पुरानी तहसील की बिल्डिंग जिसमें संचालित है बालिका कालेज।
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नगर के पुराने तहसील भवन में चल रहे रमाबाई राजकीय बालिका इंटर कालेज की जमीन के हस्तांतरण का मामला आखिरकार सुलट गया है। राजस्व विभाग से शिक्षा विभाग को जमीन हस्तांतरण होने में 21 साल लग गए। जमीन हस्तांतरण न होने से अभी तक छात्राएं जर्जर भवन में पढ़ रही थीं। शहर में नये तहसील भवन का निर्माण हो जाने पर तत्कालीन सहकारिता मंत्री पं.रामप्रकाश त्रिपाठी ने पुराने तहसील भवन में बालिकाओं के लिए कालेज खोले जाने की मुख्यमंत्री से मांग की थी।
उस समय प्रदेश में बसपा और भाजपा की साझे की सरकार थी। अब से 21 वर्ष पहले 27 सितंबर 1995 को शहर में नये तहसील भवन का शिलान्यास करने आईं तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पुराने तहसील भवन में रमाबाई राजकीय बालिका इंटर कालेज खोले जाने की मंच से घोषणा की थी। इसके बाद 29 मई 1997 को पुराने तहसील भवन में स्कूल की स्थापना कर दी गई और जुलाई 1997 से विद्यालय का विधिवत संचालन शुरू हो गया।
13 मई 1997 को प्रमुख सचिव राजस्व को पुराने तहसील भवन को शिक्षा विभाग को हस्तांतरण करने के लिए पत्र लिखा गया। इसके बाद तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक कमलेश बाबू ने 20 दिसंबर 2008 को जिलाधिकारी को इस संबंध में पत्र लिखा। कालेज के शिक्षक, अभिभावक, संघ के अध्यक्ष फहीमजमां खां ने भी इस संबंध में जिलाधिकारी और शासन को कई पत्र लिखे। यहां तक की कालेज की तत्कालीन प्रधानाचार्या ने 2 मई 2007 को जिलाधिकारी को पत्र भेजा।
कालेज की स्थापना से लेकर अब तक लगभग 21 साल के लंबे सफर के दौरान जमीन हस्तांतरण कराने को लेकर शासन और प्रशासन के बीच कवायद चलती रही, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। कई बार मुख्यमंत्री के सामने भी इस मामले को उठाया गया। आखिरकार क्षेत्रीय विधायक अरविंद सिंह यादव की पहल रंग लाई।
जमीन हस्तांतरण का मामला सुलट जाने से अब जहां एक ओर कालेज का अपना नया भवन होगा। सूत्र बताते हैं कि भवन निर्माण को लेकर शिक्षा विभाग ने कई बार धनराशि आवंटित भी की थी, लेकिन जमीन शिक्षा विभाग के नाम न होने से धनराशि डंप पड़ी रही और अंत में वापस चली गई थी। इस संबंध में जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि शहर के रमाबाई राजकीय बालिका इंटर कालेज के लिए शिक्षा विभाग को 90 वर्ष के पट्टे पर जमीन उपलब्ध करवा दी गई है।