नारायणपुर जिले के डूमरतराई गांव में देहरी परिवार ने आधुनिक युग में भी अपनी पुरानी संस्कृति को अपनाया। उन्होंने लक्जरी गाड़ी की जगह बैलगाड़ी में अपनी बारात निकाली। इस अनोखी शादी को देखने के लिए लोगों का तांता लग गया और यह गांव में चर्चा का विषय बन गई।
आज के आधुनिक युग में लोग बारात निकालने के लिए महंगी कारों और हेलीकॉप्टर का उपयोग करते हैं। ऐसे समय में कुबेर देहरी और उनके परिवार ने यह अनूठी पहल की। उन्होंने बैलगाड़ी से बारात निकालकर भारतीय ग्रामीण संस्कृति और पुरानी परंपराओं को सहेजने का अमूल्य संदेश दिया।
यह पहल मुख्य रूप से खर्चीली शादियों को कम करने में सहायक है। यह वर्तमान में प्रधानमंत्री के आह्वान पर पेट्रोल डीजल की कमी के साथ परंपराओं को जीवित रखने का संदेश भी देती है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी देती है। इस शादी का वीडियो भी साझा किया जा रहा है। लोग इस संस्कृति को जीवित रखने वालों की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में इस युवक ने बैलगाड़ी पर बारात निकालकर संस्कृति को सहेजने का संदेश दिया। बारात में ढोल की जगह पुराने वाद्ययंत्रों का उपयोग किया गया। टेंट की जगह पेड़-पौधों के पत्तों से सजावट की गई थी। यह अनोखी पहल पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
यह पहल मुख्य रूप से खर्चीली शादियों को कम करने के उद्देश्य से की गई है। आधुनिकता के दौर में लोग शादी-विवाह में अत्यधिक खर्च करते हैं। बैलगाड़ी का उपयोग कर देहरी परिवार ने सादगी का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी यह पहल अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।