यह प्रोस्पेक्टिव कोहोर्ट स्टडी साल 2018 में शुरू की गई थी, जिसमें 3 से 18 साल की 2470 स्कूली लड़कियों को शामिल किया गया। माता-पिता की सहमति के बाद करीब ढाई साल तक इन लड़कियों की निगरानी की गई। इस दौरान हर छह महीने पर स्कूल विजिट के समय उनकी लंबाई और वजन मापा गया, जबकि प्यूबर्टी से जुड़े शारीरिक बदलावों का आकलन हर साल किया गया।
अब पहले ही शुरू हो रही प्यूबर्टी
अध्ययन में शामिल लड़कियों की औसत उम्र लगभग 10 साल थी। शोध के नतीजों के मुताबिक, लड़कियों में स्तनों का विकास यानी थेलार्चे की औसत उम्र करीब 10 साल और माहवारी शुरू होने यानी मेनार्चे की औसत उम्र करीब 12 साल पाई गई। यह उम्र पहले की तुलना में कम मानी जा रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्यूबर्टी अब पहले शुरू हो रही है। प्यूबर्टी के दूसरे चरण में लड़कियों की लंबाई बढ़ने की गति सबसे अधिक होती है।
इस दौरान औसतन 6 सेंटीमीटर से अधिक लंबाई हरह साल बढ़ी, जो अन्य चरणों की तुलना में काफी ज्यादा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि किशोरावस्था के शुरुआती वर्षों में शारीरिक विकास सबसे तेज होता है। ज्यादा वजन या मोटापे से ग्रस्त लड़कियों में प्यूबर्टी और माहवारी पहले हो रही है।
माता-पिता दें इस पर विशेष ध्यान
विशेषज्ञों के मुताबिक, समय के साथ बच्चों के विकास का पैटर्न बदला है। बेहतर पोषण, शहरी जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों में बदलाव इसके प्रमुख कारण माने जा रहे। डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के अध्ययन माता-पिता और शिक्षकों के लिए बेहद उपयोगी हैं। इससे बच्चों के शारीरिक विकास को समझने और समय पर सही मार्गदर्शन देने में मदद मिलती है।
डॉ. आशीमा डबास ने कहा कि खान पान और आसपास के माहौल का बच्चों के विकास पर गहरा असर पड़ रहा है। समय से पहले शारीरिक बदलाव भविष्य में अंगों की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में बच्चों की डाइट और उनके सक्रिय लाइफस्टाइल पर खासकर ध्यान देने की जरूरत है।