बिजनौर में छेड़छाड़ के बाद हुई हिंसा में घायल हुए लोगों का इलाज के लिए मेरठ भी भी चक्कर काटने पड़े। बिजनौर जिला अस्पताल से पांच घायलों को इलाज के लिए लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया गया था लेकिन यहां पर घायलों को यह करकर भर्ती करने से मना कर दिया कि आपका मेडिको लीगल नहीं हुआ है। करीब एक घंटे तक परिजनों को घायलों को भर्ती कराने की कोशिश में लगे रहे, लेकिन सफलता ना मिलती निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। उधर, मेडिकल कालेज प्रशासन ने घायलों को इमरजेंसी में लाये जाने से ही इनकार किया है। कालेज प्रशासन का कहना है कि सिर्फ अलर्ट रहने का निर्देश था बाकि शाम पांच बजे तक कोई भी मरीज भर्ती नहीं कराया गया।
ghayal
- फोटो : अमर उजाला
हिंसा के बीच गोली लगने से घायल हुए पांच लोगों को बिजनौर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला संयुक्त चिकित्सालय से रेफर किया गया था। दो घायलों को सुबह सवा नौ बजे और तीन घायलों को पौने 10 बजे मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया गया। पांचों घायलों को एंबुलेंसों के जरिये करीब साढ़े 10 से सवा 11 बजे के बीच मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में ला गया। इस दौरान परिजनों रेफर स्लिप को लेकर इमरजेंसी के अंदर गई और मौके पर तैनाक ईएमओ से मिले। बताया जा रहा है कि उन्होंने भर्ती करने का निर्देश दिया था लेकिन उसके बाद भी स्टाफ ने यह कहते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया कि यह झगड़े का केस है। रेफर स्लिप के साथ किसी भी मरीज को मेडिको लीगल नहीं किया गया है। घायल के परिजन मौहम्मद अकबर का कहना है कि हम लोग घंटों तक मेडिकल कालेज में अपने मरीजों को भर्ती कराने के लिए जूझते रहे लेकिन किसी न नहीं सुनी, ऐसी स्थिति में वहां पर कुछ लोगों ने हमें सलाह दी कि आपके मरीजों की तबीयत ज्यादा खराब है और यहां पर स्थिति खराब हो जायेगी। जिसके बाद हमें उन्हें गढ़ रोड स्थित सरस व भाग्यश्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया है।
sadab
- फोटो : अमर उजाला
घायलों में एक ही हालत नाजुक
पांच घायलों में से तीन भाग्यश्री में भर्ती है जिसमें से मौहम्मद अंसार पुत्र नफीस की हालत थोड़ी नाजुक है, जबकि बाकी चार अन्य घायलों की हालत स्थिति है और बोल भी रहे हैं।
ये भर्ती घायल
सरस हॉस्पिटल
1- शादाब (16 वर्षीय) पुत्र जुल्फिकार
2- मौहम्मद सलीम (22 वर्षीय) पुत्र समीम
भाग्यश्री हॉस्पिटल
1- मौ. रिजवान (30 वर्षीय) पुत्र शराफत
2- मौ. असार (26 वर्षीय) पुत्र नफीस
3- मौ. सलाउद्दीन (18 वर्षीय) पुत्र बखरुद्दीन