फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एशियाड की विजेता सुधा ने इस शहर को कहा अपना कर्मस्थल... कोच ने भी साझा की यादें

Tue, 28 Aug 2018 01:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
सुधा सिंह - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
‘सच बताऊं, तो यह पदक मेरे लिए बहुत मायने रखता है। आठ साल पहले ग्वांगझू में स्वर्ण पदक जीतने की खुशी महसूस हो रही है। एक ऐसा भी वक्त आया था, जब मैं बहुत निराश हो गई थी, लेकिन जकार्ता एशियन गेम्स के रजत पदक ने मेरे जीवन में एक बार फिर खुशी का संचार किया है। अब मैं दोगुनी मेहनत से ट्रेनिंग करूंगी।’ यह कहना है जकार्ता एशियाड की 3000 मीटर स्टीपल चेज में रजत जीतने वाली एथलीट 32 वर्षीय सुधा सिंह का, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से आलोचकों के मुंह पर ताले जड़ दिए। 
विज्ञापन


अमर उजाला से फोन पर हुई खास बातचीत में उन्होंने इस पदक के लिए अपने परिवार का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि पिता, मां और भाई ने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसलिए यह पदक मैं उन्हीं को समर्पित करती हूं। 

लखनऊ मेरी कर्मस्थली रही है। यहां केडी सिंह बाबू के एथलेटिक्स हॉस्टल में (2002 से 2005 तक) विमला मैम से एथलेटिक्स की बारीकियां सीखीं। इस शहर से मेरा नाता कभी न टूटने वाला है। 
विज्ञापन


पश्चिम रेलवे में सीनियर टीटी पद पर कार्यरत सुधा ने यूपी सरकार के शासनादेश के अनुसार, जॉब मिलने के बाबत पूछने पर कहा, कौन अपने घर वापस नहीं आना चाहता है। मैं बहुत पहले सरकार में उच्च पदाधिकारियों से मिलकर बात कर चुकी हूं। अब तो पदक भी जीत लिया है। सरकार से राजपत्रित अधिकारी का ऑफर मिला तो खुशी से स्वीकार करूंगी।
विज्ञापन

'सुधा बहुत शानदार एथलीट'

एशियन गेम्स के इतिहास में आठ साल बाद पदक जीतकर सुधा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उम्र से उसके प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा है। हालांकि, वह रेस में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दोहरा सकी। अगर ऐसा होता तो वह स्वर्ण जीत सकती थी। वह बहुत शानदार एथलीट है। कैंप के दौरान चीफ कोच निकोलाई से हुए विवाद के बावजूद वह इससे उबरने में कामयाब रही। कोच सुरेंद्र सिंह ने उसे सही दिशा में ट्रेनिंग दी और परिणाम सबके सामने है। आज भी लखनऊ में अपने प्रवास के दौरान वह मुझसे मिलने के अलावा बाबू स्टेडियम के हॉस्टल में युवा एथलीटों से मिलना नहीं भूलती है। यह चीजें उसे बड़ा खिलाड़ी बनाती हैं। 
-विमला सिंह (सुधा सिंह की कोच)

लखनऊ हॉस्टल के लिए गर्व की बात 
बाबू स्टेडियम के लखनऊ हॉस्टल के लिए गर्व की बात है। इस पदक से हॉस्टल में रह रही तमाम उभरती हुई एथलीटों को  प्रेरणा मिलेगी। वे भी सुधा जैसे चमकने के लिए प्रयास करेंगी। लखनऊ आने पर सुधा का भव्य स्वागत किया जाएगा।
-जितेंद्र यादव (क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें