सिविल अस्पताल में लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इस कारण मरीजों को बाहर निजी अस्पतालों से इलाज करवाना पड़ता है या फिर रोहतक पीजीआई जाना पड़ता है।
सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 42 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 32 पद पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं। इसमें मुख्य रूप से फिजिशियन, चर्म रोग और ईएनटी विशेषज्ञ नहीं है। इसके अलावा कुछ डॉक्टरों की नियुक्ति विभाग की तरफ से हाल ही में बने मेडिकल कॉलेज में की गई है और वहां पर पिछले कई माह से उनकी सेवाएं चल रही हैं। इस कारण सिविल अस्पताल में उनके पद तो भरे हुए हैं, लेकिन उनकी सेवाएं मेडिकल कॉलेजों में चल रही हैं।
सिविल अस्पताल में पिछले कई सालों से चर्म रोग और ईएनटी का डॉक्टर नियमित रूप से नहीं है। अस्पताल में प्रतिदिन चर्म रोग और ईएनटी के मरीज आते हैं, लेकिन डॉक्टर न आने के कारण उनको वापस जाना पड़ता है। ईएनटी विशेषज्ञ फिर भी बहादुरगढ़ से सप्ताह में एक या दो दिन बुलाकर काम चलाया जाता है, लेकिन चर्म रोग विशेषज्ञ काफी समय से नहीं है। इसके अलावा फिजिशियन की नियमित नियुक्ति भी कई साल से नहीं हुई है। पिछले दिनों डेपुटेशन पर डॉक्टर दो माह के लिए आए हैं। इससे कुछ राहत मरीजों को जरूर मिली है।
महिला आयोग की सदस्य को दी भी जानकारी
गत दिवस महिला आयोग की सदस्य भारती सैनी ने भी सिविल अस्पताल का दौरा किया था। उन्होंने भी अस्पताल में तैनात डॉक्टरों व खाली पदों की जानकारी मांगी थी। उनको भी बताया गया था कि यहां पर 42 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 10 खाली हैं।
वर्जन
अस्पताल में कुछ डॉक्टर डेपुटेशन पर मेडिकल कॉलेजों में भेजे गए हैं। कुछ विशेषज्ञों के पद खाली हैं। उनकी मांग पत्र लिखकर लगातार की जाती है।
डॉ. अजय सिंगला, एसएमओ, सिविल अस्पताल