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दिल्ली के स्कूलों में MAMC स्टडी: लड़कियां समय से पहले हो रहीं परिपक्व...ये है अहम कारण; रिसर्च ने बढ़ाई चिंता

Thu, 22 Jan 2026 09:24 AM IST
राहुल तिवारी सिमरन, नई दिल्ली

सार

फास्ट फूड, मोबाइल, टीवी की बढ़ती आदत और खेल-कूद से दूरी अब बच्चों के सेहत पर गहरा असर डाल रही है। इसका असर सिर्फ वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के शारीरिक विकास की रफ्तार भी बदल रही है। एक रिसर्च में रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
 
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दिल्ली के स्कूलों में MAMC की स्टडी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की एक नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राएं समय से पहले शारीरिक रूप से परिपक्व हो रही हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, असंतुलित खान-पान, जंक फूड और बढ़ता मोटापा लड़कियों के शरीर में हार्मोनल बदलाव जल्दी ला रहा है। यह शोध माता-पिता और समाज दोनों के लिए चेतावनी है कि बच्चों की जीवनशैली पर अब गंभीर ध्यान देने की जरूरत है।

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अध्ययन में स्कूली लड़कियों पर विस्तृत अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि बच्चों के बढ़ने और प्यूबर्टी शुरू होने के पैटर्न में पिछले कुछ वर्षों में साफ बदलाव देखने को मिल रहा है। शोध के मुताबिक, मौजूदा समय की लड़कियों में किशोरावस्था पहले शुरू हो रही है और इस दौरान उनकी लंबाई बढ़ने की गति भी ज्यादा देखी जा रही है। विशेषज्ञ इसे पोषण, जीवनशैली और शरीर के वजन में बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं।

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यह प्रोस्पेक्टिव कोहोर्ट स्टडी साल 2018 में शुरू की गई थी, जिसमें 3 से 18 साल की 2470 स्कूली लड़कियों को शामिल किया गया। माता-पिता की सहमति के बाद करीब ढाई साल तक इन लड़कियों की निगरानी की गई। इस दौरान हर छह महीने पर स्कूल विजिट के समय उनकी लंबाई और वजन मापा गया, जबकि प्यूबर्टी से जुड़े शारीरिक बदलावों का आकलन हर साल किया गया।

अब पहले ही शुरू हो रही प्यूबर्टी
अध्ययन में शामिल लड़कियों की औसत उम्र लगभग 10 साल थी। शोध के नतीजों के मुताबिक, लड़कियों में स्तनों का विकास यानी थेलार्चे की औसत उम्र करीब 10 साल और माहवारी शुरू होने यानी मेनार्चे की औसत उम्र करीब 12 साल पाई गई। यह उम्र पहले की तुलना में कम मानी जा रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्यूबर्टी अब पहले शुरू हो रही है। प्यूबर्टी के दूसरे चरण में लड़कियों की लंबाई बढ़ने की गति सबसे अधिक होती है। 

इस दौरान औसतन 6 सेंटीमीटर से अधिक लंबाई हरह साल बढ़ी, जो अन्य चरणों की तुलना में काफी ज्यादा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि किशोरावस्था के शुरुआती वर्षों में शारीरिक विकास सबसे तेज होता है। ज्यादा वजन या मोटापे से ग्रस्त लड़कियों में प्यूबर्टी और माहवारी पहले हो रही है।
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माता-पिता दें इस पर विशेष ध्यान
विशेषज्ञों के मुताबिक, समय के साथ बच्चों के विकास का पैटर्न बदला है। बेहतर पोषण, शहरी जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों में बदलाव इसके प्रमुख कारण माने जा रहे। डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के अध्ययन माता-पिता और शिक्षकों के लिए बेहद उपयोगी हैं। इससे बच्चों के शारीरिक विकास को समझने और समय पर सही मार्गदर्शन देने में मदद मिलती है।

डॉ. आशीमा डबास ने कहा कि खान पान और आसपास के माहौल का बच्चों के विकास पर गहरा असर पड़ रहा है। समय से पहले शारीरिक बदलाव भविष्य में अंगों की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में बच्चों की डाइट और उनके सक्रिय लाइफस्टाइल पर खासकर ध्यान देने की जरूरत है।
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