पुखराया रेलवे स्टेशन के निकट इन्दौर से पटना जा रही इन्दौर-राजेंद्रनगर एक्सप्रेस के डिब्बों के पटरी से उतरने के बाद हुई मौतें सैकड़ों परिवारों के जीवन मे कभी न भरने वाला जख्म दिया है। ट्रेन हादसे का शिकार हुई महराजगंज के नेहरू वार्ड निवासी शीला जायसवाल भी फरेंदा में अपने देवर की शादी मे शामिल होने इंदौर से फरेन्दा आ रही थी। ट्रेन हादसे के बाद फरेंदा में शादी की तैयारियों में जुटे परिवार की खुशियां मातम में बदल गई।
फरेंदा में अपने देवर सूरज जायसवाल की शादी में शामिल होने आ रही शीला जायसवाल उर्फ डाली की ट्रेन हादसे में हुई मौत की खबर सुनकर फरेंदा के लोहिया मार्केट में स्थित जगदीश जायसवाल के घर मातम छा गया। शादी की तैयारियों में लगा पूरा परिवार शीला जायसवाल के पहुंचने का इंतजार कर रहा था। लेकिन उनकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। शादी की शहनाईयां की जगह चीख पुकार में बदल गई। परिवार वाले समझ नहीं पा रहे थे कि अब क्या होगा पहले तो लोग शादी को टालने के लिए कहने लगे पर किसी तरह लोगों के समझाने बुझाने पर परिवार के लोग शादी को सादगी के साथ करने की बात माने। सोमवार को शीला के देवर सूरज जायसवाल की बारात तो निकली पर न कोई बैंड बाजा न शहनाई केवल बाराती के नाम पर दस से पंद्रह लोग बहुत ही बुझे मन से वृजमनगंज के सहजनवां बाबू स्थित वधू पक्ष के घर पहुंचे। सामाजिक रीति रिवाज जल्द से जल्द पूरा कर परिवार शीला जायसवाल के अंतिम दर्शन करने महराजगंज पहुंचने की चाह रहा था। किसी तरह शादी की रश्मे जल्द से जल्द पूरी कर नारायन जायसवाल का पूरा परिवार महराजगंज के लिए रवाना हो गया। शाम को शीला का दाहसंस्कार त्रिमुहानी घाट पर किया गया।
शादी के एक दिन पहले पहुंचना चाहती थी शीला
फरेंदा। अपने छोटे देवर की शादी की सूचना जब मिली तो संजय व शीला जायसवाल को अपार खुशी हुई लेकिन शीला को क्या पता था कि शादी के ही दिन उनकी शव यात्रा भी निकलने वाली है। शादी के एक दिन पहले पहुंचने की चाह में संजय पत्नी शीला को ट्रेन पर बैठा कर अपने खुद बनारस के मित्रों के साथ चार पहिया वाहन से कानपुर पहुंचने की चाह थी। कानपुर से वह पति पत्नी एक साथ फरेंदा पहुंचते लेकिन विधाता ने कानपुर के पहले की भयंकर हादसा ने पूरे परिवार के अरमान को चकनाचूूर कर दिया। संजय का शादी में पहुंचने की भी इच्छा थी लेकिन सब कुछ समाप्त हो गया। संजय के साथ उनके दो पुत्र भी साथ आना चाह रहे थे। लेकिन दोनों की परीक्षा के कारण वह दूसरे दिन फरेंदा पहुंचते। कुदरत ने नरायण जायसवाल के परिवार में ऐसा दर्द दिया जो पूरा जीवन नही भूलने वाला है।