पीजीआई डायरेक्टर की दौड़ में कुल 29 प्रोफेसर शामिल हैं। इनमें से करीब 22 प्रोफेसर पीजीआई के हैं। सभी वरिष्ठ हैं और अधिकतर हेड ऑफ डिपार्टमेंट हैं। संस्थान में ऐसी चर्चा है कि सभी के बीच कड़ा मुकाबला है। एकेडमिक और क्लिनिकल रिसर्च में तो सब एक-दूसरे पर बराबर पड़ सकते हैं, लेकिन पलड़ा उसी का भारी रहेगा, जिसकी पीएमओ कार्यालय में राजनीतिक पहुंच होगी।
सभी आवेदकों का प्रोफाइल बनाकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास भेज दिया गया है। अब मंत्रालय की सर्च कमेटी इन 29 प्रोफेसरों को परखेंगे और पांच से छह नाम फाइनल कर उन्हें कैबिनेट अप्वाइंटमेंट कमेटी के पास भेज देगी। कैबिनेट अप्वाइंटमेंट कमेटी ही पीजीआई के नए डायरेक्टर का नाम फाइनल करेगी।
छह अक्तूबर से पहले नाम होगा फाइनल पीजीआई डायरेक्टर का नाम छह अक्तूबर से पहले फाइनल होगा। दरअसल छह को मौजूदा डायरेक्टर डॉ. वाइके चावला का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उससे पहले नए डायरेक्टर का नाम फाइनल होने की संभावना है। मंत्रालय ने जिस तरह से नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी दिखाई है, उससे लग रहा है कि जल्द से जल्द डायरेक्टर का नाम फाइनल करने की कोशिश रहेगी।
अब भी आ रहे हैं आवेदन डायरेक्टर की पोस्ट के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 20 अप्रैल तय की गई थी। तय तारीख तक जितने आवेदन आए थे, सिर्फ उन्हें शामिल किया गया। उसके बाद आने वाले आवेदनों को स्वीकार नहीं किया गया। पीजीआई से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अब भी पूरे देश से पीजीआई में आवेदन आ रहे हैं, लेकिन उसे अब रद्दी की टोकरी में डाला जा रहा है, क्योंकि अब उनके आवेदन शामिल नहीं किए जा सकते।
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट का भी नाम आगे बढ़ाया गया डायरेक्टर बनने की दौड़ में शामिल 23 प्रोफेसरों में पीजीआई के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट भी शामिल हैं। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से उन्हें चार्जशीट किए जाने के बावजूद उनके आवेदन को पीजीआई ने आगे बढ़ाया है। सूत्रों का दावा है कि उनके पास विजिलेंस की क्लीयरेंस थी। उन्होंने आवेदन देने से पहले विजिलेंस की क्लीयरेंस ले ली थी, इसलिए उनके आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता था।
....लेकिन नाम फाइनल होने तक रहेगा सस्पेंस पीजीआई का नया डायरेक्टर कौन होगा, इस पर आखिरी तक सस्पेंस रहता है। साल 1990-1991 में डॉ. केएस चुघ का नाम डायरेक्टर के लिए फाइनल हो गया था। लोग उन्हें मुबारकबाद देने लगे थे, लेकिन बाद में पता चला कि डॉ. बीएनएस वालिया का नाम तय कर दिया गया है। इसलिए संस्थान में इस बात की भी चर्चा है कि जब तक किसी के नाम का अप्वाइंटमेंट लेटर न आ जाए, तब तक किसी के नाम पर चर्चा करना बेईमानी होगी।